पुलिस अधिकारी की हत्या की होगी सीबीआई जाँच

  • 4 मार्च 2013
रघुराज प्रताप सिंह उर्फ़ राजा भैया
Image caption राजा भैया पर इसके पहले भी कई मुकदमे दर्ज हैं.

उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रतापगढ़ के कुंडा में तैनात प्रांतीय पुलिस सेवा के अधिकारी जिया उल हक की ह्त्या और उससे जुड़े सभी चार मामलों की जाँच सीबीआई से कराने के लिए केंद्र सरकार को औपचारिक संस्तुति भेज दी है.

केंद्र सरकार द्वारा प्रस्ताव स्वीकार होने के बाद ये सभी मामले सीबीआई को ट्रांसफर हो जायेंगे.

गृह विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि शनिवार की रात वलीपुर ग्राम में हुई हिंसा के सिलसिले में हथिगवां थाने में कुल चार मुक़दमे दर्ज हुए थे.

इससे पहले मुख्य मंत्री अखिलेश यादव ने कहा था कि अगर परिजन सीबीआई जाँच चाहते हैं, तो सरकार ऐसा प्रस्ताव भेज देगी.

सोमवार को दिन में मृत पुलिस अधिकारी के घर पहुँचे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उनके परिवार को कुल 50 लाख रुपए मुआवज़ा देने की भी घोषणा की. साथ ही ये भी ऐलान किया कि मृत पुलिस अधिकारी के परिजनों में से किन्हीं दो लोगों को सरकारी नौकरी भी दी जाएगी.

लेकिन देवरिया पहुँचे अखिलेश यादव को लोगों की नाराज़गी भी झेलनी पड़ी और लोगों ने सरकार के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी भी की.

राजा भैया से बीबीसी संवाददाता रामदत्त त्रिपाठी की विशेष बातचीत

इस बीच उत्तर प्रदेश सरकार में खाद्य मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ़ राजा भैया ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया था.

राजा भैया ने इस मामले में उन पर मुक़दमा दर्ज होने के बाद पद से इस्तीफ़ा दे दिया.

राजा भैया की गिरफ्तारी की मांग

शनिवार की रात राजा भैया को उनके निर्वाचन क्षेत्र कुंडा के पुलिस उपाधीक्षक ज़िया उल हक की हत्या के षड्यंत्र के लिए अभियुक्त बनाया गया.

ज़िया उल हक़ के परिवार वालों ने राजा भैया की गिरफ्तारी और मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है.

पुलिस के मुताबिक उनके दो करीबी लोगों गुड्डू सिंह और राजीव सिंह, इसी मामले में गिरफ्तार कर लिए गए हैं. इसके बाद राजा भैया सोमवार सुबह मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मिले और त्याग पत्र दे दिया.

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने पत्रकारों को बताया कि इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है.

विधानसभा में सफाई

इस बीच राजा भैया ने विधानसभा में दावा किया कि गिरफ्तार किए गए दोनो लोग घटना के वक्त उनके साथ मुख्यमंत्री के बंगले में मौजूद थे और इस मामले की जांच सीबीआई से कराई जानी चाहिए.

उधर जब पुलिस महानिदेशक एसी शर्मा हक़ के गाँव जा रहे थे तो उनका बाहर ही घेराव किया गया और उन्हें चूड़ियाँ भेंट की गईं. हक़ की विधवा राजा भैया की तुरंत गिरफ़्तारी की माँग कर रही हैं.

इस घटना को लेकर विपक्षी दलों ने अखिलेश सरकार की तीखी आलोचना की है. बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने कहा है, "जिस प्रदेश में पुलिस ही सुरक्षित नहीं है उसमें आम आदमी कैसे सुरक्षित महसूस करेगा."

हत्या का आरोप

एक पुलिस अधिकारी के अनुसार यह मुकदमा मृत पुलिस अधिकारी ज़िया उल हक़ की पत्नी परवीन आजाद की ओर से थाना हथिगवां में लिखाया गया है.

हक़ कुंडा में पुलिस उपाधीक्षक पद पर तैनात थे. मुकदमे में मंत्री को षड्यंत्रकारी की भूमिका में दिखाया गया है.

परवीन आज़ाद ने रपट में कहा है, ''शनिवार की रात करीब आठ बजे ग्राम वलीपुर में दो गुटों के बीच फायरिंग की सूचना पाकर मेरे पति अपने दल-बल के साथ जब घटनास्थल पर पहुंचे तो तब तक प्रधान और उनके भाई को गोली लग चुकी थी."

रपट

परवीन ने अपनी रपट में ये आरोप लगाया है, ''ये चार लोग राजा भैया के गुर्गे हैं और राजा भैया के कहने पर मेरे पति को जान से मारने की नीयत से वहां पहुंचे थे."

रपट में आगे लिखा है कि जब पुलिस अधिकारी ज़िया उल हक वहां पहुचे तो गुलशन यादव, हरी ओम, रोहित सिंह और गुड्डू सिंह आदि ने उन्हें पकड़ लिया और कहा कि तुम्हें ज़िंदा नहीं जाने देंगे.

इसके बाद उन्हें पहले लाठी, डंडा और सरिया से मारा गया. जब वह गिर गए तो उनको तमंचे से गोली मार दी

मृत पुलिस अधिकारी की पत्नी ने यह भी लिखा है कि, "जब से मेरे पति कुंडा में सीओ पद पर तैनाती के लिए आए थे, तब से ही ये सारे लोग उनको डराते धमकाते थे, जिसकी चर्चा मेरे पति अक्सर मुझसे किया करते थे."

कुंडा रघुराज प्रताप सिंह उर्फ़ राजा भैया का निर्वाचन क्षेत्र है. राजा भैया एक बेहद विवादित राजनेता हैं और उनके खिलाफ़ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं.

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