कश्मीर में चौथे दिन भी कर्फ्यू जारी

  • 12 फरवरी 2013
Image caption कर्फ्यू़ के चलते सुनसान श्रीनगर की सड़कें

भारत प्रशासित कश्मीर में लगातार चौथे दिन भी कर्फ्यू जारी है. हालांकि पुलिस का कहना है कि कुछ इलाकों से कर्फ्यू उठा लिया गया है और हड़ताल की वजह से ज़्यादा लोग बाहर नहीं आ रहे हैं.

वर्ष 2001 के संसद हमले के अभियुक्त अफ़ज़ल गुरू की दिल्ली के तिहाड़ जेल में फ़ांसी के बाद कश्मीर में तनाव भड़क गया था.

सभी अलगाववादी नेताओं को या तो जेल में डाल दिया गया है या घर में ही नज़रबंद कर लिया गया है.

दिल्ली में हिरासत में लिए गए प्रमुख अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी ने लोगों से बंद को तीन दिन और जारी रखने का आह्वान किया है.

उन्होंने लोगों से श्रीनगर के शहीद स्थल की ओर कूच करने को भी कहा.

विरोध की हर आवाज़ बंद

भारत समर्थक एक विधायक अब्दुल रशीद को भी जेल में डाल दिया गया है.

वो अफ़ज़ल की फांसी के खिलाफ़ एक विरोध प्रदर्शन का आयोजन कर रहे थे.

रशीद के सचिव इनाम-उन-नबी पूछते हैं, “क्या यही है स्वतंत्र लोकतंत्र. भारत के संविधान में आस्था जताने वाले एक विधायक को इसलिए जेल में डाल दिया गया क्योंकि वो अपनी बात करने की कोशिश कर रह था.”

उत्तरी कश्मीर में एक बच्चे की मौत के बाद भारतीय अधिकारियों को इस पर प्रतिक्रिया का डर है.

भारतीय अर्धसैनिक बल अधिकारियों ने केंद्रीय रिज़र्व सुरक्षा बल को भीड़ को नियंत्रित करते वक्त हथियार न रखने को कहा है.

पुलिस के एक बड़े अधिकारी ने बताया, “हमने केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल अधिकारियों को लिखा है कि प्रदर्शनकारियों से निबटते हुए हथियार न लहराएं. उनका बेहतर इस्तेमाल हो सकता है.”

केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल के महानिरीक्षक एसएस संधु ने बीबीसी को बताया कि जहां ज़रूरत नहीं है वहां हथियार नहीं ले जाए जा रहे.

उन्होंने कहा, “हमारे लोग हथियारों के साथ ही दंगा विरोधी उपकरणों से लैस हैं.”

जन-जीवन प्रभावित

उधर लगातार जारी कर्फ्यू से कश्मीर में आम जन-जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है. प्रशासन ने केबल टीवी, इंटरनेट और अख़बार को बंद कर दिया है.

उर्दू दैनिक चट्टान के संपादक ताहिर मोहिदिन कहते हैं, “10 फरवरी को पुलिसवालों ने सभी प्रिंटिंग प्रेस का दौरा किया और अख़बार न छापने को कहा. उन्होंने हमारे अख़बार भी ज़ब्त कर लिए.”

पत्रकारों को ख़बर बनाने में काफ़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

दिल्ली के एक अख़बार के लिए रिपोर्टिंग करने वाले आशिक पीरज़ादा कहते हैं, “दिक्कत सिर्फ़ इंटरनेट की नहीं है. हमें अभी तक कर्फ़्यू पास भी नहीं दिए गए हैं.”

Image caption कश्मीर में कर्फ्यू के दौरान गश्त लगाते सुरक्षाकर्मी

लेकिन जम्मू-कश्मीर प्रशासन इन ख़बरों का खंडन कर रहा है.

बीबीसी संवाददाता विनीत खरे से बात करते हुए जम्मू-कश्मीर के महानिरीक्षक एसएम सहाय ने कहा कि कई जगह कर्फ्यू में ढील दी गई है.

उन्होंने कहा कि हड़ताल के आह्वान के चलते लोग बाहर नहीं निकल रहे हैं.

सहाय ने दावा किया कि दैनिक ज़रूरत की चीज़ों के लिए कोई बाहर आना चाहे तो उस पर कोई प्रतिबंध नहीं है. सरकार ज़रूरी चीज़ें उपलब्ध करवाने की कोशिश कर रही है.

पुलिस महानिरीक्षक ने ये भी कहा कि अख़बारों के छपने में पुलिस का कोई हाथ नहीं है. ये पत्रकारों को तय करना है.

वे अख़बारों को ज़ब्त किए जाने के आरोपों का खंडन करते हैं और कहते हैं कि संभव है कि हड़ताल के चलते कुछ पत्रकारों ने अखबार न छापने का फ़ैसला किया होगा.

वो ये उम्मीद जताते हैं कि जल्द ही सरकार इस पर कोई वक्तव्य जारी करेगी. हालांकि वो ये भी कहते हैं कि ये सिर्फ़ उनका अंदाज़ा है.

सहाय के अनुसार कर्फ़्यू कब तक चलेगा ये ज़िलाधिकारी तय करेंगे. उधर अफ़ज़ल के परिवार ने भारतीय गृहमंत्री के तिहाड़ जेल में आखिरी प्रार्थना करने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है.

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