चुनाव के नतीजों पर ट्विटर-फेसबुक का असर?

Image caption लोकसभा की लगभग 160 सीटों पर सोशल मीडिया का असर दिखाई दे सकता है.

सवाल है कि क्या अगले आम चुनाव में फेसबुक और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया के मंच का इस्तेमाल करने वाले लोग नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं?

एक नए अध्ययन में इसी सवाल का जवाब खोजा गया है.

आयरिश नॉलेज फाउंडेशन एंड इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने इस पर एक शोध किया है और कहा है कि 2014 में होने वाले में आम चुनाव में लोकसभा की लगभग 160 सीटों पर इसका असर दिखाई दे सकता है.

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सर्वाधिक प्रभाव वाली सीटें

अध्ययन में सबसे सर्वाधिक प्रभाव वाली सीटों की पहचान की गई है.

सबसे अधिक प्रभाव वाली सीटों का तात्पर्य उन सीटों से है, जहां पिछले लोकसभा चुनाव में विजयी उम्मीदवार के जीत का अंतर फेसबुक का प्रयोग करने वालों से कम है अथवा जिन सीटों पर फेसबुक का प्रयोग करने वालों की संख्या कुल मतदाताओं की संख्या का 10 प्रतिशत है.

अध्ययन में 67 सीटों की 'अत्यधिक प्रभाव वाली', जबकि शेष सीटों की 'कम प्रभाव वाली' सीटों के रूप में पहचान की गई है.

अध्ययन के मुताबिक लोकसभा की कुल 543 में से 160 सीटों पर सोशल मीडिया का खासा असर देखने को मिल सकता है. महाराष्ट्र में इसका सबसे ज्यादा असर पडऩे की संभावना है. यहां की 21 सीटों पर सोशल मीडिया का असर पड़ सकता है.

महाराष्ट्र और गुजरात आगे

जबकि गुजरात में 17 सीटें सोशल मीडिया से प्रभावित हो सकती हैं. इसी तरह उत्तर प्रदेश में 14, कर्नाटक की 12, तमिलनाडु की 12, आंध्र प्रदेश की 11, केरल की 10 और मध्य प्रदेश की 9 सीटों पर इसका असर देखने को मिल सकता है.

ये वो लोकसभा सीटें हैं जहां लोग सोशल नेटवर्किंग साइट का इस्तेमाल सबसे ज्यादा करते हैं. इन निर्वाचन क्षेत्रों में कुल मतदाताओं के दस फीसदी से ज्यादा लोग फेसबुक से जुड़े हुए हैं.

सर्वेक्षण के मुताबिक फेसबुक से जुड़े लोग चुनाव से पहले अपने आसपास के वोटरों को प्रभावित कर सकते हैं.

अध्ययन का ये भी कहना हैं कि चुनाव से 48 घंटे पहले उम्मीदवारों के चुनाव प्रचार पर रोक लगने के बाद फेसबुक, ट्विटर जैसी सोशल मीडिया चुनाव प्रचार की कमान संभाल लेंगे.

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