डीएमके ने यूपीए सरकार से नाता तोड़ा

मनमोहन सिंह, करुणानिधि
Image caption करुणानिधि ने कहा है कि वो यूपीए सरकार को बाहर से सशर्त समर्थन भी दे सकते हैं.

कांग्रेस की अध्यक्षता वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार की बड़ी सहयोगी पार्टी, डीएमके ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया है. मंगलवार देर शाम पार्टी के वरिष्ठ नेता टीआर बालू ने राष्ट्रपति से मिलकर उन्हें समर्थन वापसी का पत्र सौंपा.

डीएमके के मंत्री बुधवार को प्रधानमंत्री को अपने इस्तीफ़े सौंपेंगे.

हालांकि पार्टी का कहना है कि उसने यूपीए सरकार को बाहर से समर्थन देने का विकल्प सुरक्षित रखा है. डीएमके के लोकसभा में 18 सदस्य हैं और यूपीए सरकार में पार्टी के पांच मंत्री हैं.

यूपीए सरकार पर कितना असर पड़ेगा: विश्लेषण

डीएमके ने यूपीए सरकार से मांग की थी कि श्रीलंका में मानवाधिकार उल्लंघन के खिलाफ़ पेश होने वाले प्रस्ताव को और कड़ा किए जाए और श्री लंकाई तमिलों के खिलाफ हुए युद्ध अपराधों की अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की जाए.

एक पत्रकार वार्ता में डीएमके नेता एम करुणानिधि ने कहा, "बार-बार अपनी मांग सामने रखने के बाद भी जब यूपीए सरकार ने वो नहीं मानी तो हमें अब उनका समर्थन करना सही नहीं लगता."

शुक्रवार को अमरीका, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग में श्रीलंका में 26 साल चले गृह युद्धके दौरान हुए मानवाधिकार उल्लंघनों के खिलाफ प्रस्ताव लाने वाला है.

हालांकि करुणानिधि ने कहा कि वो यूपीए सरकार को बाहर से सशर्त समर्थन भी दे सकते हैं, "अगर शुक्रवार के वोट से पहले केन्द्र सरकार हमारी कुछ मांगे मानकर संसद में श्रीलंका सरकार के खिलाफ़ एक प्रस्ताव पारित करवाती है, तो हम अपने फ़ैसले पर पुनर्विचार करने को तैयार है."

उनकी घोषणा के बाद यूपीए सरकार में कांग्रेस के वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि सरकार की स्थिरता पर कोई संकट नहीं है.

सरकार संकट में?

लोकसभा में 18 सांसदों के साथ डीएमके, संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार का सबसे बड़ा सहयोगी दल है. कैबिनेट में डीएमके के पांच सांसद हैं.

पी चिदंबरम ने पत्रकारों से कहा, "डीएमके की यूपीए से मंत्री हटाने की घोषणा के बावजूद यूपीए सरकार की स्थिरता और सत्ता में बने रहने पर कोई सवाल नहीं है और सरकार को लोकसभा में बहुमत हासिल है."

यूपीए सरकार को बाहर से समर्थन दे रही समाजवादी पार्टी के नेता राम गोपाल यादव ने कहा, "अगर सभी हालात सामान्य रहे तो हमारा समर्थन बना रहेगा."

वहीं बहुजन समाज पार्टी नेता मायावती ने कहा, "हम साम्प्रदायिक ताकतों को सत्ता से बाहर रखने के लिए यूपीए को सहयोग दे रहे हैं और देते रहेंगे."

वाम नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि यूपीए सरकार पहले ही अल्पमत में थी और डीएमके के समर्थन वापस लेने से और अस्थायी हुई है.

प्रमुख विपक्षी पार्टी बीजेपी के प्रवक्ता राजीव प्रताप रूडी ने कहा की डीएमके बहुत भरोसेमंद पार्टी नहीं है, लेकिन साथ ही ये भी कहा कि "कोई भी पार्टी आगामी आम चुनाव में सोनिया गांधी या मनमोहन सिंह के बोझ के साथ नहीं जाना चाहता इसलिए पहला मौका देखकर बाहर निकल रहा है."

अंग्रेज़ी समाचार पत्र ‘टेलिग्राफ’ की राजनीतिक संपादक राधिका रामासेशन ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि ये ज़रूर सरकार के लिए गंभीर संकट है, "कुछ लोग इसे मज़ाक कह रहे हैं और मान रहे हैं कि डीएमके वापस आ जाएगी लेकिन मुझे ऐसा नहीं लगता."

सरकार की रणनीति

सरकार के लिए डीएमके का समर्थन बहुत अहम़ है. मौजूदा संसद सत्र शुक्रवार को खत्म हो जाएगा जिस दौरान सरकार को बलात्कार विरोधी बिल और खाद्य सुरक्षा बिल समेत कई अहम् विधेयक पारित करवाने हैं.

आगे की रणनीति के बारे में पी चिदंबरम ने कहा कि उन्होंने डीएमके प्रमुख करुणानिधि की घोषणा का संज्ञान लिया है और कल डीएमके की ओर से दिए गए सुझावों और संयुक्त राष्ट्र में आने वाले प्रस्ताव के मसौदे पर कांग्रेस संसदीय दल और कोर कमेटी की बैठक में गंभीर चर्चा हुई है.

डीएमके के सरकार को बाहर से सशर्त समर्थन देने के मुद्दे पर चिदंबरम ने कहा कि संसद में श्रीलंका के तमिलों के मुद्दे पर प्रस्ताव लाने के बारे में सभी राजनीतिक दलों से विचार विमर्श जरूरी है और ये प्रक्रिया शुरु हो गई है.

एम करुणानिधि का कहना है कि श्री लंका में रह रहे तमिलों के साथ बहुत अत्याचार हुआ है और उनकी पार्टी उसकी निंदा करती है.

हाल ही में जारी हुई मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच की रिपोर्ट में कहा गया है कि श्रीलंकाई सुरक्षा बलों ने हिरासत के दौरान तमिलों के साथ बलात्कार किया था.

करीब तीन दशकों के युद्ध के बाद मई 2009 में श्री लंका की सेना ने एलटीटीई को नेस्ते-नाबूद कर दिया था. इस युद्ध में करीब एक लाख लोग मारे गए थे और दोनों पक्षों पर युद्धअपराधों के आरोप लगे.

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