फांसी न दी जाती तो बेहतर था: उमर अब्दुल्ला

  • 10 फरवरी 2013
Image caption उमर अब्दुल्ला ने अफ़ज़ल गुरु को फांसी दिए जाने के एक दिन बाद इसकी निंदा की है.

भारत प्रशासित जम्मू एवं कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने रविवार को अफ़ज़ल गुरु की फांसी की कड़ी निंदा की है.

अफ़ज़ल की फांसी से साफ तौर पर नाराज़ दिख रहे उमर अब्दुल्ला ने कहा कि इससे घाटी की नौजवान पीढ़ी में नाइंसाफी और अलगाव का एहसास बढ़ेगा.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक उमर अब्दुल्ला ने यह भी कहा कि फांसी देने से पहले अफ़ज़ल को अपने परिवारवालों से न मिलने देना और 'अंतिम विदाई' की इजाजत न दिया जाना, एक 'त्रासदी' है.

संसद पर हमलों के दोषी 43 वर्षीय अफ़ज़ल को दिल्ली के तिहाड़ जेल के भीतर ही शनिवार को गोपनीय तरीके से फांसी दे दी गई थी.

मुख्यमंत्री अब्दुल्ला ने कहा है कि ऐसे कई सवाला हैं, जिनके जवाब दिए जाने की जरूरत है.

'दूरगामी परिणाम'

उनका मानना है कि अफ़ज़ल की फांसी के दूरगामी नतीजे अधिक चिंताजनक हैं क्योंकि उनका वास्ता कश्मीर के नौजवानों की नई पीढ़ी से है.

उमर ने कहा कि यह पीढ़ी मकबूल बट के साथ भले ही खुद को न जोड़ पाए लेकिन अफ़ज़ल गुरु के साथ खुद को जोड़ लेगी.

भारतीय राजनयिक रवींद्र म्हात्रे की इंग्लैंड में हुई हत्या के लिए कश्मीरी अलगाववादी नेता मकबूल बट को वर्ष 1984 में फांसी दी गई थी.

इससे पहले उमर ने टीवी साक्षात्कार में कहा था,"कृपया यह समझें कि कश्मीर की एक से ज्यादा पीढ़ी ऐसी है जोकि खुद को पीड़ित के तौर पर देखती आई है. वे खुद को ऐसी जमात के लोगों के तौर पर देखते आए हैं जिन्हें इंसाफ नहीं मिलेगा."

Image caption संसद पर हमले के दोषी अफ़ज़ल गुरु को शनिवार को फांसी दे दी गई.

उन्होंने कहा,"भले ही आप इसे पसंद करें या न करें अफ़ज़ल को फांसी दिए जाने से कश्मीरियों का यह एहसास और पुख्ता होगा कि यहां उनके लिए इंसाफ नहीं है और मुझे यह बात सुरक्षा के मोर्चे पर पड़ने वाले तात्कालिक प्रभाव की वजह से ज्यादा परेशान कर रही है".

'ऐसा नहीं होता तो बेहतर था'

उमर ने कहा,"नाइंसाफी और अलगाव के एहसास के मसले को हम किस तरह से हल करने के काबिल होंगे, यह एक सवाल है और मेरे पास इसका कोई जवाब नहीं है."

फांसी के सवाल पर सत्तारूढ़ नैशनल कान्फ्रेंस की आधिकारिक प्रतिक्रिया पूछे जाने पर उमर ने कहा,"बेशक ऐसा नहीं होता तो बेहतर होता".

मुख्यमंत्री ने खुद को मौत की सजा़ के खिलाफ बताया और कहा,"मैं खून का प्यासा नहीं हूं".

उमर ने कहा कि जब तक मृत्युदंड का प्रावधान है तब तक इसे लागू करने में कोई 'भेद-भाव' नहीं होना चाहिए.

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