जलियाँवाला पर माफ़ी नहीं, सिर्फ़ शर्मनाक कहा

  • 20 फरवरी 2013
कैमरन

भारत के दौरे पर आए ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन मुंबई और दिल्ली के बाद अमृतसर पहुंचे जहाँ वह स्वर्ण मंदिर और जलियाँवाला बाग़ गए.

जलियाँवाला बाग़ में डेविड कैमरन ने मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी.

डेविड कैमरन ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए 'विजिटर्स बुक' में लिखा है, "ब्रितानी इतिहास में यह एक बेहद शर्मनाक घटना रही जिसे विंस्टन चर्चिल ने भी एक "राक्षसी घटना" करार दिया था. उसे याद करते हुए हमें यह सुनिश्चित करने की आव्यशकता है कि ब्रिटेन दुनिया भर में शांतिपूर्ण विरोध प्रकट करने का समर्थन करता है."

इससे पहले अमृतसर हवाई अड्डे पर पंजाब के मुख्यंत्री प्रकाश सिंह बादल ने कैमरन का स्वागत किया.

जलियाँवाला बाग़ में क्या हुआ था उस दिन- तस्वीरें जब से डेविड कैमरन भारत यात्रा पर हैं तब से कयास लग रहे हैं कि क्या वह वर्ष 1919 में ब्रितानी शासन काल में हुए जलियाँवाला बाग़ हत्याकांड के लिए माफ़ी मांगेंगे.

बीबीसी ने इसी मौके पर बात की कुछ ऐसे लोगों से जिनके पुरखे जलियाँवाला बाग़ गोलीकांड में शहीद हुए थे.

नंदलाल अरोड़ा, जिनके दादा जलियाँवाला बाग़ में मारे गए थे

"मेरे पिता उस समय छोटी उम्र के थे और मेरे दादा के साथ उस सभा में गए थे जिसे कांग्रेस ने आयोजित किया था.

उस गोलीबारी में मेरे दादा शहीद हो गए थे और मेरे पिताजी लाशों के ढेर में दब गए थे. शायद मेरे पिताजी इसी वजह से बच सके क्योंकि उनके ऊपर मरे हुए लोगों के शव आ गिरे थे.

हालांकि लाशों के नीचे दबने से मेरे पिताजी की रीढ़ की हड्डी में चोट लगी और वह सारी उम्र उससे परेशान रहे. मेरी दादी मुझे बताया करती थी कि जलियाँवाला बाग़ में उस दिन जैसे हर जगह खून ही खून था.

वह कहती थीं कि मंज़र ऐसा था कि जैस वहां बचे लोगों की आँखों से खून टपक रहा था. मेरी दादी इस सदमे के चलते दो दिन मेरे दादाजी की लाश के पास ही बैठी रही.

दादी इस सदमे से बहुत वर्षों के बाद ही उबर सकीं. जाने वाले तो चले गए लेकिन जिनकी वजह से ये हुए उनके लिए मन में नफरत तो है ही."

भूषण बहल, जिनके परिवार के सदस्य गोलीकांड में मारे गए

"ब्रिटेन के प्रधानमंत्री अगर इस बात के लिए माफ़ी मांगते हैं तो जलियाँवाला बाग़ में मारे गए लोगों के परिवारवालों को शांति मिलेगी.

मैं जलियाँवाला बाग़ शहीद संस्था का अध्यक्ष हूँ और ऐसे न जाने कितने परिवार हैं जो उस हादसे के बाद उबर ही नहीं सके.

क्योंकि डेविड कैमरन पहली बार जलियाँवाला बाग़ में गए इसलिए उनकी माफ़ी या श्रद्धांजलि से हमारे ज़ख्मों पर मरहम लग सकेगा.

वह एक ऐसी घटना थी जिसके लिए जितनी भी शोक संवेदना व्यक्त की जाए काफी नहीं है. हम सभी लोगों को सिर्फ माफ़ी की ही उम्मीद रही है.

हमें किसी और चीज़ या फिर मुआवज़े की दरकार नहीं है."

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