इतालवी नौसैनिक मामला: राजदूत पर प्रतिबंध उठा

Image caption इटली के राजदूत डेनियल मंचिनी

भारत की सुप्रीम कोर्ट ने इटली के राजदूत डेनियल मंचिनि के देश छोड़ने पर लगाया प्रतिबंध वापस ले दिया है.

दो भारतीय मछुआरों की हत्या के मामले में लेकर हुए विवाद के बाद राजदूत के भारत छोड़ने पर रोक लगा दी गई थी.

कोर्ट ने यह रोक तब लगाई जब इटली की सरकार ने दोनों नौसैनिकों को सुनवाई के लिए भारत भेजने से इनकार कर दिया था.

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मसीमिलियानो लातोर और सलवाटोर गिरोन को इटली के चुनाव में भाग लेने के लिए कोर्ट ने फरवरी में घर जाने की इजाज़त दी थी.

दोनों को चार हफ़्ते में सुनवाई के लिए भारत लौट आना था.

निजी आश्वासन

राजदूत मंचिनि ने सुप्रीम कोर्ट को निजी तौर पर आश्वस्त किया था कि दोनों लौट आएंगे.

इटली सरकार ने दोनों नौसैनिकों को वापस भेजने से इनकार किया तो कोर्ट ने मंचिनि के भारत छोड़ने पर रोक लगा दी.

इस मामले पर भारत सरकार के कड़े रुख के बाद दोनों देशों के बीच काफ़ी तनाव हो गया था.

कूटनीतिक खींचतान के बाद 22 मार्च को इटली के उप विदेश मंत्री स्टीफ़न दे मिस्तूरा इटली की सेना के एक विमान से दोनों सैनिकों को लेकर भारत पहुंचे.

इटली सरकार का दावा है कि उसे अपने सैनिकों के मानवाधिकारों की सुरक्षा का आश्वासन दिया गया है.

दोनों नौसैनिकों पर फरवरी, 2012 में केरल तट के पास दो भारतीय मछुआरों की हत्या का आरोप है.

एक इतालवी तेल टैंकर की सुरक्षा में तैनात इन नौसैनिकों का कहना है कि उन्होंने मछुआरों को ग़लती से समुद्री डाकू समझ लिया था.

इटली इस बार पर ज़ोर देता रहा है कि यह घटना अंतरराष्ट्रीय सीमा में हुई थी इसलिए नौसैनिकों पर इटली में मुक़दमा चलाया जाना चाहिए।

लेकिन भारत का कहना है कि भारतीय नाव पर सवार भारतीय मछुआरों की हत्या की गई है इसलिए यह मामला भारत के क्षेत्राधिकार का है.

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को नौसैनिकों के मामले की सुनवाई के लिए विशेष अदालत स्थापित करने को कहा है.

कोर्ट इस मामले की सुनवाई 16 अप्रैल को करेगा.

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