सेबी की कार्रवाई दुर्भावनापूर्ण: सहारा समूह

Image caption सेबी की इस याचिका से सुब्रत रॉय की मुसीबत और बढ़ सकती हैं

सहारा समूह ने भारतीय बाजार नियामक सेबी की कार्रवाई को दुर्भावनापूर्ण क़रार देते हुए कहा है कि सेबी बिना किसी सबूत के सहारा समूह के ख़िलाफ़ मीडिया में ख़बरें लीक कर रही है.

ग़ौरतलब है कि शुक्रवार को सेबी ने सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत रॉय को हिरासत में लिए जाने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी जिसमें उन्होंने अपील की है कि सुब्रत रॉय को भारत से बाहर जाने की इजाज़त न दी जाए.

सेबी का ये क़दम निवेशकों के 24 हज़ार करोड़ रुपए लौटाने से जुड़ा है, जिस पर अमल नहीं हुआ.

सेबी ने ये मामला जस्टिस केएस राधाकृष्णन की बेंच के सामने रखा, जिसके बाद बेंच ने अप्रैल के पहले हफ्ते में मामले की सुनवाई की बात कही.

सेबी ने कोर्ट से अपील की है कि मामले की अगली सुनवाई तक वो सहारा के प्रमुख सुब्रत रॉय और सहारा के दो अन्य निदेशकों को हिरासत में लिए जाने के लिए क़दम उठाए.

सेबी ने कोर्ट से अपील की है कि उनके पासपोर्ट भी सुप्रीम कोर्ट में रखवा लिए जाएं.

सेबी की इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए सहारा समूह ने शुक्रवार देर रात एक प्रेस विज्ञप्ति जारी किया.

बयान में सहारा समूह ने सेबी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, ''सेबी न केवल मीडिया को सहारा समूह के बारे में ग़लत ख़बरें दे रही है, बल्कि इसने देश की जनता से कई सच्चाईयों को छिपाया भी है. सहारा ने 700 करोड़ रूएए एडवांस टैक्स के रूप में जमा करवाया है. लेकिन इन तथ्यों के बारे में सेबी ने कभी भी मीडिया को नहीं बताया.''

विवाद

सहारा ग्रुप और सेबी के बीच 24,000 करोड़ रुपए की वसूली को लेकर क़ानूनी लड़ाई चल रही है.

Image caption सहारा और सेबी के बीच 24,000 करोड़ रुपए की वसूली को लेकर कानूनी लड़ाई चल रही है

सहारा हाउसिंग इवेस्टमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (एसएचआईसीएल) और सहारा इंडिया रियल स्टेट कॉरपोरेशन लिमिटेड (एसआईआरईसीएल) के ख़िलाफ़ अपने दो अलग-अलग आदेशों में सेबी ने कहा है कि इन दोनों कंपनियों ने बॉन्ड धारकों से 6,380 करोड़ और 19,400 करोड़ रुपए की राशि जुटाई और इसमें 'विभिन्न अनियमितताएं' बरती गईं.

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल अगस्त में सहारा ग्रुप को आदेश दिया था कि वो निवेशकों को 15 प्रतिशत ब्याज के साथ उनका पैसा लौटाए और सेबी से इस काम को सुगम बनाने को कहा था.

इससे पहले सहारा ग्रुप ने कोशिश की थी कि कोर्ट उन्हें ये पैसा चुकाने के लिए कुछ और समय दे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनकी इस याचिका को ख़ारिज कर दिया और साथ ही उन्हें फटकार भी लगाई.

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