मक्का मस्जिद के निर्दोषों पर फिर गिरी गाज

हैदराबाद बम विस्फोट
Image caption जुनैद (बाएं) हिरासत में रखे गए हैं जबकि रईसउद्दीन (दाएं) को पुलिस के फोन आ रहे हैं.

हैदराबाद के दिलसुखनगर में हुए बम धमाकों की छान-बीन के दौरान मामले ने रविवार को एक नया मोड़ ले लिया है.

अब पुलिस ने उन्हीं स्थानीय नौजवानों को हिरासत में लेना शुरू कर दिया है जिन्हें इस से पहले मक्का मस्जिद विस्फोट के बाद पकड़ा गया था.

हालांकि मक्का मस्जिद मामले में इन नौजवानों को अदालत ने बेगुनाह पाया था और फिर उनकी रिहाई का फैसला सुनाया था.

यहां तक कि राज्य सरकार ने भी इन नौजवानों को मुआवज़ा के साथ निर्दोष होने का प्रमाणपत्र भी जारी किया था.

इस बीच प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने घटनास्थल और अस्पतालों का दौरा किया और लोगों को हर तरह की मदद का भरोसा दिलाया.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ मनमोहन सिंह ने कहा, "मैं हैदराबाद के लोगों का ग़म बांटने आया हूं. जो लोग इस घटना में मारे गए हैं मैं उन्हें संवेदना प्रकट करता हूं और आशा करता हूं कि घायल जल्द से जल्द सेहतयाब होंगे."

उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने इस कायरता भरे काम को अंजाम दिया है उन्हें इसकी सज़ा मिलेगी.

हैदराबाद पुलिस की टास्क फोर्स ने जिन युवाओं को हिरासत में लिया है उन में मुहम्मद रईसुद्दीन भी शामिल हैं.

पहले रिहाई फिर हिरासत में

दो दिन पहले ही रईसुद्दीन ने बीबीसी से बात करते हुए आशंका जताई थी कि उन्हें फिर से एक बार परेशान किये जाने का डर है.

रईसुद्दीन के अलावा जिन लोगों को हिरासत में लिया गया है उन में मुहम्मद अजमत, अब्दुल रहीम, मुहम्मद शकील शामिल हैं.

दो और युवाओं अरशद और अब्दुल करीम को पूछ-ताछ के बाद छोड़ दिया गया.

डॉक्टर इब्राहीम जुनैद को भी एक पुलिस अधिकारी मधुसूदन रेड्डी ने फ़ोन करके थाने बुलाया गया था.

हालांकि डॉक्टर जुनैद ने अपनी सुरक्षा को खतरा महसूस करते हुए पुलिस स्टेशन जाने से इनकार कर दिया.

जुनैद ने बीबीसी से कहा,"आज भी पुलिस का रुख वही है जो पांच साल पहले था. उस समय भी मेरे जैसे निर्दोष लोगों को निशाना बनाया गया और हमारी ज़िंदगी बरबाद कर दी गई और आज एक बार फिर वही किया जा रहा है."

पूछ-ताछ

सिविल लिबर्टीज मॉनिटरिंग समिति के सचिव लतीफ़ खान ने कहा की एक बार फिर हैदराबाद की पुलिस अपनी असफलता को छुपाने के लिए हैदराबाद के मुस्लिम युवाओं को निशाना बना रही है.

उन्होंने कहा,"मक्का मस्जिद मामले में पकडे गए युवा निर्दोष साबित हो चुके हैं. इसके लिए सरकार ने उन्हें मुआवज़ा भी दिया था. फिर उन्हीं लोगों को दोबारा पकड़ने और परेशान करने का क्या अर्थ है. यह साबित हो चुका है कि मक्का मस्जिद की कार्रवाई हिन्दू चरमपंथी संगठनों ने की थी लेकिन पुलिस अभी भी मुसलामानों को शक की नज़र से देख रही है."

हैदराबाद के पुलिस आयुक्त अनुराग शर्मा से संपर्क करने पर उन्हों ने बीबीसी से कहा की कुछ लोगों को पूछ-ताछ के लिए बुलाया गया है.

उन्होंने कहा,"लेकिन मेरे पास यह ब्यौरा नहीं है कि किनको बुलाया गया है. हम ने अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया है."

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