ज़िंदगी भर नहीं धुलता आतंकवाद का ठप्पा....

Image caption मोहमम्द रईसुद्दीन (दाएं) मक्का मस्जिद धमाकों में निर्दोष पाए गए थे.

मैं अभी मक्का मस्जिद विस्फोट मामले में गिरफ्तारी और यातनाओं के सदमे से संभल ही रहा था की हैदराबाद पुलिस ने मेरे घाव एक बार फिर ताज़ा कर दिए है. मैं अब अपने आप को उस पुराने अपराधी की तरह महसूस कर रहा हूँ जिसे पुलिस किसी भी अपराध के बाद संदेह में पकड़ ले जाती है- ये शब्द हैं मुहम्मद रईसुद्दीन के.

रईसुद्दीन को रविवार को पुलिस ने दिलसुखनगर बम विस्फोट के संबंध में पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था. पुलिस ने तो कुछ नहीं कहा लेकिन स्थानीय टीवी चैनलों पर दिन भर यही खबर जोरशोर से चलती रही कि बम विस्फोटों का जिम्मेदार एक व्यक्ति पकड़ा गया है.

रईसुद्दीन उन 26 व्यक्तियों में से एक थे, जिन्हें 2007 के मक्का मस्जिद विस्फोट के बाद पकड़ा गया था और उन पर आतंकवाद से जुड़े मामले दर्ज किए गए थे लेकिन बाद में अदालत ने उन्हें निर्दोष पाकर छोड़ दिया था.

अब धर-पकड़ के दौरान पुलिस ने मक्का मस्जिद में निर्दोष पाए गए सात युवाओं समेत कोई 50 लोगों को हिरासत में लिया.

हालांकि उनमें से अधिकतर को रविवार रात छोड़ दिया गया लेकिन इन युवाओं के परिवारों और नगर के मुस्लिम समुदाय में भय की लहर दौड़ गई है.

परिवार परेशान

रईस का कहना था, "इस घटना के बाद से मेरा पूरा परिवार परेशान है. मेरी माँ ज़ाहिदा बेग़म का स्वास्थ्य बिगड़ गया है. वो डर रही हैं कि जिस तरह पहले मुझे पुलिस ने शारीरिक यातनाएं दी थी और डेढ़ वर्ष तक जेल में रखा था अब फिर वही कुछ होने वाला है."

रईसुद्दीन को रविवार की सुबह नौ बजे पुलिस वाले घर से अपने साथ ले गए और हैदराबाद के पूर्वी ज़ोन के डिप्टी कमिश्नर पुलिस के कार्यालय में उन से दिन भर पूछताछ होती रही.

पुलिस रईस से यही जानना चाहती थे की गुरूवार को विस्फोट किस ने किया और क्यों. साथ ही क्या रईस मकबूल के बारे में कुछ जानता है ये भी पुलिस ने जानने की कोशिश की.

"ठीक ऐसे ही सवाल मक्का मस्जिद विस्फोट के बाद पूछे गए थे और उस समय पुलिस कह रही थी कि वो काम शाहिद बिलाल ने किया था और वो जानना चाहते थे की मैं शाहिद के बारे में क्या जानकारी रखता हूँ".

"मैं ने पुलिस वालों से यही पूछा कि मुझे क्यों लाया गया जबकि मैं मक्का मस्जिद केस में निर्दोष साबित हो चुका हूँ और सरकार ने मुझ से माफ़ी मांगी है और एक प्रमाण पत्र दिया है. पुलिस का जवाब था कि मक्का मस्जिद केस में जितने लोगों का नाम आया था उन सबसे पूछताछ की जाएगी क्योंकि पुलिस के काम करने का तरीका यही है."

पुलिस का तरीका

रईसुद्दीन ने बताया, "मैंने जब उन से कहा कि मक्का मस्जिद मामले में हिंदू चरमपंथियों को पकड़ा गया है और वो उनकी करवाई थी तो पुलिस ने मुझ से कहा कि वो जानते हैं कि किससे क्या पूछना है. उन्होंने कहा कि इस तरह की पूछताछ से ही वो अपराधियों का पता लगाते हैं और उन्हें सपना नहीं दिखता कि किस ने यह काम किया है."

रईसुद्दीन का कहना था कि जो कुछ उनके और दूसरे युवाओं के साथ अब हो रहा है उससे ये स्पष्ट हो गया है कि आप भले ही निर्दोष हों, एक बार आप पर आतंकवादी का ठप्पा लग गया तो ज़िंदगी भर नहीं धुलेगा.

Image caption पुलिस ने अब्दुल वासे से भी पूछताछ की जो 2007 के धमाकों के बाद ताज़ा धमाकों में भी घायल हो गए.

रईसुद्दीन का कहना है, "मेरा केवल इतना अनुरोध है कि इस पूरे मामले की छानबीन बेहतरीन अधिकारियों से कराई जाए ताकि असल दोषी पकडे जाएं और निर्दोषों को परेशान न किया जाए. जो हमारे साथ हुआ है वो दूसरो के साथ नहीं होना चाहिए. हमें हैदराबाद और आंध्र प्रदेश की पुलिस पर कोई भरोसा नहीं है".

वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वो दिलसुखनगर के आसपास के इलाकों मलकपेट, सईदाबाद और मूसरम बाग़ के लोगों से इस लिए पूछताछ कर रही है कि एक ज़माने में सैयद मकबूल इसी इलाके में रहता था और फलों का व्यपार करता था.

बदले की कार्रवाई

वो कहते हैं कि पुलिस ये भी जानना चाहती है कि मक्का मस्जिद केस में जिन लोगों के नाम आए थे कहीं उन्होंने ही बदला लेने के लिए यह कार्रवाई तो नहीं की.

यहाँ यह बात उल्लेखनीय है कि दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद मकबूल बाद में हैदराबाद से नांदेड चला गया और इस समय वो दिल्ली की जेल में है.

दिल्ली पुलिस का कहना है कि वो इंडियन मुजाहिदीन का सदस्य है और उस ने दिलसुखनगर इलाके का मुआयना करने की बात स्वीकार की है.

इस बीच आंध्र प्रदेश सिविल लिबर्टीज मॉनिटरिंग समिति के सचिव लतीफ़ मुहम्मद खान ने कहा कि हैदराबाद की पोलिस मक्का मस्जिद विस्फोट के बाद के इतिहास को दोहरा रही है और निर्दोषों को पकड़ रही है.

उन्होंने कहा, "हैदराबाद पुलिस के व्यवहार से ऐसा लगता है की वो इस नतीजे पर पहुंच चुकी है कि यह विस्फोट हैदराबाद के मुस्लिम युवाओं ने ही किया है.

उन्होंने कहा कि रईसुद्दीन के बाद अब डॉ इब्राहीम जुनैद भी खुद को खतरे में पा रहे हैं. उन्होंने मांग की कि इस मामले की छानबीन हैदराबाद पुलिस से लेकर पूरी तरह से नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी के हवाले कर दी जाए. इस समय ये दोनों मिलकर तहकीकात कर रहे हैं.

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