रविशंकर को लाइफ़टाइम ग्रैमी सम्मान

रविशंकर

सितार के जादूगर पंडित रविशंकर को मरणोपरांत ग्रैमी ने लाइफ़टाइम अचीवमैंट अवार्ड से नवाज़ा है. उनकी तरफ से उनकी बेटियों अनुष्का शंकर और नोरा जोन्स ने इस सम्मान को स्वीकार किया.

अनुष्का खुद भी सितार की एक मशहूर कलाकार हैं और नोरा भी एक गायिका और लेखिका के तौर स्थापित हो चुकी हैं. ग्रैमी के मुख्य समारोह से पहले हुए एक समारोह में दोनों अपने पिता की तरफ से यह सम्मान लेने के लिए पहुँची.

उनकी बेटी नोरा जोन्स जो की खुद भी नौ ग्रैमी अवार्ड्स की विजेता हैं उन्होंने इस सम्मान को स्वीकार करने के बाद कहा "वो इस सम्मान को लेकर बेहद उत्साहित रहते थे. संगीत उनकी साँसों में बसा था. वो नाश्ते की टेबल पर लहरियां छेड़ते रहते थे और मुझसे भी यही करने को कहते थे. मेरी उम्र उस वक़्त महज़ साथ साल की थी. मैं उनकी तरफ से इस सम्मान को स्वीकार कर के बेहद खुश हूँ."

रविशंकर की दूसरी बेटी अनुष्का ने इस अवसर पर जहा " साठ दिन पहले उनका देहावसान हुआ है. जब उन्हें पता लगा था कि यह सम्मान उन्हें दिया जाने वाला है तो वो बेहद खुश हो गए थे. काश मुझे उनकी जगह यह सम्मान लेने के लिए यहाँ नहीं खड़ा होना पड़ता."

इस मौके पर अनुष्का ने अपने पिता का एक किस्सा सुनाया "एक बार वो ग्रैमी सम्मान की ट्रॉफी अपने किसी मित्र के यहाँ भूल आये और वो उन्हें ढूँढने पर भी नहीं मिला. उनकी पत्नी ने ग्रैमी फ़ोन लगा कर कि क्या वो उस खोये सम्मान की प्रतिकृति उपलब्ध करा सकते हैं. जब वहां से पूछा किस सम्मान की तब रविशंकर को याद आया कि उन्हें दो बार यह सम्मान मिल चुका है." इस घटना के बाद रविशंकर को तीसरी बार भी यह सम्मान मिला. लाइफ़टाइम अचीवमैंट अवार्ड उनका चौथा था.

रविशंकर को पश्चिमी देशों देशों में पूर्वी संगीत को लोकप्रिय बनाने का श्रेय दिया जाता है.

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