भारत से बढ़ता 'बीफ' का निर्यात

Image caption विदेश में भारतीय 'बीफ' की मांग बढ़ी है.

अमरीकी कृषि विभाग का कहना है कि बीफ़ के निर्यात में दुनिया में नंबर एक देश ब्राज़ील को भारत जल्द ही पीछे छोड़ सकता है.

हिंदू बहुल भारत से बीफ़ का बड़े पैमाने पर निर्यात चौंकाने वाली बात लगती है. मगर भारतीय बीफ़ दरअसल भैंस का मांस है जिसकी मांग दुनिया भर में बढ़ रही है.

अंतरराष्ट्रीय व्यापार की भाषा में बीफ़ शब्द का इस्तेमाल गाय नहीं भैंस के मांस के लिए किया जाता है.

बीफ़ के निर्यात में ब्राज़ील के बाद भारत दूसरे नंबर पर है. यही नहीं दुनिया के कुल बीफ़ निर्यात में एक-चौथाई हिस्सा भारत का है.

‘पिंक रेवल्यूशन’ या गुलाबी क्रांति कहे जाने वाले इस कारोबार से भारत ने पिछले साल 13,000 करोड़ रुपए से अधिक की कमाई की.

भारतीय बीफ़ के खरीददार

मोहाली के एक बूचड़खाने से टनों माँस निर्यात किया जाता है. वर्ष 2008 से 2011 के बीच भारत से होने वाले बीफ का निर्यात दोगुना बढ़ा है.

भारतीय बीफ़ या भैंस के माँस के सबसे बड़े ख़रीदार देश हैं वियतनाम, मलेशिया, सऊदी अरब, जॉर्डन और मिस्र.

लेकिन भारतीय बीफ़ पश्चिमी देशों में शायद ही पहुँचता है. मिसाल के तौर पर ब्रिटेन में लोग इस बात से वाकिफ़ नहीं हैं कि दुनिया का 25 प्रतिशत बीफ़ जो भारत से आता है, वो भैंस का माँस है.

अमरीकी कृषि विभाग ने अनुमान लगाया था कि वर्ष 2012 में भारत बीफ़ एक्सपोर्ट के मामले में ब्राज़ील को पीछे छोड़ देगा. फ़िलहाल ऐसा नहीं हुआ है मगर गलाकाट प्रतिस्पर्धा अब भी बनी हुई है.

साओ पाओलो में स्थानीय पत्रकार शोभन सक्सेना के मुताबिक बीफ़ की खपत में भारत और ब्राज़ील में फर्क ये है कि ब्राज़ील में बीफ़ की घरेलू खपत ज़्यादा है.

संवेदनशील मुद्दा

Image caption भारत से हो रहे बीफ के निर्यात में गाय का मांस होने का संदेह जताया जा रहा है.

भारत में बीफ़ राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील मुद्दा है. कई हिंदू संगठनों को शक है कि बीफ़ के एक्सपोर्ट में गाय का माँस भी शामिल है.

विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय महासचिव खेमचन्द्र शर्मा ने बीबीसी को कहा, “भारत में मांस के लिए गौ हत्या अब भी की जा रही है, हम बार-बार इसको रोकने के लिए केन्द्रीय क़ानून की मांग करते रहे हैं.”

कुछ महीनों पहले गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत सरकार की बीफ़ एक्सपोर्ट नीति के बारे में कहा था कि गुलाबी क्रांति के नाम पर यूपीए सरकार गोवध को बढ़ावा दे रही है.

लेकिन सरकार ने मोदी के बयान को भ्रामक और भड़काऊ बताते हुए पलटवार किया था.

वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा ने मोदी को पत्र लिखकर कहा था कि मांस निर्यात नीति को सियासी रंग देने की कोशिश की जा रही है.

(पूरी रिपोर्ट बीबीसी के साप्ताहिक टीवी कार्यक्रम ‘ग्लोबल इंडिया’ में देखी जा सकती है.)

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