काटजू की नज़र में पाकिस्तान 'फ़र्ज़ी' देश

Image caption मार्कंडे काटजू पहले भी अपनी कई विवादास्पद टिप्पणियों के कारण चर्चा में रहे हैं

प्रेस परिषद के अध्यक्ष मार्कण्डेय काटजू की नज़र में पाकिस्तान एक "फ़र्ज़ी" देश है जिसे ब्रितानियों ने बनावटी द्विराष्ट्रीय सिद्धांत के तहत बनाया था.

दिल्ली विश्व विद्यालय में एक परिचर्चा में बोलते हुए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कण्डेय काटजू ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि अगले 15-20 वर्षों में भारत और पाकिस्तान फिर एक हो जाएंगे और एक मज़बूत, शक्तिशाली, धर्म निरपेक्ष और आधुनिक विचारों वाली सरकार सत्ता में आएगी.

उन्होंने हाल में पाकिस्तानी सैनिकों द्वारा भारतीय सैनिकों का सिर काटे जाने के बाद संचार माध्यमों द्वारा युद्दोन्माद पैदा किए जाने की निंदा की.

ब्रितानियों ने मूर्ख बनाया

काटजू ने कहा,"सबसे पहले मैं आपको बता दूँ कि पाकिस्तान कोई देश ही नहीं है. यह एक फ़र्ज़ी देश है जिसे ब्रितानियों ने अपनी फूट डालो और शासन करो नीति के तहत बनाया था. हम बेवकूफ़ हैं और ब्रिटिश हमें मूर्ख बनाते रहे."

काटजू का मानना है कि दोनों देशों के बीच युद्ध की बात करना राष्ट्र विरोधी काम है. उनके अनुसार अगर लड़ाई होती है तो दोनों देशों की अर्थ व्यवस्थाएं जो पहले से ही खराब दशा में चल रही हैं बर्बाद हो जाएंगी.

काटजू ने कहा,"आपको मालूम होना चाहिए कि युद्ध बहुत खर्चीली चीज है.हमने तीन लड़ाईयां लड़ी हैं. क्या इसकी वजह से हमारा जीवन स्तर बेहतर हो गया?"

उन्होंने फिल्म अभिनेताओं और क्रिकेटरों से जुड़े महत्वहीन मुद्दों को उछालने और महत्वपूर्ण मुद्दों जैसे गरीबी, मूल्य वृद्धि, बेरोज़गारी और किसानों की आत्म हत्यायों को नज़रअंदाज़ करने के लिए मीडिया को भी आड़े हाथों लिया.

महत्वहीन मुद्दे

काटजू ने बोला "पिछले 15 वर्षों में 2.5 लाख किसानों ने आत्महत्या की है लेकिन इस खबर को मीडिया ने पांच सालों तक दबाया. यह खबर तभी ऊपर आई जब पी साईनाथ ने इसके बारे में लिखा. अभी भी कोई इसके बारे में नहीं लिख रहा. सब यही लिख रहे हैं कि करीना का किससे इश्क चल रहा है या सचिन तेंदुलकर अपना सौंवा शतक बना रहे हैं."

काटजू ने इस बात के लिए भी मीडिया की आलोचना की कि वह अन्ना हज़ारे के आंदोलन का 24 घंटे कवरेज कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि इस आंदोलन पर इस तरह शोर मचाया गया मानो यह देश की सभी समस्याएं हल कर देगा.

संबंधित समाचार