वीरप्पन के साथियों को फिलहाल फांसी नहीं

भारतीय सुप्रीम कोर्ट
Image caption सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वीरप्पन के साथियों को फिलहाल फांसी नहीं दी जाएगी.

सुप्रीम कोर्ट ने चंदन तस्कर वीरप्पन के चार साथियों की फांसी को ये कहते हुए टाल दिया है कि इस मामले पर दूसरी पीठ का फैसला आने के बाद ही सर्वोच्च अदालत कोई फैसला सुनाएगी.

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश अल्तमस कबीर का कहा है कि फांसी पर माफ़ी से जुड़ा फैसला दूसरी पीठ के फैसले के बाद ही सुनाया जा सकता है. इसमें लगभग छह हफ्तों का समय लगने की उम्मीद है.

इससे पहले शनिवार को सुप्रीम कोर्ट ने इन लोगों की याचिका पर तुरंत सुनवाई से इनकार कर दिया. ये लोग अपनी मौत की सज़ा पर अमल को रुकवाना चाहते थे.

वीरप्पन के इन चारों साथियों को 1993 में कर्नाटक के पोलार में बारूंदी सुरंग के विस्फोट में 22 पुलिसकर्मियों और अन्य लोगों की मौत के सिलसिले में फांसी की सजा दी गई थी.

इनके वकीलों की दलील है कि इनकी मौत की सज़ा पर माफ़ी की अपील नौ साल तक राष्ट्रपति के सामने लंबित रहने के चलते इनके मानवाधिकारों का हनन हुआ है और इनकी सज़ा को उम्र कैद में बदल दिया जाना चाहिए.

मुंबई हमलों के दोषी अजमल कसाब और संसद पर हुए हमले के मामले में अफ़ज़ल गुरु के एक के बाद एक फांसी दिए जाने के मामले का मानावाधिकार संगठनों ने कड़ा विरोध किया है.

वीरप्पन की पत्नी की मांग

Image caption वीरप्पन अक्तूबर 2004 में एक तमिलनाडु पुलिस के साथ एक मुठभेड़ में मारे गए थे.

ग्नाना प्रकासम, साइमन, मीकेसकर मदैया और बिलावेंद्रम को 2001 में मैसूर की एक अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी लेकिन 2004 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें मौत की सजा सुनाई.

वीरप्पन की पत्नी मुथुलक्ष्मी को भी बारूदी सुरंग विस्फोट मामले में गिरफ्तार किया गया था लेकिन बाद में उन्हें बरी कर दिया गया.

मुथुलक्ष्मी ने तमिलनाडु विधानसभा से मांग की है कि वो उसी तरह इन लोगों की मौत को सजा को उम्रकैद में तब्दील करने संबंधी प्रस्ताव पारित करे जैसा राजीव गांधी हत्याकांड के अभियुक्तों के मामले में किया गया था.

उनका कहना है, “ये चारों लोग तमिल हैं. वो आतंकवादी नहीं, बल्कि निर्दोष लोग हैं जिन्हें गलती से गिरफ्तार किया गया है. इस मामले में सैकड़ों लोग बरी किए जा चुके हैं, तो इन लोगों के लिए प्रस्ताव पारित किया जाना चाहिए.”

इन लोगों को कर्नाटक की बेलगाम जेल में रखा गया है.

इनके गिरोह के प्रमुख वीरप्पन अक्तूबर 2004 में एक तमिलनाडु पुलिस के साथ एक मुठभेड़ में मारे गए थे.

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