श्रीलंका पर संसदीय प्रस्ताव की बैठक अनिर्णायक

Image caption समाजवादी पार्टी ने कहा की श्रीलंका भारत का मित्र देश है. (तस्वीर पीटीआई)

भारत की केंद्र सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में श्रीलंका पर संसदीय प्रस्ताव लाने पर सहमति नहीं बन पाई है.

श्रीलंका के खिलाफ संसदीय प्रस्ताव पर चर्चा करने के लिए बुलाई गई बैठक में ज्यादातर पार्टियों ने इसके विरोध में अपना मत रखा, जिससे ये प्रस्ताव लाने की संभावना नहीं के बराबर रही गई है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक करीब 90 मिनट तक चली इस बैठक में सिर्फ डीएमके ने प्रस्ताव लाने का समर्थन किया.

केंद्र में यूपीए की सरकार को बाहर से समर्थन देने वाली समाजवादी पार्टी ने कहा की श्रीलंका भारत का मित्र देश है और संसद को उसके खिलाफ कोई प्रस्ताव नहीं लाना चाहिए.

मित्र देश

समाजवादी पार्टी के नेता रेवती रमण ने कहा, "हमने हाल ही में अफज़ल गुरु पर पाकिस्तानी संसद में प्रस्ताव की घोर निंदा की है तो दूसरी तरफ हम एक मित्र पडोसी देश के साथ उसी तरह का बर्ताव कैसे कर सकते हैं? हम श्रीलंकाई तमिलों के साथ हैं लेकिन हमें नहीं भूलना चाहिए की 1962 में चीन के साथ युद्ध के दौरान श्रीलंका एकमात्र देश था जो हमारे साथ खड़ा था."

संसदीय कार्यमंत्री कमलनाथ ने कहा की ये बैठक 'अनिर्णायक' रही है. उन्होंने कहा कि बैठक श्रीलंकाई तमिलों पर संसदीय कार्यवाही में पैदा हुई अड़चन को खत्म करने के लिए बुलाया गया था लेकिन कोइ नतीजा नहीं निकल पाया है.

वहीं विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने सवाल उठाया कि जब ये मसला डीएमके और सरकार के बीच का है तो इसमें सर्वदलीय बैठक बुलाने की क्या ज़रूरत थी.

डीएमके मंगलवार को यूपीए से अलग हो गई थी और पार्टी की मांग थी कि सरकार श्रीलंका के खिलाफ संसद में प्रस्ताव पारित करे.

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