राजा भैया का मामला सीबीआई के पास

  • 7 मार्च 2013
राजा भैया
Image caption राजा भैया पांच बार निर्दलीय विधायक चुने गए हैं और भाजपा तथा सपा दोनों की सरकार में मंत्री रह चुके हैं.

उत्तरप्रदेश में प्रतापगढ़ ज़िला के अंतर्गत आने वाले कुंडा में तैनात पुलिस उपाधीक्षक ज़िया उल हक़ की हत्या के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने पूर्व मंत्री रघुराज प्रताप सिंह ऊर्फ़ राजा भैया के ख़िलाफ़ जाँच अपने हाथ में ले ली है.

केन्द्रीय जांच ब्यूरो पुलिस अधिकारी ज़िया उल हक,ग्राम प्रधान नन्हे लाल यादव और उनके भाई की ह्त्या से जुड़े चारों मुकदमों की जांच करेगी.

इनमे कुल मिलाकर 22 अभियुक्त हैं , लेकिन सबसे महत्वपूर्ण पूर्व मंत्री रघुराज प्रताप सिंह राजा भैया हैं.

हत्या की साजिश

मृत पुलिस अधिकारी की पत्नी परवीन आजाद ने राजा भैया पर अपने पति की ह्त्या की साजिश में शामिल होने का मुकदमा दर्ज कराया है.

गृह सचिव कमाल सक्सेना ने बताया कि केंद्र सरकार ने सी बी आई जाँच के लिए ज़रुरी अधिसूचना जारी कर दी है.

इसके बाद चारों मुक़दमे सीबीआई को स्थान्तरित हो गए. नियमानुसार सीबीआई ने चारों मुक़दमे अपने थाने में दर्ज कर लिए.

हालाकि राजा भैया ने इस आरोप से इनकार किया है. लेकिन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सार्वजनिक आलोचना के चलते राजा भैया से मंत्रिमंडल से त्यागपत्र ले लिया. साथ ही मामले की जाँच तुरंत सीबीआई को सौंप दी.

मगर विपक्ष इतने से संतुष्ट नही है और वह राजा भैया की गिरफ्तारी की मांग कर रहा है. मगर उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि इस मामले में अब जो भी कार्यवाई करनी है , वो सीबीआई ही करेगी.

समझा जाता है कि सी बी आई की टीम शुक्रवार को कुंडा पहुँच जायेगी.

गिरफ़्तारी

यूपी पुलिस ने इस मामले में अब तक दो लोगों को गिरफ़्तार किया है. सीबीआई जल्द ही उन दोनों को अपनी हिरासत में लेने की कार्रवाई करेगी.

यूपी पुलिस ने भी जो केस दर्ज किया था उनमें राजा भैया पर हत्या की साज़िश रचने का आरोप लगाया गया था.

राजा भैया के शुमार उत्तरप्रदेश के बाहुबली नेताओं में होता है.

वो कुंडा से पांच बार विधायक रहे हैं और भारतीय जनता पार्टी के अलावा समाजवादी पार्टी की सरकार में मंत्री रहे हैं. इस्तीफ़ा देने से पहले वो अखिलेश सरकार में खाद्य मंत्री थे.

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