आर्थिक विकास दशक के सबसे निचले स्तर पर

  • 7 फरवरी 2013
भारतीय अर्थव्यवस्था
Image caption सीएसओ के आंकड़े अर्थव्यवस्था की चिंताजनक तस्वीर पेश करते हैं.

उत्पादन, कृषि और सेवा क्षेत्र के मामले में भारत के आर्थिक विकास की दर का दशक के सबसे निचले स्तर पर पहुंचने का अनुमान लगाया गया है.

भारतीय सांख्यिकीय संगठन (सीएसओ) के अनुमान के मुताबिक 2012-13 के वित्तीय वर्ष के दौरान सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में इजाफे की दर साल 2011-12 के 6.2 फीसदी की तुलना में 5 प्रतिशत रहने का अनुमान है.

सीएसओ का यह अनुमान हाल ही में जारी रिजर्व बैंक और सरकार के पूर्वानुमान से बहुत कम है.

वर्ष 2002-03 में जीडीपी चार फीसदी की दर से बढ़ी थी और इसके बाद से ही भारतीय अर्थव्यवस्था का विस्तार छह प्रतिशत की दर से होता रहा है.

साल 2006-07 में विकास दर अपने उच्चतम स्तर 9.6 फीसदी पर पहुंच गया था.

चिंताजनक तस्वीर

सीएसओ के पूर्वानुमानों में 2012-13 के लिए खेती और उससे जुड़ी आर्थिक गतिविधियों की विकास दर 2011-12 के 3.6 फीसदी की तुलना में घटाकर 1.8 प्रतिशत कर दिया गया है.

Image caption खेती की विकास दर के सबसे कम रहने का अनुमान लगाया गया है.

उत्पादन क्षेत्र भी इस कमी से अछूता नहीं रह पाया है. पिछले वित्तीय वर्ष के 2.7 फीसदी की तुलना में इसके घटकर 1.9 फीसदी हो जाने की संभावना जताई गई है.

सीएसओ का अनुमान पिछले हफ्ते आरबीआई के त्रैमासिक मौद्रिक नीति की समीक्षा में जताई गई 5.5 फीसदी की विकास दर की संभावना के उलट बहुत कम है.

साल के बीच में की जाने वाली आर्थिक समीक्षा में सरकार ने भी विकास दर के 5.7 से 5.9 फीसदी के बीच रहने का अनुमान लगाया था.

सेवा क्षेत्र बेहतर

सरकार ने बजट में 2012-13 के लिए अपने पूर्वानुमान में विकास दर के 7.6 फीसदी रहने का अनुमान लगाया था लेकिन सीएसओ के आंकड़े इससे बहुत कम हैं.

पूरे वित्तीय वर्ष के लिए पांच फीसदी के अनुमान का यह मतलब है कि आर्थिक विकास की दर 2012-13 की दूसरी छमाही में तेजी से गिरी है.

अप्रैल-सितंबर की अवधि के दौरान जीडीपी में इजाफे की दर 5.4 फीसदी रही है.

पूर्वानुमानों के मुताबिक वित्त, बीमा, रियल इस्टेट और व्यापारिक सेवाओं को मिलाकर बने सेवा क्षेत्र के मौजूदा वित्तीय वर्ष में 8.6 फीसदी की दर से बढ़ने के आसार हैं.

यह पिछले साल 11.7 फीसदी रही थी.

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