मुंबई में धमाके करने वाले पांच दोषी

मुंबई
Image caption टाइगर मेमन और दाऊद इब्राहिम मुंबई धमाकों के मुख्य अभियुक्त हैं जो पुलिस की गिरफ्त से अभी बाहर हैं.

1993 में मुंबई में एक ही दिन हुए 13 बम धमाकों में 257 लोग मारे गए थे और 700 से ज़्यादा घायल हुए थे.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि तीन भगौड़े टाइगर मेमन, दाऊद इब्राहिम और अनीस इब्राहम इन धमाकों के मुख्य सूत्रधार थे. जेल में बंद याकूब मेमन को सज़ा-ए-मौत बरकरार रखी गई है.

इन लोगों के अलावा भी इन सिलसिलेवार धमाकों को अंजाम देनेवालों में कुछ अहम् नाम हैं. हालांकि अदालत ने इनके प्रति नरमी बरतते हुए उनकी फांसी की सज़ा को उम्र कैद में बदला है.

इन लोगों ने कैसे बनाई इन धमाकों की योजना?

टाइगर मेमन

टाइगर मेमन और दाऊद इब्राहिम मुंबई धमाकों के मुख्य अभियुक्त हैं जो पुलिस की गिरफ्त से अभी बाहर हैं.

इस मामले की जांच कर रही सीबीआई और मुंबई पुलिस के मुताबिक मेमन ही वो व्यक्ति है जिसने धमाकों में इस्तेमाल किए गए हैंड ग्रेनेट, डेटोनेटर और विस्फोटक पदार्थों को भारत में पहुंचाया.

जांच में यह भी सामने आया कि टाइगर मेमन ही वो शख्स है जिसमें दाऊद इब्राहिम के साथ मिल कर फरवरी और मार्च 1993 के बीच कई लोगों को हथियार चलाने, बम और रॉकेट लॉंचर चलाने की ट्रेनिंग लेने के लिए पाकिस्तान भेजा था.

इनमें फारुक़ मुहम्मद, शाहनवाज़ अबदुल कादर कुरैशी, ज़ाकिर हुसैन नूर मोहम्मद शेख, अब्दुल खान, अकरम अमानी मलिक सहित कई लोग शामिल थे जो बाद में मुंबई के धमाकों में अभियुक्त भी थे.

इसके बाद मार्च 1993 में टाईगर मेमन ने कई लोगों को सधेरी औऱ बोरघट में भी ट्रेनिंग कराई.

11 मार्च 1993 को टाइगर के घर पर ही वाहनों में आरडीएक्स लदा गया था जिन्हें अलग अलग जगह पर पार्क किया गया और धमाकों को अंजाम दिया गया.

अब्दुल गनी तुर्क

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक 51 वर्षीय अब्दुल गनी तुर्क जानता था कि टाइगर एक तस्कर था, लेकिन तब भी वे उसके साथ था और हवाला के पैसे लाने का काम करता था.

उनकी उपस्थिति में टाइगर ने संधेरी में हाथ ग्रेनेड और हथियारों का प्रशिक्षण दिया.

वे धमाकों के सह-अभियुक्तों के साथ मुंबई गए जहां उन्होंने माहिम स्लोप पर छोड़ा. जीप शहनाज होटल में खड़ी की गई और जीप की चाबी टाइगर के माता पिता को दी गई.

वो होटल में सूटकेसों के रखे जाने और सह-अभियुक्तों के इनमें आरडीएक्स के भरने के बारे में जानता था.

वह जानता था कि इस मारुति वैन का इस्तेमाल होटल में आरडीएक्स रखने के लिए किया गया था.

उसने अन्य सह-आरोपियों के साथ वाहनों में आरडीएक्स भरने में भाग लिया.

वो अपने निवास पर शफी के साथ गया और वे दो नए स्कूटर अल-हुसैनी इमारत में ले कर गए.

उन्होंने पासपोर्ट कार्यालय में आरडीएक्स से लदी कमांडर जीप रखी. उन्हें रसायनों और हथियारों की तस्करी के बारे में भी जानकारी थी.

तुर्क की फांसी की सज़ा को उम्र कैद में तबदील कर दिया गया है.

फारुक़ पावले

फारुक़ पावले (40) माहिम की पमकर चॉल की बाल्मिया लेन में रहता था और अनीस ट्रेवल्स, माहिम में एक वाहन चालक का काम करता था.

उन्होंने बयान दिया कि वह एक अन्य अभियुक्त जावेद चिकना को जानता था जो माहिम का निवासी था और जिसने एक हत्या भी की है.

उसने मुन्ना, अनवर और अन्य सह-अभियुक्तों के साथ मिल कर भाई यानी @ टाइगर मेमन की 84 बैग की लैंडिंग में मदद की.

उसने बताया कि वहां अंधेरा था और माचिस भी चलाने की इजाजत नहीं थी जिससे पता चलता है कि बैग में विस्फोटक सामग्री रखी थी और वे किसी तरह का जोखिम नहीं उठाना चाहते थे.

धमाके वाले दिन एक उस्मान उसे एक मारुति 800 कार में सेना भवन जंक्शन ले कर गया जहां उस्मान ने पेट्रोल पम्प के पास कार खड़ी की. शाम को उसने एक अभियुक्त बशीर से कहा कि उसने एयर इंडिया बिल्डिंग के पास गाड़ी पार्क कर दी है जिससे वहां विस्फोट हुआ.

14 मार्च को एक रफीक की सलाह पर वह मुंब्रा में सिराज़ सलूनवाला के यहां चला गया जहां वो सात दिन तक रुके थे और उसके बाद दो दिनों के लिए कलवा में अपने रिश्तेदार ताऊजी अहमद के पास गए और फिर उरान जहां उसके रिश्तेदार फूसा कुंबी के निवास से उसे गिरफ्तार किया गया था.

तुर्क की तरह पावले की फांसी की सज़ा को उम्र कैद में तबदील कर दिया गया है.

मोहम्मद शोएब मोहम्मद कसम घंसर

शोएब मोहम्मद कसम घंसर (43) ने ज़ावेरी बाज़ार में बम रखा था जिसमें 17 लोगों की मौत हुई थी और 17 लोग घायल हुए थे.

एक बयान के मुताबिक घंसर, असगर युसूफ मुकदम और परवेज़ नाज़िर अहमद शेख के साथ मिल कर अल-हुसाईनी इमारत के गराज से तीन बैग लिए और वे अनवर थीबा के घर गए.

अनवर ने बैग में पेंसिल डेटोनेटर डाला तो एक और लड़के को इस बैग को होटल सेंटौर जा कर बैग रखने को कहा गया.

फिर असगर के कहने पर घंसर ने विस्फोटों से लदा स्कूटर जॉवेरी बाज़ार में पार्क कर दिया.

घंसर की फांसी की सज़ा को उम्र कैद में बदला गया है.

परवेज़ नाज़िर अहमद शेख

परवेज़ नाज़िर अहमद शेख (40) ने होटल सी रॉक में बम रखा जिससे तीन बज कर 10 मिनट पर धमाका हुआ. इन्होंने आरडीएक्स से लदा स्कूटर कता बाज़ार में भी रखा था.

खुद शेख ने अपने बयान में बताया कि असगर और घंसर के साथ वे पहले अनवर के घर गए जहां उन्हें एक घुंघराले वालों वाला एक लड़का मिला जिसका नाम मुशताक था.

मुशताक और अनवर कार में बैठे. अनवर ने बैग खोले और उनमें पेंसिल डेटोनेटर डाले जो उसके पास रखे थे.

फिर उन्होंने सी रॉक होटल में बम रखे और अल-हुसाईनी इमारत में चले गए.

शेख की फांसी की सज़ा को उम्र कैद में तबदील कर दिया गया है.

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