रक्षा मंत्री बनने जा रहे हेगल के पुराने बयान पर भारत नाराज

  • 27 फरवरी 2013
हेगल के बयान का अमरीका में भारतीय दूतावास ने खंडन किया है

भारत ने अमरीका के रक्षा मंत्रालय का कार्यभार संभालने जा रहे चक हेगल के उस पुराने बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत अफगानिस्तान को पाकिस्तान के लिए 'दूसरे फ्रंट' के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है और पाकिस्तान के लिए समस्याएँ पैदा कर रहा है.

अमरीकी सीनेट ने हाल में रक्षा मंत्री के पद के लिए चक हेगल की नॉमिनेशन को स्वीकृति दी है.

उनके इस पुराने भाषण को 'वाशिंगटन फ्री बीकन' नाम की संस्था ने अपनी वेबसाइट पर जारी किया है.

भारत ने कहा है कि सीनेटर हेगल का बयान अफगान लोगों के हितो के लिए भारत की प्रतिबद्धता की सच्चाई से दूर है.

अमरीका में भारतीय दूतावास ने कहा, "सीनेटर हेगल लंबे समय से भारत के दोस्त रहे हैं और उनका ये बयान असलियत से परे है. भारत अफगान लोगों की भलाई के प्रति समर्पित है....भारत अफगानिस्तान के साथ अपने रिश्तों को जीरो-सम-गेम (यानी किसी अन्य शक्ति के प्रभाव को खत्म करने) के तौर पर नहीं देखता."

भारतीय दूतावास ने आगे कहा, "चरमपंथ के खिलाफ हमारा (भारत का) विरोध अटल है. भारत की आर्थिक मदद का अफगानिस्तान की सरकार और वहां के लोगों ने स्वागत किया है. दुनियाभर में हमारे मित्रों ने इसका स्वागत किया है और इनमें अमरीका भी शामिल है. "

उधर भारत के भीतर भी इस मुद्दे पर खासी बयानबाजी हो रही है. जहाँ मीडिया में ये मुद्दा छाया हुआ, वहीं प्रमुख विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी के नेता यशवंत सिन्हा ने भारतीय टीवी चैनल टाइम्स नाउ से कहा, "जिस व्यक्ति को अमरीकी प्रशासन ने रक्षा मंत्रालय का कार्यभार सौंपने का मन बनाया है, यदि उस व्यक्ति के मानस में ये बात हो कि भारत पाकिस्तान के खिलाफ अफगानिस्तान के जरिए कार्रवाई कर रहा है, तो ये भारत के खिलाफ गंभीर आरोप है. मुझे आश्चर्य है कि भारत सरकार ने अब तक इस पर अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है."

लेकिन विदेश संबंध मामलों के जानकार भारत करनाड का कहना है कि हेगल के बयान से भारत को चिंतित होने की ज़रूरत नहीं है. उन्होंने कहा, "रक्षामंत्री बनने के बाद उन्हें ब्रीफ़िंग पेपर्स दिए जाएँगे. उनको बताया जाएगा कि अमरीका के रिश्ते किस देश से किस स्तर पर हैं. और फिर वो उसी हिसाब से चलेंगे."

करनाड कहते हैं कि अमरीका की नीतियों में भारत की कोई बहुत अहमियत नहीं है. भारत के लिए अमरीकी नीतियों की बड़ी महत्ता है.

बीबीसी हिंदी से बातचीत में भारत करनाड ने कहा, "अमरीका जो चाहे करे, पाकिस्तान हेगेल के बयान को इस्तेमाल करेगा ही. इससे कोई ख़ास फ़र्क पड़ने वाला नहीं है. ये ठीक है कि मीडिया में उठाया जा रहा है लेकन मेरे मुताबिक इसका कोई असर होने वाला नहीं है. हम क्यों इस बात से पीड़ित हों कि अमरीका क्या करेगा."

भारत भरोसेमंद साथी: ब्लेक

दक्षिण एशिया और मध्य एशिया के लिए अमरीका के उपविदेश मंत्री रॉबर्ट ब्लेक ने भी कहा कि अमरीका अफगानिस्तान में भारत की आर्थिक मदद को सकारात्मक भूमिका में देखता है.

उन्होंने कहा कि भारत दक्षिण एशिया में अमरीका का सबसे 'भरोसेमंद साथी' है और दक्षिण एशिया की कोई भी बहस भारत से ही शुरु होनी चाहिए.

ब्लेक ने कहा, "जैसे-जैसे अफगानिस्तान से अमरीकी फौज की संख्या कम होती जाएगी वैसे ही वहां की अर्थव्यवस्था को आर्थिक सहायता की बजाय व्यापार पर आधारित करना ज़रूरी होगा. इस काम में भारत की भूमिका बेहद अहम है."

'पाक के खिलाफ समस्याएँ'

चक हेगल का बयान साल 2011 का है जब उन्होंने ओक्लाहोमा में कैमरन यूनिवर्सिटी में भाषण दिया था.

अपने पुराने भाषण में हेगल को ये कहते हुए सुना जा सकता है, "भारत पिछले कुछ साल से अफगानिस्तान को दूसरे फ्रंट के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है और कई सालों से भारत पाकिस्तान के खिलाफ समस्याएं पैदा करने के लिए पैसा लगा रहा है."

हेगल ने आगे कहा, "इस मदद को आप किसी भी आयाम में देख सकते हैं लेकिन पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच रिश्ते कई सालों से तनावपूर्ण रहे हैं."

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