बिहार: बोर्ड परीक्षा में पकड़े गए 1600 नकलची

Image caption बिहार की साक्षरता दर क़रीब 64 फ़ीसदी है.

बिहार के अधिकारियों के मुताबिक़ बोर्ड परीक्षाओं में नकल करने के आरोप में सोलह सौ छात्र-छात्राओं को परीक्षा से निष्कासित कर दिया गया है.

अधिकारियों के मुताबिक़ सौ से अधिक अभिभावकों को भी अपने बच्चों को नकल कराने के आरोप में पकड़ा गया है.

बिहार की बोर्ड परीक्षा में चार हज़ार से अधिक स्कूलों में बनाए गए परीक्षा केंद्रों पर क़रीब 13 लाख छात्र-छात्राएं शामिल हुईं.

परीक्षा में नकल बिहार में आम बात है. लेकिन इतनी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों का पकड़ा जाना अभूतपूर्व है.

अधिकारियों के मुताबिक परीक्षा केंद्रों पर अध्यापकों, पुलिस और मजिस्ट्रेट की ओर से बरती जा रही सतर्कता की वजह से इतनी बड़ी संख्या में परीक्षार्थी और अभिभावक नकल के आरोप में पकड़े गए.

साक्षरता

बिहार में साक्षरता की दर काफी कम 64 फ़ीसद है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर साक्षरता दर 74 फ़ीसदी है.

पांच दिन की इस परीक्षा का आयोजन बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड (बीएसईबी) की ओर से किया गया था.ये परीक्षाएं सोमवार को ख़त्म हुई हैं.

बीएसईबी के वरिष्ठ अधिकारी लल्लन झा ने बताया,''परीक्षा हाल में नकल करने या अनुचित माध्यमों का प्रयोग करने के आरोप में निष्कासित कर दिया गया है.''

उन्होंने बताया कि अभिभावकों को परीक्षा केंद्रों पर नकल की सामग्री पहुंचाने या अध्ययन सामग्री पहुंचाने के आरोप में पकड़ा गया है.

झा ने बताया कि परीक्षा से निष्कासित किए गए छात्र अगले तीन साल तक परीक्षा नहीं दे पाएंगे.

नकल करने या कराने के आरोप में पकड़े गए छात्रों और उनके अभिभावकों पर दो हज़ार रुपए का जुर्माना लगाया जा सकता है या छह महीने की क़ैद या दोनों सज़ाएं एक साथ दी जा सकती हैं.

बिहार में नकल के आरोप में सज़ा बहुत कम अवसरों पर ही दी जाती है.

नकल की अधिकांस घटनाएं छपरा, मोतिहारी, वैशाली, शेखपुरा, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, गया, भागलपुर और जहानाबाद ज़िले की हैं.

अधिकारियों ने बताया कि परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा के पुख़्ता इंतजाम के बाद भी परीक्षार्थी परीक्षा हाल में किताबें और नोट्स लेकर चले जाते हैं.

अभिभावक भी साथ

कुछ परीक्षार्थियों के अभिभावक कागज पर लिखे सवालों के उत्तर को कमरे में फेंक देते हैं. इसके अलावा कमरे के आसपास टहल रहे लोग भी छात्रों को नकल सामग्री पहुंचा देते हैं.

अधिकारियों के मुताबिक़ नकल करा रहे अभिभावक रोकने पर पुलिसकर्मियों से झगड़ा भी कर लेंते हैं.

हाल के सालों में नकल के आरोप में पकड़े गए छात्रों और उनके अभिभावकों की तस्वीरें स्थानीय अख़बारों में प्रकाशित हुईं, यह उनके लिए कुछ शर्मनाक भी था. लेकिन ऐसा नहीं लगता है कि इस साल पकडे गए लोग उससे डरे थे.

मोतिहारी निवासी परमेश्वर शर्मा कहते हैं,''क्या किया जाए, यह यहां बहुत लंबे समय से हो रहा है. यहां सबलोग यही कर रहे हैं.''

उन्होंने बताया कि उनके छोटे भाई ने एक स्कूल में परीक्षा दे रहे अपने बेटे को परीक्षा कक्ष की खिड़की से किताबें पहुंचाई थीं.

भारती की सुप्रीम कोर्ट ने 2008 में कहा था कि नकल करते हुए पकड़े गए छात्र हमदर्दी के हक़दार नहीं हैं, उन्हें सख़्त सज़ा दी जानी चाहिए.

अदालत ने कहा था,''अगर हमारा देश प्रगति करना चाहता है तो, हमें उच्च शिक्षा के मापदंडो को बनाए रखना होगा. यह तभी संभव है कि अगर परीक्षा में कदाचार होते पाया जाए तो उसे सख्ती से ख़त्म किया जाए.''

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