महाकुंभ : भगदड़ की छाया के बीच शाही स्नान

  • 15 फरवरी 2013
महाकुंभ

इलाहाबाद में महाकुंभ में शाही स्नान में भी करोड़ों लोग संगम में डुबकियां लगा रहे हैं. हर-हर गंगे के नारों के साथ प्रमुख अखाड़ों के नागा व अन्य साधू गंगा यमुना और मिथक सरस्वती नदियों के संगम पर नहा रहे हैं.

फ़रवरी 10 को इलाहाबाद स्टेशन पर घटे हादसे के बाद उत्तर प्रदेश प्रशासन ने युद्ध स्तर पर इंतजाम किया है.

इस हादसे की वजह से ही हिन्दू धर्म के सभी प्रमुख अखाड़ों के साधू गाजों बाजों और लाव लश्कर के बिना संगम में नहाने जा रहे हैं. परंपरागत रूप से अखाड़े अपने पूरे वैभव के साथ इन स्नानों में भाग लेने के लिए जाते हैं. हर अखाड़े की कोशिश होती है कि उसके अखाड़े के जुलूस में सर्वाधिक भव्य हाथी घोड़े रथ गाजे-बाजे साधू रहें.

अखाड़ों के इन भव्य जुलूसों में जब जहाँ शंख बजाते हज़ारों साधू घंटों-घड़ियाल,हाथियों और घोड़ो के साथ बढ़ते हैं तो उनको देखने की होड़ लगाने वालों में धामिक श्रद्धालू, पर्यटक और देशी विदेशी फोटोग्राफर सब रहते हैं.

कुंभ का इतिहास रहा है कि अगर एक अखा़ड़े के लिए तय समय में उनसे पहले किसी सामान्य आदमी या किसी और अखाड़े के साधुओं ने संगम पर स्नान कर लिया तो साधू इस बात से क्रोधित हो कर बेहद हिंसक भी हो गए है.

फरवरी 10 को 36 लोगों की मौत के बाद सभी अखाड़ों ने यह तय किया केवल रथों और गाड़ियों का इस्तेमाल तो करेंगे लेकिन बैंड बाजे से परहेज़ करेंगे. लेकिन सुबह सुबह हिन्दू धर्म के सबसे प्रमुख अखाड़ों में से एक महानिर्वाणी अखाड़े ने उस समय सबको चौंका दिया जब उसके साधी शान्ति से पैदल ही स्नान के लिए निकल पड़े.

उसके बाद तमाम अखाड़ों के साधुओं ने एक के बाद एक शांति से बिना किसी ताम झाम के नहा कर वापस जा रहे हैं.

अखाड़ों को क्रम से ला कर नहाने के लिए तय समय में नहा कर वापस जाने के लिए मानाने की प्रक्रिया हर बार बहुत ही कठिन होती है और आयोजकों के लिए यह सबसे बड़ी उपलब्धि होती है.

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