किरण की कचहरी में राम सिंह की फ़रियाद

  • 11 मार्च 2013
किरण बेदी

तिहाड़ जेल की प्रमुख रह चुकी किरण बेदी ने राम सिंह से मुलाक़ात का अनुभव बयान करते हुए कहा कि राम सिंह मानसिक रूप से कमज़ोर व्यक्ति नहीं था. 'आप की कचहरी' कार्यक्रम में एक बार वो अपने बस मालिक गंगाधर को लेकर किरण बेदी के पास आया था.

बीबीसी से ख़ास बातचीत के दौरान किरण बेदी ने कहा कि अपनी बात मनवाने के लिए राम सिंह किसी हद तक जाने वाला इंसान था.

मामला दरअसल यह था कि राम सिंह की गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी और उनके हाथ ख़राब हो गए थे. राम सिंह वाहन के मालिक से मुआवज़े की मांग करते हुए लेबर कोर्ट गया था लेकिन वहां कार्रवाई में हो रही देरी से परेशान होकर वो किरण बेदी के एक कार्यक्रम में पहुंचा था.

क्या था किस्सा

पुलिस की नौकरी से सेवानिवृत्त होने के बाद किरण बेदी स्टार इंडिया के एक रिएलटी टीवी शो 'आप की कचहरी' की एंकर हुआ करती थीं.

शो के दौरान किरण बेदी ने राम सिंह और गाड़ी के मालिक के बीच सुलह-सफ़ाई कराने की कोशिश की लेकिन राम सिंह अपनी मांग पर अड़ा रहा.

बस मालिक ने राम सिंह पर शराब पीकर और लापरवाही से गाड़ी चलाने का आरोप लगाते हुए मुआवज़ा देने से इनकार कर दिया था.

फिर भी किरण बेदी के शो में बस मालिक गंगाधर राम सिंह को पांच हज़ार रुएए प्रतिमाह के वेतन पर नौकरी देने को तैयार हो गए थे लेकिन रामसिंह ने नौ हज़ार से कम पर काम करने से मना कर दिया.

और इस तरह उस शो के दौरान राम सिंह और उनके वाहन मालिक के बीच कोई समझौता नहीं हो सका.

राम सिंह की आत्महत्या पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए किरण बेदी ने आगे कहा कि राम सिंह जैसे अभियुक्त से जेल में रहने वाले दूसरे क़ैदी भी घृणा करते हैं.

बीबीसी से बातचीत के दौरान किरण बेदी ने कहा कि जेल के बंदी इस तरह के व्यक्ति को स्वीकार नहीं करते हैं और उन पर ग़ुस्सा निकालने का मौक़ा ढूंढते रहते हैं.

किरण बेदी के अनुसार जेल प्रशासन पर इस तरह के अभियुक्त को जेल के अंदर के समाज से भी बचाने की ज़िम्मेदारी होती है.

उन्होंने कहा कि जेल में हुई मौत की जांच अनिवार्य है और जांच के बाद ही पता चल पाएगा कि किन हालात में अभियुक्त राम सिंह की मौत हुई.

ग़ौरतलब है कि दिसंबर 2012 में दिल्ली में एक चलती बस में 23 साल की एक पैरामेडिकल छात्रा के साथ हुए सामूहिक बलात्कार मामले में छह लोगों पर मुक़दमा चल रहा है.

राम सिंह उस केस के प्रमुख अभियुक्त था.

किरण बेदी के अनुसार राम सिंह को भी इस बात का अंदाज़ा था कि सारे सुबूत उनके ख़िलाफ़ हैं और उनके बचने की उम्मीद बहुत कम है.

किरण बेदी के अनुसार राम सिंह की सुरक्षा का ख़्याल रखते हुए उन्हें स्पेशल सेल में रखा गया था लेकिन फिर भी उनके आत्महत्या करने की संभावना से इनकार नही किया जा सकता है.

'आत्महत्या करना आसान'

किरण कहती है, ''जेल में ग्रिल हर जगह होती है, अपने कपड़े होते हैं, पाजामा होता है, उसका नाड़ा होता है. इसलिए अगर आप ठान लें तो आप कोई भी मौक़े का फ़ायदा उठा सकते हैं.''

किरण बेदी के अनुसार जेल में बंद कैदी से जुड़े तमाम पहलुओं को देखते हुए जेल अधिकारी फ़ैसला करते हैं कि क़ैदी को क्या-क्या सुविधाएं मुहैया कराई जाए जिससे क़ैदी बचा रहे.

उन्होंने कहा कि जांच के बाद ही पता चलेगा कि राम सिंह पर इलेक्ट्रॉनिक निगरानी रखी जा रही थी या कोई आदमी को उन पर नज़र रखने की ज़िम्मेदारी दी गई थी.

बेदी के अनुसार राम सिंह एक आम आदमी नहीं था.

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