इलाहाबाद स्टेशन पर भगदड़ के पांच कारण

Image caption इलाहाबाद में कुंभ के दौरान इससे पहले पचास के दशक में ही भगदड़ हुई थी.

इलाहाबाद के रेलवे स्टेशन पर हुई भगदड़ में 36 लोगों की मौत हो चुकी है.

कुंभ के मेला क्षेत्र से बाहर हुई भगदड़ में जहां बड़ी संख्या में लोगों का स्टेशन पर पहुंचना एक कारण बताया जाता है वहीं प्रशासन में सामंजस्य की कमी भी साफ दिखती है.

प्रत्यक्षदर्शियों से बातचीत, घटनास्थल के दौरे और जानकारों से बातचीत के आधार पर हम आपको बताते हैं कि क्या पांच वजहें रहीं इस भगदड़ की और कैसे इसे रोका जा सकता है.

पहला कारण- भारी संख्या में लोगों का पहुंचना- मौनी अमावस्या के कारण संगम में लगभग (अनुमान के मुताबिक) तीन करोड़ लोग पहुंचे थे और शाही स्नान के दौरान भी लोगों की संख्या इतनी अधिक हो गई थी कि पुलिस को नियंत्रण में मुश्किलें आ रही थीं. जानकारों के अनुसार लोगों को इलाहाबाद से बाहर प्रतापगढ़ या जौनपुर जैसी जगहों पर ही रोका जाना चाहिए था. शाही स्नान के दौरान भी हल्का लाठी चार्ज हुआ था. स्थिति की गंभीरता को उसी समय समझा जाना चाहिए था.

दूसरा कारण- रेलवे स्टेशन पर क्षमता से अधिक भीड़- मेला क्षेत्र में जैसे ही लोग बढ़े तो प्रशासन का फोकस ये रहा कि लोगों को जल्दी से जल्दी मेला क्षेत्र से बाहर निकाला जाए और लोग वापस लौटें. नतीजा ये हुआ कि लोग रेलवे स्टेशन की तरफ गए. स्टेशन के पास आम तौर पर बाड़े बनाए जाते हैं ताकि एक साथ बहुत अधिक लोग पहुंच न पाए. लोगों को चौराहे पर भी नहीं रोका गया और न ही लोगों को दूसरी तरफ डायवर्ट ही किया गया. रेलवे स्टेशन की क्षमता से अधिक लोग वहां पहुंच गए.

तीसरा कारण- तालमेल का अभाव- पहली नज़र में ऐसा लगता है कि प्रशासन में तालमेल की कमी थी. मेला पुलिस, स्थानीय पुलिस और रेलवे पुलिस के बीच तालमेल नहीं दिखा जिसके कारण ही एकबारगी मेला क्षेत्र में भी और उसके बाद रेलवे स्टेशन पर भी इतने लोग एक साथ पहुंच गए. अगर तालमेल होता तो लोगों को कई अलग अलग जगहों पर रोका जा सकता था और भीड़ को एकजगह जमा होने से रोका जा सकता था.

चौथा कारण- रेलवे पुलिस का बर्ताव- मेला के दौरान जिस तरह से स्थानीय पुलिस को लोगों के साथ संयम बरतने और अच्छा व्यवहार करने की ट्रेनिंग दी गई थी वैसी कोई ट्रेनिंग रेलवे पुलिस को नहीं दी गई. जिसके कारण पुलिस ने लोगों को प्यार से डायवर्ट करने की जगह उन्हें भगाना शुरु किया. इससे लोग नाराज़ भी हुए और अफरा तफरी भी मची.

पांचवां कारण- आपातकालीन योजना लागू नहीं होना- जब भी ऐसी कोई आपात स्थिति आती है तो प्रशासन के पास दो तीन प्लान बने होते हैं. जिसे आपात योजना कहते हैं लेकिन इस घटना में लगा नहीं कि आपात योजना पर अमल हुआ. घटना के दो घंटे बाद तक एंबुलेंस तक स्टेशन पर नहीं पहुंचा था. स्ट्रेचर तक स्टेशन पर नहीं थे और यहां तक कि घायलों को कपड़ों में लाद कर अस्पताल पहुंचाया गया. अगर आपात योजना को लागू किया गया होता ठीक से कुछ जानें ज़रुर बच सकती थीं.

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