बलात्कार: विदेशी औरतों को भारत में इंसाफ नहीं?

Image caption भारतीय ही नहीं विदेशी महिला भी यहां यौन उत्पीड़न की शिकार रही हैं

भारत में आए दिन बलात्कार और यौन उत्पीड़न की ख़बरें अब अखबारों में आम सी हो गई हैं.

यौन उत्पीड़न का शिकार न केवल भारतीय महिलाएं हो रही हैं, बल्कि विदेश से भारत आने वाली महिलाओं को भी इसका सामना करना पड़ रहा है.

नतीजा ये कि विभिन्न देशों के दूतावास अपने नागरिकों को भारत में सख्त एहतियात बरतने की सलाह देने लगे हैं.

मंगलवार को आगरा में एक ब्रितानी महिला सैलानी को अपनी खिड़की से कूदना पड़ा क्योंकि उन्हें डर था कि होटल का मालिक उनके साथ दुष्कर्म करने की कोशिश कर रहा है.

एक नज़र उन ताज़ा मामलों पर जिनमें विदेशी महिलाओं को भारत में यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ा.

मार्च 2013: स्विस महिला के साथ मध्य प्रदेश में सामूहिक बलात्कार

Image caption स्विस महिला भारत में कैंप कर रही थीं जब उनके साथ सामूहिक बलात्कार हुआ

हाल ही में मध्य प्रदेश में स्विट्ज़रलैंड से अपने पति के साथ भारत घूमने आई एक महिला के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया.

39 वर्षीय स्विस महिला अपने पति के साथ मध्य प्रदेश के ओरछा से आगरा तक साइकिल से भ्रमण पर निकली थीं.

इसी दौरान रात में उन्होंने दतिया के झाड़िया गांव के पास कैम्प लगाया. लेकिन रात को करीब 9.30 बजे कुछ कबायली पुरुषों ने उनके पति के साथ मार-पीट की, जिसके बाद उन्होंने उन्ही के सामने उनकी पत्नी के साथ दुष्कर्म किया.

इस मामले में पुलिस ने छह लोगों को गिरफ्तार किया है. इस बीच पीड़िता और उनके पति को दिल्ली में स्विस दूतावास में बुला लिया गया है और वे जांच में पुलिस का पूरा साथ दे रहे हैं.

फरवरी 2013: दक्षिण कोरियाई महिला मध्य-प्रदेश में हुई शिकार

गत फरवरी में मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व में घूमने गई एक दक्षिण कोरियाई महिला के साथ कथित रूप से होटल के एक कर्मचारी ने नशीला पदार्थ खिला कर बलात्कार किया.

इस महिला ने पुलिस को बताया कि वे शेर की सफारी पर निकली थीं और होटल का कर्मचारी उनके साथ सफारी पर मौजूद था. होटल के कर्मचारी ने उन्हें बीयर पिलाई जिसमें कथित तौर पर नशीला पदार्थ मिला हुआ था.

जब ये सैलानी होटल में अपने कमरे में पहुंची तो वे बेहोश सी हालत में सो गईं. लेकिन जब वे उठी, तो उन्होंने पाया कि होटल का कर्मचारी उनके ऊपर लेटा हुआ था.

इस हादसे के बाद ये महिला इतनी घबरा गईं, कि वे उसी इलाके में पुलिस को शिकायत दर्ज करवाने की हिम्मत नहीं जुटा पाईं. एक हफ्ते बाद उन्होंने औरंगाबाद के पुलिस थाने में शिकायत दर्ज की जिसके बाद कोरियाई दूतावास ने उनकी मदद की.

इस मामले में दोषी लड़का पुलिस की गिरफ्त में है और कानूनी कार्रवाई जारी है.

जनवरी 2013: चीनी युवती के साथ दिल्ली में बलात्कार

Image caption रॉयटर्स के मुताबिक भारत में हर बीस मिनट में एक बलात्कार होता है

गत जनवरी में चीन की एक 23-वर्षीय कामकाजी युवती ने आरोप लगाया कि पार्टी आयोजित करने वाले एक कर्मचारी ने उनके साथ बलात्कार किया.

हालांकि उन्होंने बलात्कार की शिकायत उसी रात के बजाय अगले दिन पुलिस थाने में लिखवाई.

इस घटना के बाद चीन के इंटरनेट सर्किल में भारत के बारे में बहुत बुरा-भला लिखा गया.

"चुन्शियान" नाम के एक अन्य इंटरनेट यूजर ने लिखा है, “मेरा मानना था कि भारत सुंदर है, लोकतांत्रिक है और मुक्त देश है, लेकिन चलती बस में एक लड़की से बलात्कार के बाद मुझे लगता है कि ये घिनौना देश है.”

इसके अलावा चीनी दूतावास ने भी कड़े शब्दों में अपना रोष व्यक्त किया और भारत से मांग की कि वे पीड़ित महिला को जल्द से जल्द इंसाफ दिलाए.

इस मामले में दिल्ली पुलिस चार्जशीट दाखिल कर चुकी है और मामले की सुनवाई कोर्ट में चल रही है.

जनवरी 2010: गोवा में रूसी बच्ची के साथ बलात्कार

Image caption स्कार्लेट कीलिंग की मां आज भी अपनी बेटी के लिए इंसाफ की लड़ाई लड़ रही हैं.

साल 2010 में गोवा में एक रूसी बच्ची के साथ हुए बलात्कार के बाद वहां के सैलानियों में काफी रोष देखा गया था.

नौ वर्षीय रूसी बच्ची की मां को एक पुरुष ने बातों में उलझाया जिस दौरान उनकी बच्ची के साथ आरंबोल बीच पर ये दुष्कर्म किया जा रहा था.

मामले के बाद रूसी दूतावास ने अपने नागरिकों के लिए सुरक्षा निर्देश जारी किए जिसमें कहा गया कि भारत में घूमते हुए उन्हें खास चौकन्ना रहना चाहिए.

तत्कालीन पर्यटक मंत्री शैलजा कुमारी ने भी इस मामले पर कड़ा बयान दिया था और गोवा पुलिस को सख्ती बरतने की सलाह दी थी.

इस मामले में अभियुक्त को बरी कर दिया गया जिसके बाद बच्ची की मां ने हाई कोर्ट में गुहार लगाई. फिर कुछ दिनों बाद मीडिया में खबरें आईं कि अभियुक्त ने खुद को फांसी लगा कर आत्महत्या कर ली है.

यहां याद दिला दें कि गोवा में ही वर्ष 2008 में 15 वर्षीय स्कार्लेट कीलिंग के साथ हुई बलात्कार की घटना में अभी तक किसी दोषी को नहीं पकड़ा गया है.

इन दोनों ही मामलों में पीड़ितों का पक्ष कोर्ट में रखने वाले वकील विक्रम वर्मा ने बीबीसी को बताया, "विदेशियों के साथ हुए बलात्कारों में ज़्यादातर मामलों में अभियुक्त बरी हो जाते हैं, क्योंकि विदेशी पक्ष के पास इतना समय नहीं होता कि वे बार-बार कोर्ट में सुनवाई के लिए मौजूद रहें. उनके पास सीमित समय के लिए ही वीज़ा होता है, जिसकी अवधि तब तक खत्म हो जाती है, जब तक मामला कोर्ट में दो कदम लेता है. ये भारतीय कानूनी प्रणाली की विडंबना ही कि विदेशी पीड़ितों के लिए चीज़ें आसान बनाने के बजाय उनके लिए चीज़ें और मुश्किल बना दी जाती हैं."

अक्तूबर 2003: स्विस महिला के साथ दिल्ली में चलती गाड़ी में बलात्कार

साल 2003 में दिल्ली में स्थित स्विट्ज़रलैंड के दूतावास में काम करने वाली एक महिला कर्मचारी का बंदूक की नोंक पर सामूहिक बलात्कार किया गया था.

इस मामले ने दिल्ली के प्रशासनिक तबकों में खलबली मचा दी थी और पुलिस की ‘लापरवाही’ एक बार फिर लोगों के गुस्से का निशाना बनी.

ये महिला सिरी फोर्ट ऑडिटोरियम से फिल्म देखकर शाम को अपने घर की ओर निकल रही थीं, जब कुछ पुरुषों ने उन्हें बंदूक की नोंक पर अपनी गाड़ी में खींचा और फिर दिल्ली की हाई-प्रोफाइल इलाकों से गुज़रते हुए उनके साथ बलात्कार किया.

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