जब कैमरन पहुंचे अमर सिंह चावल वाले के यहां

 कैमरन
Image caption अमृतसर की यह कंपनी जहां कैमरन पहुंचे इसका नाम है अमर सिंह चावल वाला.

तीन दिन पहले तक वो इतना ही जानते थे कि ब्रिटेन से कोई खास व्यक्ति उनके यहां आ रहा है. लेकिन उन्होंने कभी ख्वाब में भी नहीं सोचा था कि उनके मेहमान कोई और नहीं ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन खुद होंगे.

अमृतसर की यह कंपनी जहां कैमरन पहुंचे इसका नाम है अमर सिंह चावल वाला. कंपनी के पार्टनर अरविंदर पाल सिंह मनचंदा बताते हैं, "हमारे यहां तो कभी अपने देश का मंत्री नहीं आया था. इसलिए इतनी बड़ी शख्सियत का हमारे यहां पहुंचना केवल हमारी कंपनी या परिवार के लिए नहीं बल्कि पंजाब और देश के लिए गर्व की बात है."

अमृतसर के जलियांवाला बाग में 1919 के हत्याकांड को 'बहुत शर्मनाक' बताने के बाद कैमरन का काफिला सीधे तरनतारन सड़क की ओर मुड़ा औऱ पहुंच गया अमर सिंह चावल वाले के यहां.

और कुछ ही देर में कैमरन मनचंदा के स्टाफ से मिलते हुए और उनके परिवार के बीच तस्वीरें खिंचवाते नज़र आए.

'कोई संकेत नहीं'

मनचंदा कहते हैं, ''एक महीने से ब्रिटेन का दूतावास हमारे साथ संपर्क में थी. उन्होंने हमें इतना ही बताया था कि भारत और ब्रिटेन की दोस्ती और व्यापार को आगे बढ़ाने के लिए कोई खास व्यक्ति हमारे यहां आना चाहते हैं. लेकिन उन्होंने ऐसा कोई संकेत नहीं दिया कि कैमरन खुद यहां पर आएंगे.''

मनचंदा बताते हैं, ''मैं यह देखकर हैरान था कि कैमरन को बासमती चावल के बारे में काफी जानकारी है. उन्होंने हमें बताया कि काफी ब्रितानी लोग अब बासमती खाने लगे हैं. कैमरन खुद ब्राउन बासमती के शौकीन हैं.''

मनचंदा कहते हैं, ''कैमरन ने हमारी कंपनी को भी बड़े गौर से देखा और साथ ही सभी परिवार वालों से बिना किसी तकल्लुफ के मिले.''

वैसे कैमरन बिनी किसी काम के यहां नहीं पहुंचे थे. अवसर था अमर सिंह चावल वाले का एक एमओयू यानी करार पर दसतख्त करने का जो इन्होंने एक ब्रितानी कंपनी ईस्ट एंड फूड कंपनी के साथ किया है.

क्या है करार

इस करार के मुताबिक अमर सिंह की कंपनी को अपने लाल किला ब्रांड के चावल के हर साल 12,000 मिट्रिक टन का निर्यात इस ब्रितानी कंपनी को करना होगा.

वे कहते हैं, ''यह लगभग 90 लाख डॉलर यानी 45 करोड़ रुपए से अधिक का करार है जिससे हमारे कंपनी को काफी फायदा होगा.''

तो परिवार वालों ने कैमरन को क्या तोहफा दिया. वो बताते हैं कि एक फुलकारी शाल उन्हें भेंट की गई और साथ ही स्वर्ण मंदिर का पिक्चर फ्रेम.

कैमरन के साथ ईस्ट एंड फूड्स के निदेशक कुलदीप सिंह वोहरा और ब्रिटेन के उच्चायुक्त जेम्स बेवन सहित कई लोग मौजूद थे.

मनचंदा बताते हैं कि यह कंपनी तो भारत-पाकिस्तान विभाजन से पहले की है लेकिन यह कुछ साल पहले तक एक छोटी सी कंपनी थी.

उनका कहना है, ''20 टन प्रतिदिन चावल का उत्पादन करने वाली कंपनी आज 500 टन का उत्पादन करती है.''

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