'देर आए दुरुस्त आए' : मोदी

अफज़ल गुरू
Image caption नरेंद्र मोदी ने अफज़ल गुरू को फांसी दिए जाने के बाद ट्विटर पर लिखा, "देर आए दुरुस्त आए"

भारत के मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भारतीय संसद पर हमला करने के लिए दोषी करार दिए गए अफजल गुरु को फांसी देने के फैसले का स्वागत किया है.

भाजपा हमेशा से कांग्रेस पार्टी को निशाने पर लेती रही है और इसने इस फै़सले का स्वागत करते हुए कहा है कि सरकार को यह फ़ैसला जनता के दबाव में आकर करना पड़ा.

भाजपा का कहना है कि देर से लिया गया यह फैसला राष्ट्रहित में है. गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्विटर पर लिखा है, “देर आए दुरुस्त आए.” सूचना प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने कहा है कि चुनावों को देखते हुए नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनज़र यह क़दम उठाया गया है.

गृह राज्यमंत्री आर पी एन सिंह ने सख्त रुख अख़्तियार करते हुए कहा, "सरकार सख़्त है और देश पर कोई भी आंख उठाता है तो उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी. सरकार ऐसे हातात से निपटने के लिए तैयार है." उन्होंने विपक्षी दलों की टिप्पणी के मद्देनज़र कहा कि विपक्ष को सरकार के इस फैसले को लेकर राजनीतिक चर्चा का विषय नहीं बनाना चाहिए.

जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अबदुल्ला ने कहा, "हमें कल रात ही गृहमंत्री ने फोन करके इस कद़म के बारे में बताया था और कहा था कि राज्य में हालात स्थिर रहे इसके लिए सुरक्षा सख्त कर दी जाए. राज्य के सैनिक और अर्थसैनिक बलों को ही सुरक्षा के लिए तैनात किया गया है. बाहर से कोई सेना नहीं बुलाई गई है."

भाजपा के प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि जघन्य आतंकवादी कार्रवाई के खिलाफ अगस्त 2005 में अदालत ने अफजल गुरू को फांसी देने का आदेश दिया था और जनवरी 2007 में उसकी याचिका भी खारिज कर दी थी.

सैंवेधानिक प्रक्रिया

कांग्रेस के प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, "इस फैसले में देरी हुई इसकी वजह यह थी कि इसके लिए एक संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करना जरूरी था और हम इसे नज़रअंदाज नहीं कर सकते थे."

भाजपा नेता राजीव प्रताप रूडी ने कहा, “हमारी पार्टी सालों से अफज़ल गुरू को फांसी देने की मांग करती रही है. सरकार ने विलंब ज़रूर किया है लेकिन यह स्वागत योग्य फ़ैसला है.” रूडी का कहना है कि भविष्य में भी आतंक फैलाने वालों के खिलाफ़ त्वरित कार्रवाई की जानी चाहिए.

भाजपा के प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, “सरकार को जनमत के दबाव में न्याय का पालन करना पड़ा.”

उन्होंने कहा कि आतंकवादियों के लिए यह एक सबक़ है कि अगर वे आतंकी घटनाओं को अंजाम देते हैं तो वे कानून की गिरफ्त में ज़रूर आएंगे. उन्होंने कहा कि सरकार ने अपना काम किया है और सरकार को ऐसा फैसला करने के लिए बाध्य होना पड़ा है.

मानवाधिकार का ख़्याल

रविशंकर प्रसाद ने कहा, "भारत के संविधान में सभी लोगों के मानवाधिकार की बात की गई है लेकिन मै आतंकवादियों के मानवाधिकार की बात करने वालों से यह पूछना चाहता हूं कि आतंकी घटनाओं में मारे जाने वाले निर्दोष लोगों के मानवाधिकार का भी ख्याल होना चाहिए."

उमर अब्दुल्ला ने कश्मीर के लोगों से शांति से रहने की अपील करते हुए कहा है कि कुछ लोग अफज़ल गुरू की फांसी का सियासी फायदा हासिल करने के लिए भड़काने की हरकत कर सकते हैं ऐसे में लोगों को हालात बिगड़ने नहीं देने में सहयोग करना चाहिए.

उन्होंने कहा कि राज्य में अफज़ल गुरू के ख़िलाफ जम्मू कश्मीर में कोई केस नहीं है.

भाजपा सांसद स्मृति ईरानी ने भी कहा कि कांग्रेस पार्टी ने राजनीतिक कारणों की वजह से ही लंबे अरसे से इस फैसले को लटकाए रखा था. राज्यसभा की पूर्व उपाध्यक्ष नज़मा हेपतुल्ला ने भी कहा किसी भी धर्म, भाषा या समुदाय से ताल्लुक रखने वाले लोग अगर आतंक फैलाते हैं तो उन्हें ऐसी सज़ा भुगतनी पड़ेगी.

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