यौन हिंसा संबंधी अध्यादेश को राष्ट्रपति की मंज़ूरी

  • 3 फरवरी 2013
प्रदर्शन
Image caption बलात्कार संबंधी कानून को सख्त करने की मांग हो रही थी

राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने यौन हमलों पर केंद्रीय कैबिनेट द्वारा मंज़ूर किए गए अध्यादेश पर हस्ताक्षर कर दिया है.

हालांकि एक दिन पहले ही कई महिला संगठनों ने राष्ट्रपति से आग्रह किया था कि वो इस पर हस्ताक्षर न करें, क्योंकि इसमें जस्टिस वर्मा आयोग की सिफ़ारिशों को पूरी तरह से स्वीकार नहीं किया गया है.

राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद अब यह अध्यादेश प्रभाव में आ गया है. लेकिन संसद को छह सप्ताह के भीतर इसे पास करना होगा.

संसद का बजट सत्र 21 फ़रवरी से शुरू हो रहा है.

इससे पहले शुक्रवार को केंद्रीय कैबिनेट ने महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराधों को रोकने के लिए जस्टिस वर्मा समिति के सुझाव के अनुरूप क़ानून को सख़्त बनाने और संशोधन के लिए अध्यादेश को मंज़ूरी दी थी.

संशोधन

इस अध्यादेश में ‘बलात्कार’ शब्द के स्थान पर ‘यौन हिंसा’ रखने का प्रस्ताव है, ताकि उसके दायरे में महिलाओं के ख़िलाफ सभी तरह के यौन अपराध शामिल हों.

इसके दायरे में वैवाहिक बलात्कार को भी लाया गया है.

पिछले साल दिसंबर में दिल्ली में एक 23-वर्षीय छात्रा के साथ हुए सामूहिक बलात्कार और बर्बर हमले के बाद पूरे देश में आंदोलन हुआ और बलात्कार संबंधी क़ानूनों को सख़्त करने की मांग उठी थी.

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