जलियाँवाला बाग़ कांड: कब क्या हुआ?

मार्च 1919 मार्च 1919 में ब्रिटिश औपनिवेशिक सरकार ने रौलेट एक्ट पारित किया जिसके तहत देशद्रोह के अभियुक्त को बिना मुक़द्दमें के जेल में डालने का प्रावधान था. देशद्रोह के अभियुक्त को बिना मुक़द्दमें के जेल में डालने का प्रावधान
6 अप्रैल, 1919 इसके ख़िलाफ़ महात्मा गाँधी के नेतृत्व में सत्याग्रह शुरू हुआ और 6 अप्रैल को अमृतसर के लोगों ने हड़ताल रखी जिसमें हिंदू, सिख और मुसलमानों ने बराबर की शिरकत की. अमृतसर में हड़ताल. हिंदू, मुसलमान और सिखों की बराबर भागीदारी
6 अप्रैल, 1919 आंदोलन के दो नेताओं -- डॉक्टर सत्यपाल और डॉक्टर सैफ़ुद्दीन किचलू -- को गिरफ़्तार कर लिया गया. जनता में व्यापक असंतोष
10 अप्रैल, 1919 गिरफ़्तारी का विरोध करने के लिए आंदोलनकारियों ने डिप्टी कमिश्नर के दफ़्तर पर प्रदर्शन किया पर प्रशासन ने उन पर गोलियाँ चला दीं. अमृतसर में अव्यवस्था. कई बैंक और सरकारी इमारतों को नुकसान.
12 अप्रैल, 1919 कुछ और भारतीय नेताओं की गिरफ़्तारी के आदेश जनता में लगातार बढ़ता असंतोष, शहर में तनाव
13 अप्रैल, 1919 गिरफ़्तारियों के ख़िलाफ़ स्वर्ण मंदिर के पास जलियाँवाला बाग़ में 20,000 निहत्थे लोगों का प्रदर्शन प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई का फ़ैसला किया.
13 अप्रैल, 1919 ब्रिगेडियर जनरल आरईएच डायर के नेतृत्व में हथियारबंद सिपाहियों ने प्रदर्शनकारियों को घेरकर गोलियाँ चलाईं. ब्रिटिश सरकार के मुताबिक 379 लोग मारे गए लेकिन
1997 ब्रितानी महारानी एलिज़ाबेथ की भारत यात्रा जलियाँवाला बाग़ हत्याकांड के लिए माफ़ी माँगने की माँग ने ज़ोर पकड़ा
1997 महारानी के पति प्रिंस फ़िलप ने कहा हत्याकांड को "बढ़ाचढ़ा कर" पेश किया गया है. चौतरफ़ा आलोचना. विवाद गहराया.
2013 ब्रितानी प्रधानमंत्री डेविड कैमरन भारत यात्रा पर क्या कैमरन माफ़ी माँगेंगे?

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