'बिहार नहीं देखा, बिहारी होने का दर्द देखा है'

Image caption रामसिंह अपनी पत्नी राधा और बेटियों नेहा और प्रिया के साथ दिल्ली के रामलीला मैदान पहुंचे.(बाएं से दाएं)

प्रिया दिल्ली में बारहवीं कक्षा में पढ़ती हैं, उन्हें वोटे देने का अधिकार अभी नहीं मिला है लेकिन वो दिल्ली के रामलीला मैदान में जनता दल यूनाइटेड की अधिकार रैली में हिस्सा लेने के लिए अपने पूरे परिवार के साथ आई हैं.

जब मैंने उनसे पूछा कि वो इस रैली में हिस्सा लेने क्यों आई हैं तो उनका जवाब था, “हम ये दिखाने के लिए यहां आए हैं कि दिल्ली में बहुत से बिहार के लोग हैं और वो अपने अधिकार पाना चाहते हैं.”

वो अपनी बात पूरा करतीं इससे पहले उनकी मां राधा ने बीच में रोककर कहा, “हमें भी हक मिलना चाहिए. बिहारियों की यहां के भाई लोग इज्जत नहीं करते हैं तो हमें भी वो इज्जत मिलनी चाहिए. बिहार के अधिकार के लिए हम ज़रुर आवाज़ उठाएंगे.”

प्रिया की बहन नेहा ग्यारहवीं में पढ़ती हैं और वो भी बड़े जोश में इस रैली में हिस्सा लेने के लिए आई हैं.

नेहा कहती हैं, “दिल्ली हमने देखा हैं लेकिन यहां जो सबकुछ ठीक नज़र आता है वो बिहार में ठीक नज़र नहीं आता. मैं चाहती हूं कि बिहार का भी विकास हो.”

बिहार से दिल्ली

ये परिवार 1976 में दिल्ली आ गया था और इस परिवार के मुखिया रामसिंह दिल्ली में मिस्त्री का काम करते हैं. ये परिवार अपने पड़ोसियों समेत 50 लोगों के साथ रामलीला मैदान पहुंचा है.

जब मैंने रामसिंह से पूछा कि क्या आप जेडीयू समर्थक हैं तो रामसिंह ने इस बात का जवाब तो नहीं दिया लेकिन इतना ज़रुर कहा, “बिहार में काम धंधा मिलेगा तो कोई दिल्ली क्यों आएगा. बिहार अच्छा है उसे विशेष दर्जा दिया जाए. मैं तो ये सोच के चल रहा हूं कि बिहार को विशेष दर्जा मिलेगा तो सही है.”

राधा कहती हैं कि उनकी बेटियों को दिल्ली में रहना पसंद है लेकिन वो चाहती हैं कि बिहार का विकास हो, “हमें बिहार अच्छा लगता है. ये सब दिल्ली में पैदा हुए यहां पले बढ़े और पढ़ाई की इन्हें दिल्ली अच्छा लगता है.”

ये परिवार रैली में हिस्सा लेने आया था लेकिन रामलीला मैदान में भीड़ को देखकर अंदर जाने की हिम्मत नहीं जुटा सका और बाहर बैठकर ही पूरे भाषण सुना.

भले ही राजनीतिक जानकार बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की इस रैली को राजनीतिक मकसद से की गई रैली क़रार दे रहे हों लेकिन बिहार से आकर दिल्ली में बसे कई बिहारियों के लिए विशेष दर्जा दिए जाने की मांग उनके गौरव से जुड़ा हुआ मुद्दा है.

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