दिल्ली के बाहर कितनी सुरक्षित हैं महिलाएँ?

  • 23 मार्च 2013
विरोध-प्रदर्शन
Image caption महिलाओं के खिलाफ अपराध को लेकर एक विधेयक को लोकसभा ने पास किया है.

नई दिल्ली में 23 साल की एक छात्रा के साथ हुए सामूहिक बलात्कार और उसकी मौत के बाद भारत में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई गई.

विरोध-प्रदर्शनों को देखते हुए सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जेएस वर्मा की अध्यक्षता में तीन सदस्सीय आयोग का गठन भी किया था.

दिल्ली की इस घटना से कुछ दिन पहले नवंबर के दूसरे हफ्ते में पुडुचेरी निवासी कंप्यूटर प्रोग्रामर विनोदिनी पर एक युवक ने तेजाब से हमला किया था. इस युवक के प्रेम प्रस्ताव को विनोदिनी ने ठुकरा दिया था.

इसके कुछ हफ्ते बाद चेन्नई में विद्या नाम की एक युवती पर भी तेजाब से हमला किया गया.

जन जागरुकता

इन दोनों घटनाओं का लोगों ने काफी विरोध किया. पुलिस ने इन घटनाओं के दोषियों को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया गया. इनके समर्थन में बहुत से लोग सामने आए. लेकिन दुर्भाग्य से दोनों लड़कियों की मौत हो गई.

विनोदिनी की मौत से कुछ दिन पहले उसके चाचा सुरेश ने बीबीसी से कहा था कि लोगों की प्रतिक्रिया और पुलिस की कार्रवाई से उनका हौसला बढ़ा है. उन्होंने कहा, "केंद्र और पुडुचेरी सरकार ने उनकी बहुत मदद की. काराइकल पुलिस (जहां यह वारदात हुई) ने भी बहुत मदद की. ख़ासकर तब जब हमने उस लड़के के खिलाफ़ मुकदमा दर्ज कराया और उसे चेतावनी दी. पुलिस ने मुकदमे के लिए वह सब कुछ किया, जो वे कर सकती थी. समाज में अच्छी प्रतिक्रिया हुई."

उन्होंने कहा कि तेजाब से होने वाले हमले से लोग डरे हुए हैं. तेजाब एक भयानक हथियार है. यह पीड़ित के शरीर और मन पर जीवन भर के लिए निशान छोड़ जाता है.

एक अंतरराष्ट्रीय संगठन के लिए काम करने वाली जॉय कहती हैं,''तेजाब के हमले से होने वाली विकृति स्थाई होती है. पीड़ित के सामान्य अवस्था में आने के बाद भी कई तरह से विकलांग होता है, ख़ासकर चेहरे को हुए नुक़सान को लेकर. उन्हें नौकरी भी नहीं मिलती है. उन्हें समाज भी मान्यता नहीं देता है. उनके साथ लोगों का व्यवहार ठीक नहीं होता है. उन्हें किनारे लगा दिया जाता है. उन्हें अपने माता-पिता पर निर्भर रहना पड़ता है. लेकिन माता-पिता की मौत के बाद उनकी देखभाल कौन करेगा.''

इन घटनाओं को देखते हुए तमिलनाडु सरकार ने कहा है कि वह तेजाब की बिक्री से जुड़े क़ानून को वह और कड़ा करेगी.

दिल्ली की घटना के एक हफ़्ते बाद पुडुचेरी में एक स्कूली छात्रा का अपहरण कर हुए सामूहिक बलात्कार की घटना का बड़े पैमाने पर विरोध हुआ.

महिलाओं की सुरक्षा

मानवाधिकार कार्यकर्ता प्रोफ़ेसर प्रभा कलविमानी कहती है, ''इससे लगता है कि सरकार हमारी जरा भी फिक्र नहीं करती है. महिलाओं की कोई सुरक्षा नहीं है. हमारे माता-पिता हमें स्कूल-कॉलेज भेजने के लिए संघर्ष करते हैं, ऐसे में इस तरह की घटनाएं उन्हें परेशान करती है. अब तो बस में यात्रा करना भी खतरनाक हो गया है.''

Image caption महिलाओं की सुरक्षा के लिए तमिलनाडु ने महिला पुलिस थाने खोले हैं.

वह कहती हैं कि पुलिस, यहां तक की न्यायपालिका में भी गरीबों और दलितों के प्रति पक्षपात होता है,. लेकिन दिल्ली की घटना के बाद से चीजों में सकारात्मक सुधार हो रहा है.

नई दिल्ली की घटना के बाद तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता ने महिला सुरक्षा और उनके इलाज को लेकर 13 सूत्रीय कार्यक्रम की घोषणा की है. महिलाओं के खिलाफ अपराध के कुछ पुराने मामलों की समीक्षा कर अब उन्हें दोबारा शुरू किया जा रहा है.

कालविमानी के मुताबिक यह सब लोगों के दबाव का परिणाम है. वह इस पर खुशी जताती हैं.

ऑल इंडिया डेमोक्रिट वुमेन एसोसिएशन की सचिव वासुकी कहती हैं कि न्यायपालिका को थोड़ा और प्रभावशाली होना चाहिए, पुलिस को अपना काम और सक्रियता से करना चाहिए.

वासुकी कहती हैं कि पुलिस का समय पर एफ़आईआर दर्ज न करना या समय पर चार्जशीट दाखिल न करना एक बहुत बड़ी चूक है. वहीं अगर पीड़ित का 24 घंटे के भीतर मेडिकल जांच नहीं कराई जाएगी तो महत्वपूर्ण सबूत नष्ट हो जाएंगे. इसलिए उच्च प्रक्रियाओं का पालन किया जाना चाहिए, कानूनों को कड़ाई से लागू करना चाहिए और चूकों से गंभीरता से निपटा जाना जाना चाहिए.

उन्होंने बताया कि वर्मा समिति ने उनके कई सुझावों को स्वीकार किया और सरकार ने भी उन्हें अध्यादेश में शामिल किया.

पुलिस सुधार की जरूरत

तमिलनाडु के एक पूर्व पुलिस अधिकारी नटराजन बताते हैं कि देश के अन्य राज्यों की तुलना में तमिलनाडु में महिलाएं अधिक सुरक्षित हैं. वे बताते हैं कि साल 2010 में तमिलनाडु में बलात्कार के 650 मामले दर्ज हुए. जबकि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में ऐसे मामलों की संख्या दो हज़ार से अधिक थी. दिल्ली में यह आंकड़ा एक हज़ार से अधिक था.

नटराजन ने बताया कि 1991 में ही तमिलनाडु में महिला पुलिस थाने खोले गए, जो एक ऐतिहासिक क़दम था.

उनका कहना था, आज राज्य के हर ज़िले में ऐसे पांच से दस थाने हैं. इनका मुख्य काम महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों की जांच और पीड़ितों की सहायता करना है. यह भी प्रयास किया जाता है कि सामान्य पुलिस थाने में भी एक वरिष्ठ महिला पुलिस अधिकारी और एक महिला सिपाही जरूर हो.

महिलाओं की सुरक्षा के लिए नटराजन पुलिस बल में कम से कम 25 फ़ीसदी महिलाओं की भर्ती की वकालत करते हैं.

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की विधायक बालाभारती कहती हैं कि पुरुषवादी मानसिकता को खत्म किया जाना चाहिए. वे कहती हैं कि पुरुष महिलाओं को कभी भी बराबरी का दर्जा नहीं देते.

वहीं पेशे से वकील आली कहते हैं कि यह ज़रूरी है कि बच्चों को महिलाओं की इज्जत करने की शिक्षा दी जाए. इसकी शुरुआत परिवार से ही होनी चाहिए.

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