'शहरों में महंगाई का रोना, गांव में फसल नहीं सोना'

बीबीसी हिंदी का लाइव चैट
Image caption अहलूवालिया और पित्रोदा ने दिए सवालों के जवाब

कोड राइटर्स, डिजाइनर्स और फ़िल्ममेकर्स भारत सरकार द्वारा समर्थित देश के पहले ‘हैकाथोन’ में हिस्सा लेने के लिए तैयार हैं जिसका मकसद भारत की पंचवर्षीय योजना के बारे में लोगों को जानकारी देना है.

छह अप्रैल को 11 शहरों में होने वाले इस आयोजन से पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के सलाहकार सैम पित्रोदा और योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने ट्विटर पर लाइव चैट में लोगों के सवालों के जवाब दिए.

जहां भ्रष्टाचार के बारे में जानकारी देने वालों की सुरक्षा का मुद्दा उठा, वहीं ये भी पूछा गया कि सरकार लोगों से मिलने वाले टैक्स का आखिर क्या करती है.

बीबीसी हिंदी के पाठक नरेंद्र कुमार बिश्नोई के अनुसार वो गांव में रहते हैं और खेती बाड़ी करते हैं. उन्होंने पूछा कि सरकार उन्हें उनकी फसल का उचित मूल्य भी क्यों नहीं दिला पा रही है.

इस पर अहलूवालिया ने कहा कि इस बारे में संतुलन बनाना होता है. उन्होंने कहा, “हम हर संभव उपाय कर रहे हैं कि किसानों को उनकी फसल का अच्छा मूल्य मिले लेकिन शहरों में लोग खाद्य पदार्थं की मंहगाई का रोना रो रहे हैं तो हमें संतुलन करना पड़ता है.”

सब्सिडी को लेकर अर्चना गौतम के जवाब में उन्होंने कहा, “हम सब्सिडी बहुत सोच समझ कर देते हैं ताकि ज़रूरतमंद को ही सब्सिडी मिले इसलिए हमेशा इस पर इतनी बहस होती है.”

सवालों की बौछार

प्रतिभा पलायन के मुद्दे पर कुलदीप मिश्र के सवाल पर सैम पित्रोदा ने कहा, “जो बाहर जाना चाहे वो बाहर जाएं. हम ब्रेन ड्रेन से परेशान नहीं है. ब्रेन चेंज होना चाहिए.”

हालांकि बीबीसी हिंदी के पाठक कुमार संदीप ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा, “मैं इस जवाब से संतुष्ट नहीं हूँ कि सरकार ब्रेन ड्रैन से परेशान नहीं है.....फिर सरकार आईआईटी और आईआईएम जैसे संस्थानों पर इतना ध्यान क्यों देती है जब वो अपने देश के काम ही नहीं आते???”

बीबीसी हिंदी के ट्विटर पन्ने पर एक सवाल आया, “हमारे टैक्स कहां जाते हैं?”

इस मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने जवाब दिया, “टैक्स के जरिए योजना आयोग का बजट बनता है जो विभिन्न मंत्रालयों को खर्च के लिए जाता है.”

सरकार के इन नीति निर्माताओं से ये भी पूछा गया कि वो भ्रष्टाचार की जानकारी देने वालों को कैसे बचाएंगे.

इसके जवाब में अहलूवालिया ने कहा, “हमने कानूनी प्रोटेक्शन दी है भ्रष्टाचार की जानकारी देने वालों को. ये पहली बार हुआ है. हमें सुनिश्चित करना है इसे प्रभावशाली तरीके से लागू करना.”

भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के बारे में सैम पित्रोदा ने कहा, “सरकार ने आरटीआई का प्रावधान किया है. लोकपाल बिल भी है जो एक बड़ा कदम है भ्रष्टाचार रोकने का. पब्लिक सर्विस डिलीवरी बिल भी है सरकारी कर्मचारियों का भ्रष्टाचार रोकने का.”

योजनाओं का लेखा जोखा

Image caption सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर पर सवाल

प्रमोद शर्मा के सवाल के जवाब में अहलूवालिया और पित्रोदा ने कहा, “नीतियों को लागू करने के लिए इस बार हमारे पास बेहतर टूल्स हैं. नई योजना में योजनाओं को मैनेज, मॉनीटर और लागू करने में सॉफ्टवेयर, मैनेजमेंट टूल्स, इंटरनेट, स्कैन इन सुविधाओं का उपयोग बेहतर हो सकता है”

सवर्ण सैनी ने पूछा कि सरकारी स्कूलों के लिए योजना आयोग इतना पैसा लगाता है लेकिन फिर भी वहां पढ़ाई का स्तर अच्छा नहीं हुआ है, अहलूवालिया जी इसका क्या करना है.

जवाब में योजना आयोग के उपाध्यक्ष ने कहा, “प्राइमरी स्कूल के मामले में निजी स्कूलों में जवाबदेही अधिक है और वो इसे लागू करते हैं. ऐसा सरकारी स्कूलों में कम होता है. ये कठिन सवाल है.”

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने अल्पसंख्यकों के लिए 15 सूत्री कार्यक्रम की घोषणा की है जो 12वीं योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसके तहत अल्पसंख्यकों वाले जिलों में शिक्षा, दक्षता विकास, आधारभूत ढांचे के विकास का कार्यक्रम शामिल हैं. साथ ही स्वास्थ्य व्यवस्था भी बेहतर की जानी है.

अहलूवालिया ने बताया कि 80 नक्सल प्रभावित जिलों में एक विशेष कार्यक्रम चल रहा है जिसके ज़रिए वहां विकास के काम हो रहे हैं.

बीबीसी के पाठकों ने खूब सवाल पूछे, हालांकि सभी को ले पाना संभव नहीं था.

नरेंद्र कुमार बिश्नोई ने कहा, “बीबीसी हिदी, यहां पर हमारी समस्याएं तो हल नहीं हो सकती लेकिन आपने हमारे सवालों के जवाब दिए, हम इसके लिए बहुत बहुत आभारी है. भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम करते रहें.”

संबंधित समाचार