भड़काऊ भाषण: वरुण गांधी दूसरे मामले में भी बरी

Image caption भड़काऊ भाषण देने के दोनों मामलों में बरी हुए वरूण गांधी

भड़काऊ भाषण के एक मामले में पहले ही बरी हो चुके भारतीय जनता पार्टी के नेता वरुण गांधी को दूसरे मामले में भी बरी कर दिया गया है.

पीलीभीत की अदालत के न्यायाधीश अब्दुल कयूम ने उन्हें दोषमुक्त करार दिया.

फ़ैसले की जानकारी देते हुए सरकारी वकील एमपी वर्मा ने बीबीसी को बताया, "वरुण गांधी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया."

अदालत ने जब वरूण गांधी को बरी करने का फ़ैसला सुनाया तब वरूण अदालत में मौजूद थे. उनके साथ भारतीय जनता पार्टी के कुछ कार्यकर्ता भी मौजूद थे.

अदालत के फ़ैसले के बाद वरूण गांधी और उनके समर्थकों ने राहत की सांस ली. फ़ैसले के बाद वरूण सहज भाव से अदालत से बाहर निकले.

बयान से मुकरे गवाह

वरूण गांधी के ख़िलाफ़ पुलिस ने 34 गवाहों को पेश किया था, लेकिन इनमें से ज़्यादातर अपने पूर्व बयान से मुकर गए. पुलिस के लोगों का बयान भी मिला जुला था. लिहाजा उनके ख़िलाफ़ सबूत नहीं बन पाए.

32 साल के वरुण गांधी पर 2009 में चुनाव प्रचार के दौरान एक ख़ास समुदाय के खिलाफ़ भड़काऊ भाषण देने का आरोप था.

उनके खिलाफ़ पहली एफ़आईआर 17 मार्च, 2009 को बारखेड़ा पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई. इसमें वरुण गांधी पर आठ मार्च, 2009 को एक जनसभा में भड़काऊ भाषण देने का आरोप लगाया गया था.

दूसरी एफ़आईआर 18 मार्च, 2009 को सदर कोतवाली में दर्ज कराई गई. इसमे दालचंद इलाके में कथित रूप से सांप्रदायिक द्वेष भड़काने वाले भाषण देने का आरोप लगाया गया.

पहले मामले में भी बरी

अदालत ने बीते 27 फरवरी को पहले मामले में भी वरुण गांधी को दोषमुक्त ठहराया गया था.

इस मामले में भी अभियोजन पक्ष ने अदालत में 51 गवाह पेश किए लेकिन वरुण गांधी के ख़िलाफ़ कोई बयान या सबूत पेश नहीं किया जा सका.

वरुण गांधी पहले से ही अपने ऊपर इन आरोपों का खंडन किया था. उन्होंने कहा कि पहले वाले मामले में वो अपराधी तत्वों की बात कर रहे थे.

वरुण गांधी के मुताबिक दूसरे मामले में टेपों से छेड़छाड़ की गई थी. बाद में चुनाव आयोग के निर्देश पर उन पर केस दर्ज किए गए थे.

जेल गए थे वरूण

वरुण गांधी ने बाद में कोर्ट के सामने समर्पण कर दिया था और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था.

बहुजन समाज पार्टी की तत्कालीन सरकार ने वरुण गांधी पर एनएसए लगा दिया था और उन्हें एटा जेल में शिफ़्ट कर दिया गया था.

मई 2009 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एनएसए हटा लिया गया था और जेल में 19 दिन रहने के बाद उन्हें ज़मानत मिल गई.

वरुण गांधी ने पीलीभीत संसदीय सीट का चुनाव भी जीत लिया था. अब वे दोनों आरोपों में दोषमुक्त ठहरा जा चुके हैं.

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