अफ़ज़ल के परिजनों को उनका शव चाहिए

अफ़ज़ल गुरू
Image caption अफ़ज़ल गुरू को शनिवार नौ फरवरी को फाँसी दे दी गई थी

संसद हमले में दोषी ठहराए गए अफ़ज़ल गुरू के परिजनों का कहना है कि उनकी सिर्फ़ एक ही मांग है कि केंद्र अफ़ज़ल गुरू के शव को लौटाए ताकि उन्हें सोपौर में दफनाया जा सके.

अफ़ज़ल गुरू के चचेरे भाई मोहम्मद यासीन ने समाचार एजेंसी पीटीआई को फोन पर बताया, "हमारी और कोई मांग नहीं है. हम सिर्फ ये चाहते हैं कि अफजल का शव हमें लौटाया जाए."

इस बीच केंद्रीय गृह सचिव आरके सिंह ने कहा है कि अफ़ज़ल गुरू के परिजनों को तिहाड़ में उनकी कब्र पर प्रार्थना करने की अनुमति दी जाएगी. उन्होंने बताया कि अफ़ज़ल का सामान भी उनके परिवार वालों को दे दिया जाएगा.

लेकिन अफ़ज़ल गुरू के परिजन सरकार से शव लौटाने की मांग कर रहे हैं.

उनके चचेरे भाई यासीन ने बताया, "जैसे ही हमें अफ़ज़ल गुरू को फाँसी दिए जाने के बारे में पता चला, हमने बारामूला के उपायुक्त और तिहाड़ जेल के अधिकारियों को पत्र लिखकर शव लौटाने की मांग की है."

इंतज़ार

उन्होंने बताया कि वे अधिकारियों के जवाब का इंतज़ार कर रहे हैं.

जब मोहम्मद यासीन को केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे के उस बयान की जानकारी दी गई, जिसमें उन्होंने कहा था कि सरकार इस पर विचार कर सकती है कि अफ़ज़ल के परिजनों को उनकी कब्र पर प्रार्थना करने की अनुमति दी जाए, यासीन का कहना था कि इसका कोई मतलब नहीं है.

मोहम्मद यासीन ने कहा, "हम कहाँ प्रार्थना करेंगे. हम उन्हें सोपौर में दफनाना चाहते हैं." बीच में ऐसी भी रिपोर्टें आई थी कि अफ़ज़ल के परिजनों को विमान से दिल्ली लाया जा सकता है, इस पर उन्होंने कहा कि अगर ऐसी स्थिति आती है, तो वे खुद दिल्ली जाएँगे.

अफ़ज़ल के परिजनों को सोमवार को वो चिट्ठी मिली, जिसमें अफ़ज़ल को फाँसी दिए जाने की सूचना थी. मोहम्मद यासीन ने इसे 'क्रूर मज़ाक' बताया.

उन्होंने कहा, "सोमवार को आया पत्र परिवार के खुले जख्मों पर नमक लगाने जैसा है. ये जख्म शायद कभी न भर पाएँ." मोहम्मद यासीन ने कहा कि देश के नेता अफ़ज़ल की मौत पर राजनीति कर रहे हैं.

13 दिसंबर, 2001 में भारतीय संसद पर हमले में दोषी करार अफ़ज़ल गुरू को शनिवार नौ फरवरी को फॉंसी दे दी गई थी.

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