मोदी पर काटजू और भाजपा आमने-सामने

  • 17 फरवरी 2013
katju
Image caption जस्टिस मार्कंडेय काटजू अपने विवादास्पद बयानों के कारण अक्सर सुर्ख़ियों में रहते हैं

प्रमुख विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्य सभा में नेता प्रतिपक्ष अरूण जेटली ने प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया के अध्यक्ष जस्टिस मार्कंडेय काटजू पर हमला करते हुए उनसे अपना पद छोड़ने की मांग की है.

जस्टिस काटजू ने कुछ दिनों पहले अंग्रेज़ी दैनिक 'द हिंदू' में एक लेख लिखा था जिसमें उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर हमला किया था.

उसी लेख से नाराज़ भाजपा ने अब मांग की है कि या तो जस्टिस काटजू प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष पद से ख़ुद इस्तीफ़ा दें या उन्हें हटा दिया जाए.

भाजपा की ओर से पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्य सभा में नेता प्रतिपक्ष अरूण जेटली ने एक पत्र लिखकर कहा है कि जस्टिस काटजू का लेख पूरी तरह से राजनीतिक और पूर्वाग्रह से ग्रसित है.

काटजू ने अपने लेख में मोदी की आलोचना करते हुए देश के लोगों से अपील की थी कि वे सोच-समझकर प्रधानमंत्री चुनें.

'राजनीतिक टिप्पणी'

जेटली के पत्र का ज़िक्र करते हुए भाजपा प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने सवाल उठाया कि, ''जिस तरह से जस्टिस काटजू ने बिहार,पश्चिम बंगाल और गुजरात जैसे ग़ैर-कांग्रेसी राज्यों पर टिप्पणी की है क्या उन्होंने कभी कांग्रेस के घोर भ्रष्टाचार पर टिप्पणी की है.''

लेकिन जेटली के लिखे पत्र पर जवाब देते हुए जस्टिस काटजू ने कहा कि अरूण जेटली को राजनीति से इस्तीफ़ा दे देना चाहिए. काटजू ने कहा कि उन्होंने फ़ेसबुक पर कुछ लिखने के लिए महाराष्ट्र में दो लड़कियों की गिरफ़्तारी पर महाराष्ट्र सरकार की कड़ी आलोचना की थी जो कि कांग्रेस शासित राज्य है.

काटजू ने कहा कि अफ़ज़ल गुरू की फांसी के बाद दिल्ली के पत्रकार इफ़्तिख़ार गिलानी के साथ पुलिस के दुर्व्यवहार पर भी उन्होंने फ़ौरन कार्रवाई करते हुए इसके लिए ज़िम्मेदार पुलिस वाल के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई करने की मांग की थी.

'जनता को सोचना चाहिए'

काटजू ने अपने लेख में कहा था कि गोधरा में दर असल क्या हुआ था, अभी भी ये एक रहस्य बना हुआ है.

गोधरा कांड के बाद मुसलमानों को निशाना बनाने और हज़ारों लोगों को जान से मारने और उनके घर लूटने की कार्रवाई की हिटलर के नाज़ी जर्मनी से तुलना करते हुए जस्टिस काटजू ने लिखा था कि गुजरात दंगा पूर्व नियोजित था.

उन्होने ये भी लिखा था कि वे इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं कि 2002 के गुजरात दंगों में मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का कोई हाथ नहीं था.

उन्होंने मोदी के विकास के दावों को भी ख़ारिज करते हुए लिखा था कि गुजरात में 48 फ़ीसदी बच्चे कुपोषित हैं और शिशु मृत्यु दर बहुत अधिक है.

उन्होंन अंत में भारतीयों से अपील की थी कि वो अपने वोट डालते समय इस चीज़ों का ख़्याल रखें नहीं तो वे भी वहीं ग़लती करेंगे जो 1933 के चुनाव में जर्मनी की जनता ने की थी.

उनका इशारा हिटलक के चुने जाने की तरफ़ था.

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