आख़िर कौन हैं सैयद लियाक़त अली?

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Image caption लियाकत अली की गिरफ्तारी के मामले में दिल्ली पुलिस सवालों के घेरे में है

होली से पहले दिल्ली में बम धमाकों की साज़िश रचने के आरोप में सैयद लियाक़त अली की गिरफ़्तारी पर दिल्ली पुलिस पर सवाल उठ रहे हैं.

दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को दावा किया था कि लियाक़त की योजना राजधानी में बम धमाके करने की थी लेकिन उसे पहले ही गोरखपुर में गिरफ़्तार कर लिया गया.

लेकिन जम्मू- कश्मीर से आ रही रिपोर्टों से दिल्ली पुलिस के कई दावों पर सवाल खड़े हो गए हैं.

लियाक़त सीमावर्ती कुपवाड़ा ज़िले के हैं.

श्रीनगर से बीबीसी संवाददाता रियाज़ मसरूर के मुताबिक़ लियाक़त के परिजनों का कहना है कि राज्य सरकार ने पूर्व चरमपंथियों की घर वापसी के लिए जो नीति घोषित की थी, उसी के तहत लियाक़त स्वदेश लौट रहे थे.

स्थानीय पुलिस ने भी इस बात की पुष्टि की है कि लियाक़त पाकिस्तान में 15 साल बिताने के बाद घर वापस आ रहे थे.

सरकार की नीति

पाकिस्तान में कई ऐसे पूर्व चरमपंथी हैं जो हिंसा का रास्ता छोड़ चुके है और स्वदेश वापस लौटना चाहते हैं. सरकार ने ऐसे लोगों की घर वापसी और पुनर्वास के लिए नीति बनाई है.

जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिरीक्षक एजी मीर ने कहा, “हम लियाक़त के बारे में केवल इतना जानते हैं कि वह कुपवाड़ा के रहने वाले है और पहले चरमपंथी रह चुके हैं.”

लेकिन पुलिस के सूत्रों ने बीबीसी को बताया कि लियाक़त का नाम उस सूची में शामिल था जिन्हें नेपाल के रास्ते भारत आने की इजाज़त गृह मंत्रालय ने दी थी.

भारत सरकार ने चरमपंथ का रास्ता छोड़ चुके लोगों की स्वदेश वापसी के लिए 2011 में ये नीति बनाई थी ताकि वे इसके लिए नियंत्रण रेखा का इस्तेमाल न करें.

सपने चकनाचूर

लियाक़त के 20 साल के पुत्र शब्बीर अहमद ने बीबीसी से कहा, “सरकारी अधिकारियों ने हमसे संपर्क साधा था और उन्होंने मेरे अब्बा से फ़ोन पर बात की थी. मुझे एक फॉर्म मिला और मेरे पिताजी का नाम उस सूची में शामिल था जो स्वदेश लौटने वाले थे.”

शब्बीर ने ग़रीबी के कारण कुछ साल पहले स्कूल छोड़ दिया था. उन्होंने कहा, “जब मेरे अब्बा ने घर आने का फ़ैसला किया तो मैंने सोचा कि मुझे फिर से स्कूल जाना चाहिए. लेकिन मेरा सपना टूट गया है. ये सबकुछ मज़ाक लगता है. भारत सरकार ने उन्हें पासपोर्ट जारी किया था और उन्हें वतन वापसी की अनुमति दी थी लेकिन बाद में उन्हें गिरफ़्तार कर लिया.”

पुलिस सूत्रों का कहना है कि नेपाल के रास्ते भारत में घुसते समय लियाक़त अकेले नहीं थे.

एक पुलिस अधिकारी ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा कि कुल चार लोग भारत आ रहे थे. बाक़ी तीन लोग उत्तर कश्मीर के बांदीपोरा और बारामूला ज़िले के थे.

रिपोर्टों के मुताबिक़ लियाक़त 1991 में हिज़बुल मुजाहिद्दीन में शामिल हुए और 1993 में सीमा पार चला गए थे.

1994 में वो वापस कश्मीर लौटे और कथित तौर पर अल-बर्क़ के स्वयंभू कमांडर बन गए.

रिपोर्टों के अनुसार जम्मू-कश्मीर के गृह राज्य मंत्री सज्जाद अहमद किचलू ने कहा है कि सरकार ने लियाक़त की गिरफ़्तारी का मुद्दा दिल्ली पुलिस के साथ उठाया है और जवाब का इंतज़ार किया जा रहा है.

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