ममता बनर्जी को गुस्सा क्यों आता है ?

  • 8 फरवरी 2013

कोलकाता पुस्तक मेले में गई ममता बनर्जी की कार पहुँचने में देरी होने पर वह अपना आपा खो बैठी और अपने सुरक्षा गार्ड को भला बुरा कह डाला.

उनके साथ हमेश रहने वाले स्पेशल ब्रांच के अधिकारी कुसुम कुमार द्विवेदी पर चिल्लाते हुए उन्होंने कहा, "आपको तो चाबुक पड़ने चाहिए."

ममता पुस्तक मेले में आईटीसी सोनार के पिछले वाले गेट से घुसीं और साइंस सिटी के सामने वाले गेट से बाहर निकलीं. दूसरे गेट से बाहर निकलने के कारण उनकी कार वहाँ समय से न पहुँच सकी.

कार देर से पहुँची

कार का इंतेज़ार करते समय कुछ लोग वहाँ पहुँच कर उनका ऑटोग्राफ़ लेने लगे. पहले तो वह कुछ बड़बड़ाई और फिर अचानक अपने सुरक्षाकर्मी पर चिल्लाने लगीं.

उनकी सुरक्षा में लगे लोग ममता के इस व्यवहार से हतप्रभ रह गए. एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि उस समय बाहर जाने वाले गेट पर बहुत भीड़ इकट्ठी हो गई थी जिसकी वजह से वाहन को उन तक पहुँचने में देर हो गई.

ममता के गुस्से के शिकार द्विवेदी कई सालों से उनकी सुरक्षा में लगे हुए हैं और उनको दिसंबर में सेवा मेडेल भी मिल चुका है.

ममता की सुरक्षा में 12 गार्ड लगे हुए हैं जिनका नेतृत्व कुसुम कुमार द्विवेदी करते हैं. इससे पहले ममता हमेशा अपने सुरक्षाकर्मियों का हालचाल पूछती थी कि उन्हें खाना मिला या नहीं या उन्होंने आराम किया या नहीं.

यह पहला मौका था कि वह अपने गार्डों पर चिल्लाईं और वह भी सरेआम. अक्तूबर 2011 में एक बार उत्तरी 24 परगना जिले से वापस आते समय एक बूढ़ी महिला उन तक पहुँचने में सफल हो गई थीं. उस समय भी ममता को गुस्सा आया था और उन्होंने शिकायत की थी कि उस भाग दौड़ में उनका एक कड़ा और एक घड़ी गायब हो गई थी.

उस घटना के बाद से उनकी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी और लोगों को उनसे दूर रखा जाने लगा था. लेकिन उस समय भी इसकी वजह से किसी सुरक्षा कर्मी को उनकी खरी खोटी नहीं सुननी पड़ी थी.

शिकायत

एक मानवाघिकार संगठन ने पश्चिमी बंगाल मानवाधिकार संगठन से कहा है कि वह इस मामले में हस्तक्षेप कर पीड़ित सुरक्षाकर्मी की तरफ से ममता के खिलाफ शिकायत दर्ज करने की पहल करे.

कांग्रेस ने मांग की है कि वह अपनी टिप्पणी वापस ले जबकि मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी ने कहा है कि ममता अपने पार्टी कार्यकर्ताओं और सरकारी कर्मचारियों के बीच कोई भेद नहीं कर रही हैं

पिछले दिनों प्रधानमंत्री से अपने मतभेदों की चर्चा करते समय ममता ने एक विवादास्पद टिप्पणी की थी कि वह प्रधानमंत्री को पीट तो नहीं सकतीं.उनके इस कथन पर भी उनकी खासी आलोचना हुई थी.

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