फांसी से प्रभावित होगी केंद्र से बातचीत: मीरवाइज़

मीरवाइज़ उमर फारूक
Image caption मीरवाइज़ को लगता है कि कश्मीर में हिंसा का नया दौर शुरू हो सकता है.

अफ़ज़ल गुरु की फांसी से भारत सरकार और कश्मीरी अलगाववादियों की बातचीत की संभावनाओं पर सवाल खड़े हो गए हैं.

पृथकतावादी नेता मीरवाइज उमर फारूक ने कहा है कि अफजल की फांसी के बाद नई दिल्ली के साथ दोबारा बातचीत के आसार खत्म हो गए हैं.

मीरवाइज़ का मानना है कि इस वाक़ए से कश्मीरी नौजवानों के बीच भारत के खिलाफ नफरत की भावना बढ़ेगी और इससे खून-खराबे के दूसरे दौर की शुरुआत हो सकती है.

नई दिल्ली स्थित अपने घर में नजरबंद रखे गए मीरवाइज़ ने बीबीसी को इंटरनेट चैट पर कहा,“बातचीत को कामयाब बनाने के लिए हमने सालों लगा दिए लेकिन अफ़ज़ल को फांसी देकर नई दिल्ली ने कश्मीर की आवाम के साथ जंग का एलान कर दिया है. नए हालात में हम भले ही अप्रासंगिक हो गए हों और नई ताकतें मुमकिन है कि अलग जुबान में बोलें”.

नज़रबंद मीरवाइज़

इससे पहले हुर्रियत के उदारवादी माने जाने वाले धड़े के नेता 41 वर्षीय मीरवाइज़ को काहिरा जाने से रोक दिया गया था.

वहां वह इस्लामी देशों के संगठन के सम्मेलन में शिरकत करने वाले थे.

शनिवार की सुबह अफ़ज़ल की फांसी के तुरंत बाद मीरवाइज और उम्रदराज़ हो रहे चरमपंथी अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी को नज़रबंद कर दिया गया था.

मीरवाइज़ ने बताया, “मेरे फोन ज़ब्त कर लिए गए हैं और मेरे पास मेरा आई-पैड रह गया है”.

इस उदारवादी इस्लामी नेता का मानना है कि अफ़ज़ल की फांसी से नरम माने जाने वाले अलगाववादियों और नई दिल्ली के बीच आगे की किसी भी बातचीत को नुकसान पहुंचेगा.

उन्होंने कहा,“बातचीत के मसले पर आगे बढ़ने के लिए हमने ईमानदारी से कोशिश की लेकिन दिल्ली इसको लेकर संजीदा नहीं रहा. बातचीत हमले के साथ नहीं चल सकती. बातचीत को लेकर फिलहाल मुझे कोई उम्मीद नहीं है”.

अतीत की कोशिशें

Image caption मीरवाइज़ दिल्ली में ही अपने घर में नज़रबंद रखे गए हैं.

बीते दशक में मीरवाइज़ भारत के दो प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल में प्रतिनिधिमंडलों की अगुवाई कर चुके हैं.

उन्हें आशंका है कि फांसी के इस ताज़ा वाक़ए के बाद भारत प्रशासित कश्मीर में नौजवानों को भड़का सकती है.

मीरवाइज़ ने कहा,“यह सियासी और मजहबी चरमपंथ का खतरनाक मेल होगा”.

अलगाववादी नेता मीरवाइज़ इस बात पर जोर देते हैं कि कश्मीर में ‘इंसाफ की गैरमौजूदगी’ से सशस्त्र हिंसा के नए दौर की शुरुआत हो सकती है.

मीरवाइज़ ने अपनी चिंताएं यूरोप के कई देशों और अमरीका को जरिए अवगत कर दी है.

वह कहते हैं,“हमने व्हॉइट हाउस को लिखा है और यूरोपीय संघ के कई लोगों को लिखा है क्योंकि हमें डर है कि भारत की गलतियों से हिंसा की जमीं तैयार हो रही है”.

कश्मीर के हालात

इस बीच भारत की संसद पर हमला करने के दोषी अफज़ल गुरू की फाँसी के बाद से ही जम्मू-कश्मीर में तनाव की स्थिति बनी हुई है.

रविवार को भी घाटी के 10 ज़िलों में अनिश्चितकालीन कर्फ़्यू जारी है.शनिवार को अफ़ज़ल को फाँसी दिए जाने से पहले ही घाटी में कर्फ्यू लगा दिया गया था.

इसके अलावा राज्य के सभी ज़िलों में मोबाइल और इंटरनेट सेवा अब भी बंद है हालांकि टीवी के प्रसारण पर लगी रोक ख़त्म कर दी गई है.

घाटी के अलगाववादी नेताओं को अब भी जेल में रखा गया है. एक भारत समर्थक जनप्रतिनिधि को फांसी के विरोध में प्रदर्शनकारियों की अगुवाई करने की वजह से गिरफ्तार किया गया है.

हालांकि रविवार को किसी झड़प की सूचना नहीं है लेकिन शनिवार को अफ़ज़ल की फांसी की खबर घाटी पहुंचने के बाद नाराज़ भीड़ ने भारतीय अर्द्धसैनिक बलों की दो गाड़ियां जला दीं और पुलिस पर पथराव किया.

एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि 12 से ज्यादा लोग और 24 पुलिस वाले घायल हो गए.

इससे पहले लश्कर-ए-तैय्यबा सहित अन्य चरपंथी संगठनों ने भारत में हमला करने की धमकी दी है और अलगाववादियों ने कश्मीर और जम्मू क्षेत्र के कुछ हिस्सों में चार दिनों का मातम मनाए जाने की आह्वान किया है.

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