संगीत से देश की तरक़्क़ी नहीं: श्रीनगर मुफ़्ती

  • 4 फरवरी 2013
कश्मीर में रॉक बैंड
Image caption भारतीय कश्मीर में इस समय दर्जनों रॉक बैंड सक्रिय हैं.

भारत प्रशासित कश्मीर में पहले महिला रॉक बैंड बनाने वाली लड़कियों को धमकी के बाद अब 'फ़तवा' का सामना करना पड़ रहा है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार श्रीनगर के मुख्य मुफ़्ती बशीरूद्दीन ने रॉक बैंड में शामिल लड़कियों के ख़िलाफ़ रविवार को बयान देते हुए कहा है कि इस्लाम में संगीत पर पाबंदी है और उन लड़कियों को अच्छी बातें सीखनी चाहिए.

अलगाववादियों ने भी मुफ़्ती बशीरूद्दीन के बयान का समर्थन किया है.

पीटीआई का कहना है कि लड़कियों ने आधिकारिक तौर पर तो कुछ नहीं कहा है और इस बारे में उन्होने ख़ामोशी एख्तयार कर रखी है लेकिन उनके क़रीबी लोगों से मिल रही जानकारी के अनुसार लड़कियों ने संगीत छोड़ने का फ़ैसला कर लिया है.

हालाकि मुफ़्ती बशीरूद्दीन ने बीबीसी से बातचीत के दौरान कहा कि उन्होंने महिला रॉक बैंड पर पाबंदी की बात नहीं कही है.

उन्होंने कहा, ''हमारी लड़कियां जो संगीत की तरफ़ आकर्षित हो रहीं हैं और संगीत को जो बढ़ावा मिल रहा है उससे हमारा देश तरक़्क़ी नही कर सकता.''

मुफ़्ती बशीरूद्दीन ने अनुसार भारतीय समाज में सारी बुरी चीज़ों की जड़ में संगीत ही है.

उन्होंने आगे कहा, ''लड़किया अगर विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ें या धार्मिक और नैतिक शिक्षा की तरफ़ आकर्षित हों और मुल्क का नाम रौशन करें तो ये हमारे लिए बहुत ख़ुशक़िस्मती की बात होगी.''

उन्होंने रॉक बैंड में शामिल लड़कियों के मां-बाप को नसीहत देते हुए कहा कि उन्हें अपने बच्चों को अच्छी बातें सिखाना चाहिए और उन्हें हज़ारों लोगों के सामने मनोरंजन का ज़रिया बनने से रोकना चाहिए.

हालाकि उन्होंने लड़कियों को धमकी दिए जाने का विरोध किया. उन्होंने कहा कि वो इन लड़कियों को गाली देने और डराने धमकाने का सख़्ती से विरोध करते हैं.

प्रगाश

'ब्लड रॉक्स' नाम के संगीत बैंड चलाने वाले कुछ लड़कों ने पहली बार महिलाओं के बैड 'प्रगाश' के बारे में सोचा था. और इस तरह केवल लड़कियों वाले संगीत बैंड प्रगाश का गठन हुआ जिसका अर्थ है प्रकाश की किरण.

ब्लड रॉक्स के मैनेजर अदनान ने बीबीसी से बातचीत करते हुए कहा, ''इन लड़कियों को संगीत से बहुत लगाव है और हम लोगों ने तो सिर्फ़ कैसे गाना गाय जाए ये सिखाने और बैंड के गठन में उनलोगों की थोड़ी सी मदद की.''

ख़बरों के मुताबिक़ इस नए विवाद के बाद अदनान ने भी घाटी को छोड़ दिया है.

इस रॉक बैंड में शामिल दसवीं क्लास में पढ़ने वाली तीन लड़कियां नोमा नज़ीर, फरहा दीबा और अनिका ख़ालिद पिछले साल दिसंबर में पहली बार सुर्खियों में आई थीं जब उन्होंने श्रीनगर में 'बैटल ऑफ़ द बैंड' नामक सालाना प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन किया था.

उसके बाद से ही इन लड़कियों को धमकियां मिल रहीं थीं. लेकिन अब तक ये सारी धमकियां उन्हें ऑनलाइन मिल रहीं थीं. कुछ लोग फ़ेसबुक और ट्विटर पर उन लड़कियों के ख़िलाफ़ अपशब्द का इस्तेमाल कर रहे थे.

लेकिन पहली बार समाज में बहुत ही सम्मानित समझे जाने वाले एक मुफ़्ती ने उन लड़कियों के खिलाफ़ आधिकारिक तौर पर कोई बयान दिया है.

उमर अब्दुल्लाह

ग़ौरतलब है कि लड़कियों को धमकी मिलने के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने लड़कियों को सुरक्षा का भरोसा दिया था और कहा था कि उन्हें डरने की ज़रूरत नहीं है. उन्होंने ट्विटर पर लिखा था कि लड़कियों को धमकाने वालों को गिरफ़्तार कर लिया जाएगा.

लेकिन उनके विश्वास दिलाने के बावजूद लड़कियों के ख़िलाफ़ ये ताज़ा बयान आया है और अब लड़कियां कहां हैं कुछ कहना मुश्किल है. क्योंकि उनके परिवारवालों ने इस बारे में कुछ भी कहने से मना कर दिया है.

कुछ लोगों का कहना है कि लड़कियां श्रीनगर छोड़कर दिल्ली चली गई हैं.

इस बीच भारतीय जनता पार्टी के नेता बलबीर पुंज ने इसकी निंदा करते हुए कहा है कि कश्मीर और देश के कुछ दूसरे हिस्सों में 'तालिबानीकरण' की कोशिश की जा रही है.

उन्होंने उमर अब्दुल्लाह के बयान की तारीफ़ करते हुए कहा, ''धार्मिक कट्टरपंथी अपनी मर्ज़ी से समाज को चलाना चाहते हैं. मैं मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह के ज़रिए उठाए गए कड़े क़दम का स्वागत करता हूं.''

कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ''मैंने हमेशा कहा है कि चाहे हिंदू कट्टरपंथी हों या मुस्लिम कट्टरपंथी, उनकी विचारधारा देश को अठारहवीं सदी में ले जाएगा. हम इस तरह की चीज़ों का समर्थन नहीं कर सकते है.''

अलगाववादी

लेकिन अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी ने इस मामले में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह के सख़्त रवैये का विरोध किया है.

गिलानी के प्रवक्ता ने एक बयान जारी कर कहा है, ''हमलोग अभिव्यक्ति की आज़ादी का समर्थन करते हैं. लेकिन हमारी लड़कियों एक मुस्लिम बहुत राज्य में रहती हैं और हमें पश्चिमी आचरण से प्रेरित होकर अपने मूल्यों को नहीं त्यागना चाहिए.''

घाटी में सक्रिय महिला नेता आसिया अंद्राबी ने कहा है कि ये सब कश्मीरी मुसलमानों को अपने इस्लामिक संस्कृति से दूर करने की एक साज़िश है.

आसिया ने कहा कि वो कश्मीरी लड़कियों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाएंगी.

इस बीच नागरिक समाज के लोगों ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. कश्मीर के सबसे पुराने विश्वविद्यालय में अंग्रेज़ी पढ़ाने वाली प्रोफ़ेसर हमीदा नईमा ने कहा है, ''कश्मीर को सदियों से हब्बा ख़ातून और लल्ला दीद जैसी महिला कवियत्रियों ने अपने फ़न से नवाज़ा है. 60 के दशक में भी महिला गायकों ने लोगों के सामने अपने संगीत पेश किए है. इसलिए किसी को भी संगीत के ख़िलाफ़ नहीं होना चाहिए. मेरा मानना है कि लोग आंख बंद करके पश्चिमी मूल्यों के अनुसरण करने के ख़िलाफ़ हैं.''

कश्मीर घाटी में हालाकि इस समय दर्जनों बैंड्स हैं जो बेहतरीन संगीत पेश करते हैं लेकिन इन तीन लड़कियों ने पहली बार प्रगाश नाम के रॉक बैंड का गठन किया और अपने पहले ही शो में बेहतरीन बैंड का इनाम जीत लिया था.

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