अजमेर में पाक प्रधानमंत्री के स्वागत पर मतभेद

Image caption सैयद जैनुल आबेदीन अली खान, दीवान, अजमेर शरीफ़ दरगाह

हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह पर सिर नवाने आने वाले हर शख्स का स्वागत होता है. लेकिन पाक प्रधानमंत्री राजा परवेज़ अशरफ़ को ये इज़्ज़त हासिल नहीं होगी.

दरगाह के सज्जादानशीन मुस्लिम धर्म गुरू और दरगाह प्रमुख दीवान सैयद जैनुल आबेदीन अली खान ने एक बयान जारी कर ये ऐलान किया.

बयान में कहा गया है कि देश की सीमा से सैनिकों के सिर काट कर ले जाने की अमानवीय घटना और पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचार और उनके धर्मस्थलों की असुरक्षा के विरोध में पाक प्रधानमंत्री की जियारत के बहिष्कार का फ़ैसला किया गया है.

उधर दरगाह में खादिमो की संस्था अंजुमन के मुताबिक दरगाह में कोई भी श्रदालु आ सकता है.

अंजुमन के सचिव वाहिद हुसैन चिश्ती कहते है कि दरगाह में किसी भी जाति-बिरादरी, मुल्क और मजहब का व्यक्ति दुआ के लिए हाजरी दे सकता है.

उन्होंने कहा, "ये ऐसी जगह है जो प्रेम और भाईचारे का संदेश देती है. यहाँ कोई भी आकर अपना सिर झुकाकर इबादत कर सकता है. खवाजा की चोखट कोई भेदभाव नहीं करती."

परंपरा के ख़िलाफ़

सैयद जैनुल आबेदीन अली खान के बयान के मुताबिक परंपरागत रूप से दरगाह में आने वाले किसी भी राष्ट्राध्यक्ष की अगवानी सर्वप्रथम दरगाह प्रमुख द्वारा की जाती है.

इसी परंपरा के तहत वर्तमान दरगाह प्रमुख ने भी कई देशों के प्रधानमंत्रियों और राष्ट्रपतियों का सूफी परंपराओं के अनुसार स्वागत किया.

लेकिन इस बार दरगाह के दीवान राजा परवेज़ अशरफ़ की जियारत के वक्त जिला प्रशासन को अपनी दरगाह में उपस्थिति और पास के लिए नहीं लिखेगें और इस यात्रा का बाहिष्कार करेंगे.

बयान में आगे कहा गया है कि पाकिस्तान एक इस्लामिक गणराज्य है लेकिन वहां इस्लामी शिक्षाओं का पालन नहीं किया जा रहा. इस्लाम ये स्पष्ट निर्देश देता है कि पड़ोसियों के साथ शान्ति व सदाचार का व्यवहार करना चाहिए.

दरगाह के सज्जादानशीन ने कहा कि, “बेहतर होता कि पाक प्रधानमंत्री भारतीय शहीदों के सिर ससम्मान भारत लाते और देश के प्रधानमंत्री को सौंपकर पाक सैनिकों की ओर से देश की जनता और शहीदों के परिवारों से क्षमा याचना करते. फिर जियारत के लिए अजमेर दरगाह आते जिससे दोनों देशों के बीच नए तरीके से मधुर संबधों की स्थापना होती.”

उन्होंने कहा कि अगर वो दरगाह के आध्यात्मिक प्रमुख की हैसियत से पाक प्रधानमंत्री का दरगाह में स्वागत करते हैं तो यह देश के मान सम्मान को ठेस पहुंचाना और शहीदों के बलिदान का अनादर करना होगा.

उधर अजमेर में वकीलों के संगठन बार एसोसिएशन ने पाकिस्तानी प्रधान मंत्री के दौरे का विरोध किया है.

वकीलों ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के मार्ग पड़ने वाले बाजारों में व्यापारियो से दुकाने बंद रखने को कहा है.

वकीलों के संगठन ने भी कहा है पाकिस्तान की सेना ने जो क्रूर बर्ताव भारतीय सैनिको के साथ किया, उसका विरोध किया जायेगा.

वकीलों ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को सरकारी मेहमान का दर्जा दिए जाने का भी विरोध किया.

संबंधित समाचार