तालिबान को चुनौती देता पाक स्कीइंग स्कूल

Image caption तालिबान को चुनौती दे रहा है ये स्कीइंग स्कूल

बर्फ पर फिसलने का खेल स्कीइंग. मात्र 15 जोड़े स्की और दो-तीन जोड़े पोल की मदद से मति उल्लाह खान पाकिस्तान का अकेला नागरिक स्की स्कूल चला रहे हैं.

ये स्कींइग स्कूल स्वात घाटी के मलाम जब्बा में स्थित है. यह वो जगह है जहां 2007 में तालिबान के कब्जे के बाद जीवन रातों-रात बदल गया. संगीत और नृत्य पर पाबंदियां लगा दी गईं और ऐसा ही स्कींइग के साथ भी हुआ.

तालिबान चरमपंथियों ने स्कीइंग स्कूल पर कई हमले किए, होटल पर बमबारी की, स्कीइंग उपकरणों को तहस-नहस कर दिया और उस स्कीइंग लिफ्ट के टुकड़े-टुकड़े कर दिए जिसे 1980 के दशक में ऑस्ट्रिया सरकार ने भेंट किया था.

तालिबान का साया

मति उल्लाह याद करते हुए बताते हैं, "मैं बहुत परेशान था. लगता था कि मलाम जब्बा में स्कीइंग संभव नहीं है. हम यहीं पले-बढ़े हैं और हमें अपनी इस जमीं से बेहद प्यार है, मगर अफसोस कि यहां सुकून से रहना संभव नहीं है.”

पहले चरमपंथी नागरिकों पर हमले नहीं किया करते थे, मगर अब सुरक्षा की दृष्टि से हालात बदतर हो गए हैं. आत्मघाती बमों के हमले बढ़ते जा रहे हैं.

स्कीइंग हमेशा से पाकिस्तान की संस्कृति का हिस्सा रहा है. स्वात घाटी में यह परंपरा रही कि अमीर दमघोटू गर्मी से बचने के लिए गर्मियों में यहां की खूबसूरत पहाड़ियों पर आया करते थे.

मगर अब ठिठुरती सर्दियों में यहां के लोग दक्षिण की ओर भागने लगे हैं.

जुगाड़ से शुरुआत

मलाम जब्बा में 1980 के दशक में स्काई गाह को विकसित करने के लिए सरकार ने धन तो मुहैया करवाया, मगर लंबे समय तक यह निष्क्रिय पड़ा रहा.

अंततः मति उल्लाह खान और उनके कुछ साथियों ने मिलकर इस मामले में पहल की और 2000 में सलालोम और डाउनहिल के साथ स्कीइंग के मुकाबले की शुरुआत की गई.

Image caption चढ़ाई के लिए अब तक रोपवे मौजूद नहीं है

"मुट्ठी भर स्कीयर और कुछ जुगाड़ू उपकरण हमारे साथी थे. मुकाबले के लिए स्कीयरों ने अपने हाथों से ट्रैम्पिंग की ढलान तैयार की. सच कहूं तो, भले ही हम आधुनिक संसाधनों से लैस नहीं थे, मगर एक अच्छी और जरूरी शुरुआत करना चाहते थे.”

2007 और 2009 के बीच जब स्वात पर तालिबानियों का कब्जा था, स्कीइंग का कोई विकल्प नहीं था.

मगर 1996 में चीन में हुए एशियाई खेलों में स्कीइंग मुकाबले में पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व करने वाले मति उल्लाह खान ने स्की स्कूल को पुर्नजीवित करने की ठानी.

अर्थव्यवस्था की मज़बूती

उनके इस कदम का मकसद आंशिक रूप से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देना था, मगर असली वजह थी तालिबान के आतंक का मुकाबला करने का एक सशक्त जरिया बनाना.

वे स्वात में मौज-मस्ती का दौर वापस लाना चाहते थे.

"बच्चे बहुत खुश हैं कि हमने स्कीइंग फिर से शुरु कर दिया है. यहां के निवासियों के लिए अच्छा संदेश है कि मलाम जब्बा में शांति फिर से लौट रही है."

"कोई नहीं कह सकता कि हमारा ये इलाका चरमपंथियों के हमले से पूरी तरह आजाद है. अनिश्चितता बरकरार है. मगर हमें इसी मिट्टी में जीना है. इसलिए हम यहां शांति बहाल करने की पूरी कोशिश करेंगे और एक दिन बेशक जीतेंगे."

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