कम नहीं होगी किशोर अपराधियों की आयु सीमा

Image caption दिल्ली गैंप रेप के बाद देश भर में प्रदर्शन किए गए थे

सरकार का जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत किशोर आयु सीमा घटाने का कोई इरादा नहीं है. बुधवार को महिला और बाल विकास मंत्री कृष्णा तीरथ ने राज्यसभा में ये जानकारी दी.

कानून में संशोधन के एक सुझाव पर जवाब देते हुए उन्होंने कहा, “हम अभी किशोर होने की आयु सीमा घटाने के लिए तैयार नहीं हैं”

उन्होंने बताया कि 4 जनवरी को गृह मंत्रालय द्वारा आयोजित राज्यों के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों की बैठक में, दिल्ली गैंग-रेप में एक किशोर के शामिल होने के दृष्टिगत, सुझाव दिया गया था कि किशोर आयु सीमा 18 से घटाकर 16 कर दी जाए.

लेकिन अपराध संहिता में संशोधन पर गठित जस्टिस (सेवानिवृत्त) जे एस वर्मा की अध्यक्षता वाली समिति ने बच्चों की आयु सीमा घटाने का समर्थन नहीं किया.

उन्होंने कहा, “इसके आधार पर, महिला और बाल विकास मंत्रालय जुवेनाइल जस्टिस एक्ट, 2000 में किशोर आयु सीमा बदलने पर विचार नहीं कर रही है.”

सुझाव पर विचार नही

बीजेपी के जय प्रकाश नारायण सिंह के एक पूरक प्रश्न कि इस मसले पर बाकी सुझावों को शामिल करने में कितना वक्त लगेगा, मंत्री ने कहा, “मंत्रालय इन सुझावों पर विचार कर रहा है.”

उन्होंने कहा कि गंभीर अपराधों में शामिल किशोरों को अलग बाल सुधार गृहों में तीन साल तक रखा जाता है. वहां उन्हें अच्छा नागरिक बनने का प्रशिशण दिया जाता है.

कृष्णा तीरथ ने कहा, “हम बच्चों को अपने दिल के पास रखना चाहते हैं और उन्हें अच्छा नागरिक बनने में मदद करना चाहते हैं.”

बीएसपी के अवतार सिंह करीमपुरी के पूरक सवाल पर जवाब देते हुए उन्होंने कहा, “छोटे संशोधन के सुझावों पर विचार किया जा रहा है और अगर कानून में संशोधन करने की ज़रूरत हुई तो वो सलाह के बाद ही किया जाएगा. इसमें कुछ और वक्त लगेगा.”

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