सुप्रीम कोर्ट में सहारा की अर्ज़ी खारिज

Image caption सहारा ग्रुप पिछले कुछ समय में कानूनी दांवपेंच में फंसा हुआ है.

सुप्रीम कोर्ट ने सहारा ग्रुप की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें सहारा ने सेबी को 24 हज़ार करोड़ रुपए और निवेश से संबंधित दस्तावेज जमा करने करने संबंधी आदेश पर पुनर्विचार की मांग की थी.

कोर्ट ने सहारा ग्रुप की कड़ी फटकार लगाते हुए कहा है कि वो जल्द से जल्द लोगों को पैसा पंद्रह प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाए.

इससे पहले कोर्ट ने सहारा ग्रुप को आदेश दिए थे कि वो फरवरी के पहले महीने तक सारे पैसे वापस करे. ऐसा न करने के लिए कोर्ट ने कंपनी को डांट भी लगाई है.

सवाल

जस्टिस केएस राधाकृष्णन और जस्टिस जेएस केहर की खंडपीठ ने कहा, ‘‘हमारे सामने जो भी रिकार्डस हैं जिन्हें हमने बिल्कुल ध्यान से देखा है. इसे देखते हुए पुनर्विचार याचिका का कोई तुक नहीं है. इसे खारिज किया जाता है. इस याचिका में जो भी सवाल उठाए गए हैं उन सभी सवालों पर कोर्ट ने अगस्त 2012 में दिए गए फैसले के दौरान ही चर्चा कर ली थी. ’’

सहारा का मामले को समझने के लिए थोड़ा पीछे जाने की ज़रुरत है.

असल में 31 अगस्त 2012 को जस्टिस राधाकृष्णन और जेएस केहर की पीठ ने अपने फैसले में सहारा को तत्काल निवेशकों का पैसा लौटाने की ताकीद की थी.

फिर दिसंबर महीने में मुख्य न्यायाधीश अल्तमश कबीर की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कंपनी को पैसे भरने के लिए नौ हफ्तों की मोहलत दे दी थी.

विरोध

हालांकि सेबी और निवेशकों के संगठन ने इस फैसले का विरोध करते हुए कहा था कि पुराने आदेश को बदलना उचित नहीं है और सहारा की याचिका की सुनवाई राधाकृष्णन और जेएस केहर की खंडपीठ में ही होनी चाहिए.

इससे पहले 13 फरवरी को सेबी ने सहारा ग्रुप की कंपनियों की परिसंपत्तियां और बैंक खाते सील करने के आदेश देते हुए कहा था कि कंपनी सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं कर रही है.

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