जिन्होंने अपने बलात्कारियों को मार डाला

  • 4 अप्रैल 2013

आखिर वो स्थिति कब आती है जब प्रताड़ना का शिकार होने वाली महिला अचानक सबकुछ भूलकर अपने हमलावर पर पलटवार बोल देती है और यहाँ तक कि उसकी हत्या करने से भी नहीं सकुचाती?

ऐसी घटनाएँ भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर में हुई हैं जब महिलाओं ने बलात्कारियों से बदला लेने के लिए क़ानून को अपने हाथ में ले लिया.

ऐसी ही एक घटना के कारण अँग्रेज़ी भाषा को एक नया शब्द बॉबीटाइज़ मिल गया क्योंकि 1993 में अमरीका के वर्जीनिया प्रांत में एक महिला ने अपने पति जॉन बॉबिट का लिंग काट लिया था.

उसने अदालत को बताया कि बॉबिट उससे बलात्कार करना चाहता था.

लीजिए पढ़िए भारत में घटी कुछ ऐसी ही घटनाओं का ब्यौरा.

कहानी सुजान देवी की

सुजान देवी ने बलात्कार के बाद आत्महत्या की बात सोची थी लेकिन फिर अपना विचार बदल दिया.

बलात्कार विरोधी क़ानून आज से देश में लागू हो गया है और आज ही के दिन बिहार की सुजान देवी (बदला हुआ नाम) को हत्या के मामले में जेल भेज दिया गया है.

पटना के पास सुइथा गाँव की रहने वाली 45 साल की इस विधवा ने कथित तौर पर अपने बलात्कारी के सिर पर मिट्टी का तेल उड़ेल कर उसे ज़िंदा जला दिया.

अब क़ानून को तय करना है कि दफ़ा 302 यानी हत्या के मुक़द्दमें के तरह उसे क्या सज़ा दी जाए.

ऐसे बहुत सारे क़िस्से आपने पढ़े होंगे जिनमें बलात्कार की शिकार महिलाओं ने हताशा में आत्महत्या कर ली.

पर सुजान देवी अकेली महिला नहीं है जिसने आत्महत्या की बजाए अपने हमलावर की जान ही ले ली.

कहानी रूपम पाठक की

दिल्ली गैंगरेप के बाद महिलाओं के अधिकारों के प्रति जागरूरता बढ़ी है.

रूपम पाठक ने 2011 में बिहार के पूर्णिया इलाक़े में भारतीय जनता पार्टी के विधायक राजकिशोर केसरी के पेट में चाक़ू घोंपकर उनकी हत्या कर डाली.

रूपम पाठक इम्फाल से तबादला लेकर पूर्णिया के एक स्कूल में प्रिंसपिल हो गई थीं.

इस स्कूल का उदघाटन विधायक राजकिशोर केसरी ने ही किया था.

लेकिन आख़िर ऐसा क्या हुआ कि रूपम पाठक ने उनकी हत्या कर दी.

रूपम का आरोप था कि राजकिशोर केसरी 2007 से ही उनके साथ बलात्कार कर रहे थे.

हालाँकि भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने पलट कर रूपम पाठक पर ही आरोप लगाया कि वो केसरी को ब्लैकमेल कर रही थीं और जब इसमें असफल हो गईं तो उन्होंने् केसरी की हत्या कर दी.

सीबीआई की अदालत ने रूपम पाठक को पिछले साल उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई थी, पर इस साल जनवरी में उन्हें ज़मानत दे दी गई.

नागपुर की महिलाओं का बदला

बलात्कार पीड़िताओं को मानसिक आघात के साथ साथ सामाजिक आघात भी झेलना पड़ता है.

नागपुर के कस्तूरबा नगर में अक्कू यादव नाम के एक इलाक़ाई दबंग से परेशान होकर स्थानीय महिलाओं ने 13 अगस्त 2004 को वो क़दम उठा लिया जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी.

अक्कू यादव अपराधी छवि का आदमी था और उस पर महिलाओं से छेड़खानी करने और उनपर यौन आक्रमण करने के कई आरोप थे.

स्थानीय वकील योगेश मंडके के मुताबिक़ अक्कू यादव ने उनके एक रिश्तेदार का अपहरण करने की कोशिश की जिस पर स्थानीय महिलाएँ भड़क उठीं.

पुलिस पर आरोप था कि वो अक्कू यादव के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने से बचती थी, इसलिए इस घटना के बाद स्थानीय महिलाओं का ग़ुस्सा और बढ़ गया.

इस असंतोष को देखते हुए पुलिस ने अक्कू यादव को गिरफ़्तार कर लिया.

जब उसे स्थानीय अदालत में पेश किया जाने वाला था, तभी महिलाओं का एक उग्र समूह वहाँ पहुँच गया.

उन्होंने पुलिस हिरासत में ही अक्कू यादव को खींच लिया और उसे पीट पीट कर मार डाला.

स्थानीय अदालत में अब भी पाँच महिलाओं के खिलाफ़ हत्या का मुकद्दमा चल रहा है.

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