काज़ीरंगा में गैंडों की हिफाज़त करेगा ड्रोन

ड्रोन
Image caption ड्रोन को कुछ घंटों की उड़ान के बाद चार्ज करना होगा.

असम के काज़ीरंगा राष्ट्रीय वन उद्यान ने गैंडो के शिकार को रोकने के लिए मानव रहित विमानों या ड्रोन का इस्तेमाल शुरू किया है.

वन उद्यान के प्रमुख एनके वासु ड्रोन के इस्तेमाल को जंगली जानवरों की सुरक्षा में उठाया गया एक अहम पड़ाव बताया.

उद्यान के लिए इस्तेमाल हो रहे ड्रोन ने अपनी पहली उड़ान सोमवार को भरी.

एनके वासु का कहना था, "ये अवैध शिकारियों से लड़ने में हमारी मदद करेगा जो बहुत अधिक संगठित हैं."

दोहरी निगरानी

दुनिया के दो तिहाई गैंडे काज़ीरंगा में पाए जाते हैं. उसके अलावा वहां हाथियों, बाघ और दूसरे जंगली जानवरों का भी बसेरा है.

असम के वन मंत्री रकीबुल हुसैन ने कहा है कि भारत में वन जीवन की रक्षा के लिए ड्रोन का प्रयोग पहली बार हो रहा है.

रकीबुल हुसैन का कहना था कि ज़मीन और आकाश से साथ-साथ होने वाली निगरानी की वजह से अवैध शिकारी कुछ गड़बड़ करने की हिम्मत नहीं करेंगे.

मंत्री का कहना था कि हालांकि वन उद्यान के सुरक्षा गार्ड बहुत अच्छे हैं लेकिन वो इतने बड़े जंगल का गश्त नहीं लगा सकते. अब वो सीधे वहीं पहुंचेगे जहां उनकी ज़रूरत होगी.

उन्होंने कहा कि अब 430 वर्ग किलोमीटर में फैले जंगल के चप्पे-चप्पे पर निगरानी रखी जा सकेगी.

कैमरे से तस्वीरें-वीडियो

Image caption पिछले ढेढ़ साल में 35 से ज्यादा गैंडों की हत्या की जा चुकीहै

ये ड्रोन इतना हल्का है कि इसे हाथ से ही लांच किया जा सकता है.

और इसमें लगे वीडियो और दूसरा कैमरा आकाश से नीचे की सभी तस्वीरें लेता रह सकता है.

ड्रोन दो सौ मीटर की ऊंचाई पर प्रोग्राम किए गए रूट के हिसाब से 90 मिनट तक चक्कर लगा सकता है. इसके बाद इसकी बैट्री चार्ज करने की ज़रूरत होगी.

शिकारियों ने पिछले साल एक सींगों वाले 22 गैंडो की हत्या कर दी थी. इस साल के पहले तीन माह में ही 16 ऐसे जानवर मारे जा चुके हैं.

पिछले साल वन उद्यान में हुई गिनती के मुताबिक़ वहां 2,329 गैंडे हैं, जो पिछले यानी साल 2012 में मौजूद 2290 की संख्या से थोड़ा अधिक है.

गैंडो को उनके सींगों के लिए मारा जाता है और इससे 30 लाख डॉलर तक की आमदनी हो सकती है.

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