मौनी अमावस्या का स्नान शुरू

कुंभ, इलाहाबाद
Image caption मौनी अमावस्या स्नान की शुरूआत

मौनी अमावस्या के मौक़े पर लोगों ने संगम में डुबकी लगानी शुरू कर दी है. गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों के संगम पर गंगा नहाने लगभग एक करोड़ लोग कुंभ आ गए हैं और लोगों का आना जारी है.

दरअसल तिथि के अनुसार अमावस्या शनिवार दोपहर ही लग गई थी इसलिए लोगों ने दोपहर से ही नहाना शुरू कर दिया.

इतनी बड़ी तादाद में लोग पहुँचे हैं कि काफ़ी लोग खुले आसमान के नीचे ठंड में ज़मीन पर ही काग़ज़ या बोरी बिछाकर सो रहे हैं.

कुल मिलाकर इतना रंगबिरंगा माहौल है कि इंद्रधनुष ज़मीन पर उतर आया लग रहा है. पुलिस प्रशासन भी व्यवस्था सुचारु बनाने में लगा है.

इलाहाबाद के मंडलायुक्त देवेश चतुर्वेदी ने बीबीसी हिंदी को बताया, “मकर संक्रांति के स्नान के समय अखाड़े थे मगर मौनी अमावस्या में अखाड़ों का जुलूस कई गुना बड़ा होता है. इसी तरह कल्पवासियों का भी आना हो चुका है. तो मौनी अमावस्या पर लोगों का प्रबंध ज़्यादा बड़ा विषय है.”

सुबह सवा छह बजे अखाड़ों का स्नान शुरू होना है. सबसे पहले महानिर्वाणी अखाड़ा संगम पर स्नान करेगा. उसके बाद सात बजे के आस-पास निरंजनी और फिर आठ बजे जूना अखाड़ा के स्नान का समय तय है.

व्यापक व्यवस्था

इस मौक़े पर 18 हज़ार फ़ुट लंबे घाट पर कुल 22 घाट बनाए गए हैं जहाँ श्रद्धालु स्नान कर सकेंगे. घाटों पर सुरक्षाकर्मी और जल पुलिस भी तैनात है जो ये सुनिश्चित कर रहे हैं कि किसी तरह की अप्रिय दुर्घटना न हो.

मगर मेले के संदर्भ में उल्लेखनीय ये है कि प्रशासन की निगरानी से कहीं आगे बढ़कर लोग ख़ुद भी अनुशासित रूप में और एक जुनून में चलते दिखते हैं जिससे प्रशासन को भी मदद मिल रही है.

वैसे साफ़-सफ़ाई इस मेले में सबसे बड़ा मसला है क्योंकि इतनी बड़ी संख्या में लोगों के आने का मतलब है कि उनके शौच आदि की व्यवस्था भी उसी पैमाने की चाहिए. प्रशासन ने इस ओर ध्यान तो दिया है मगर लोगों की बड़ी संख्या के मुक़ाबले वो तैयारी कुछ धीमी दिख रही है.

कई जगहों पर लोग खुले में शौच करते हुए देखे गए और प्रशासन के लिए ये चिंता का विषय बना हुआ है.

दिन भर खोया-पाया से जुड़ी घोषणाएँ होती रहीं मगर उनमें से ज़्यादातर का अपने परिजनों से मिलना हो गया. वो काफ़ी भावुक क्षण थे क्योंकि जिस समय लोग बिछड़े परिजनों या दोस्तों से मिले उस दौरान उनकी आँखें गीली दिखीं.

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