आशीष नंदी की गिरफ्तारी पर सुप्रीम कोर्ट की रोक

आशीष नंदी
Image caption आशीष नंदी के बयान को लेकर राजनीतिक दलों ने आपत्ति जताई थी

सुप्रीम कोर्ट ने प्रसिद्ध समाजशास्त्री आशीष नंदी की गिरफ़्तारी पर रोक लगा दी है.

इसके साथ ही उच्चतम न्यायालय ने आशीष नंदी को सलाह दी है कि उन्हें उस तरह की टिप्पणियों से बचना चाहिए जैसी कि उन्होंने जयपुर साहित्य महोत्सव के दौरान की थी.

छिहत्तर साल के आशीष नंदी के ख़िलाफ़ अनुसुचित जाति/जनजाति क़ानून के तहत जयपुर में पुलिस ने मुक़दमा दर्ज किया था.

इसी तरह का मुक़दमा साहित्य महोत्सव के आयोजनकर्ता संजॉय रॉय के ख़िलाफ़ भी दर्ज किया गया था.

'संभलकर बोलूंगा'

आशीष नंदी ने अदालत के फ़ैसले का स्वागत किया और कहा कि इसके लिए वो कोर्ट और अपने क़ानूनी सलाहकारों के शुक्रगुज़ार हैं.

जब उनसे अदालत की उन्हें दी गई सलाह के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "मैं सावधानी से बात करूंगा और जो भी बोलना होगा वो हिंदुस्तान से बाहर और घर के भीतर बोलूंगा."

सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अपने बयान को लेकर सावधान रहने की सलाह दी है.

उन्होंने इस मामले पर और अधिक कुछ कहने से इनकार किया और कहा कि ये मामला अदालत के विचाराधीन है इसलिए वे इस पर कुछ नहीं कहेंगे.

जब नंदी से कमल हासन और फ़िल्म विश्वरूपम पर जारी विवाद के बार में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ये ग़लत है.

उन्होंने कहा, "ये फ़िल्म जो कुछ अफ़ग़ानिस्तान में हो रहा है उसके बारे में है, इसका हिंदुस्तान से ताल्लुक़ नहीं, इसलिए मैं मुस्लिम भाईयों से अनुरोध करना चाहता हूं कि वो इसे लेकर उत्तेजित न हों."

अपील

नंदी के अपने वकील अमन लेखी के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट से अपील की थी कि वो उनके ख़िलाफ़ दर्ज प्राथिमिकी यानी एफआईआर को रद्द करने का निर्देश जारी करे.

मुख्य न्यायाधीश अलतमस कबीर की एक खंडपीठ ने सुनवाई की तारीख़ शुक्रवार को तय की थी.

जयपुर साहित्य महोत्सव के दौरान बोलते हुए आशीष नंदी ने भ्रष्टाचार और दलितों पर अपने बयान को कुछ इस ढंग से पेश किया था कि कुछ लोगों को लगा था कि वो कह रहे हैं कि भ्रष्ट्राचार के मामलों में सबसे अधिक दलित ही शामिल होते हैं.

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