असुरक्षित गर्भपात से हज़ारों महिलाओं की मौत

भारत, अस्पताल
Image caption अस्पतालों में गर्भपात से जुड़ी सुविधाओं को लेकर चिंता जताई जाती रही हैं.

आयरलैंड में पिछले साल गर्भपात कराने की इजाजत न मिलने की वजह से एक भारतीय मूल की गर्भवती महिला की मौत हो गई थी.

भारत में इस मुद्दे पर काफ़ी गुस्से का माहौल बन गया था.

बीबीसी ने भारत में गर्भपात से जुड़ी परिस्थितियों की पड़ताल करने के बाद पाया कि गर्भपात को लेकर भारत में हालात अच्छे नहीं हैं. असुरक्षित गर्भपात की वजह से हर साल देश में बड़ी तादाद में महिलाओं की मौत हो जाती है.

महाराष्ट्र के जलगांव शहर में एक छोटे से क्लिनिक के भीतर एक डॉक्टर और उसके मेडिकल स्टाफ एक युवती को दिलासा दे रहे हैं.

उस युवती को वहां आए हुए ज़्यादा वक्त नहीं हुआ था. वह साफ तौर पर तनाव और अवसाद में लग रही थी.

हमें बताया गया कि 22 वर्षीय उस युवती का उसके ही गांव में बलात्कार किया गया था.

अब वह पांच महीने के गर्भ से थी और अपने अजन्मे बच्चे को गिराने के लिए बेचैन थी. यह भारतीय कानूनों के तहत पूरी तरह से वैध है.

लेकिन इसके लिए उस युवती ने जितने भी डॉक्टरों से संपर्क किया था, लगभग सभी ने उसकी मदद करने से इनकार कर दिया.

अपने घर से 90 किलोमीटर का फ़ासला तय करके वह युवती इस क्लिनिक तक पहुंची थी.

परिवार की शर्मिंदगी

उसने अपनी तकलीफ कुछ यूं बयान किया, “गांव में अपनी हालत के बारे में खुलेआम कुछ कहने से मैं डर रही थी. यह सब पता लगने पर मेरे परिवार की बहुत बदनामी होगी और कोई मुझसे शादी नहीं करना चाहेगा.”

डॉक्टर उदय सिंह पाटिल इस क्लिनिक में स्त्रीरोग विशेषज्ञ हैं.

उन्होंने बताया, “कई युवतियां योग्य डॉक्टर के पास नहीं पहुंच पाती या कई बार डॉक्टर भी गर्भपात कराने से इनकार कर देते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि ऐसा करने से वे मुश्किल में पड़ जाएंगे. मैंने ऐसी कई युवतियों का इलाज किया है.”

Image caption गर्भपात को लेकर डॉक्टरों के बीच भी कई तरह की भ्रांतियां हैं.

डॉक्टर पाटिल कहते हैं, “इनमें से कई महिलाओं को मजबूरन झोलाछाप डॉक्टरों के पास जाना पड़ता है और जब तक वे मेरे पास पहुंच पाती हैं तब तक अक्सर उनकी हालत बिगड़ जाती है.”

सामाजिक परेशानियां

उन्होंने बताया, “कई बार सदमे की वजह से उन्हें बहुत रक्तस्राव होने लगता है. कभी-कभी उन्हें गंभीर किस्म का संक्रमण हो जाता. नतीजतन उनके बचने की संभावना पर भी कई बार सवाल खड़े हो जाते हैं.”

भारत में हर दो घंटे में एक महिला की मौत सिर्फ इसलिए हो जाती है कि गर्भपात के दौरान कुछ बड़ी गलती हो गई होती है.

ग्रामीण इलाकों में तो हालात और भी ख़राब हैं जहां गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सुविधाओं तक लोगों की पहुंच न के बराबर है और गर्भपात से जुड़ी सामाजिक परेशानियां भी हैं.

‘इपास’ एक ऐसी संस्था है जो असुरक्षित गर्भपात से होने वाली मौत के मामलों की रोक-थाम के लिए दुनिया भर में काम करती है.

गर्भपात कानूनी तौर पर वैध

इपास से जुड़े विनोज मैनिंग कहते हैं, “एक सभ्य संस्कृति और समाज के नाते हम गर्भपात के बारे में खुलकर बात नहीं करते हैं. इसलिए जब भी कोई औरत अपना गर्भ गिराना चाहती है तो अक्सर उसे यह तक पता नहीं होता है कि वह इस बारे में किससे बात करे.”

साथ ही इससे जुड़े कानून के बारे में भी जानकारी का अभाव है.

इपास में बतौर प्रशिक्षु काम कर रही डॉक्टर शुभांगी भोंसले कहती हैं, “हमारे डॉक्टरों में से कई लोग तो यह भी नहीं जानते कि भारत में गर्भपात कानूनी तौर पर वैध है.”

यह समस्या इस बात से भी जुड़ जाती है कि भारत में गर्भस्थ शिशु के लिंग का पता लगाने वाली मेडिकल जांच पर प्रतिबंध है.

यह प्रतिबंध इसलिए लगाया गया है कि गर्भ में ही लड़कियों को मार देने के चलन पर रोक-थाम लगाई जा सके.

सुरक्षित गर्भपात

Image caption गर्भपात को लेकर लोगों की मानसिकता बदलने की जरूरत है.

छोटे शहरों या गांवों में प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों को यह गलतफहमी होती है कि अगर वे गर्भपात करवाएंगे तो उन पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है.

नासिक शहर के एक सरकारी अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर के भीतर डॉक्टर वसंत जमधाड़े अपने युवा प्रशिक्षुओं के साथ इससे जुड़ी जटिल प्रक्रिया के बारे में बात कर रहे हैं.

उनके सामने एक ऐसी औरत है जिसका कहीं और असुरक्षित गर्भपात कराया गया था जिसके बाद उसकी हालत बिगड़ गई थी.

वहां मौजूद नर्स उसे दिलासा दे रही हैं और डॉक्टर उनका इलाज कर रहे हैं. प्रशिक्षु डॉक्टर इस पूरी प्रक्रिया को बड़े ध्यान से देख रहे हैं.

इन युवा डॉक्टरों की पढ़ाई और प्रशिक्षण जब पूरी हो जाएगी तो उन्हें गांवों में चल रहे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर काम करने के लिए भेजा जाएगा. इन स्वास्थ्य केंद्रों पर ये डॉक्टर सामान्य और सुरक्षित गर्भपात करा सकेंगे.

कुछ पूर्वाग्रह

लेकिन कुछ ऐसे लोग भी हैं जो यह मानते हैं कि सुरक्षित गर्भपात की प्रक्रिया में सबसे बड़ी चुनौती लोगों का पूर्वाग्रह है.

डॉक्टर भोंसले कहती हैं, “हमें लोगों की मानसिकता बदलने की जरूरत है.”

वह कहती हैं, “यह एक तरह से सामाजिक रूप से निषिद्ध है. हम अपने परिवारों में भी यह नहीं कहते कि हम सुरक्षित गर्भपात को लेकर महिलाओं की मदद करते हैं.”

वापस जलगांव के डॉक्टर पाटिल की क्लिनिक की तरफ लौटते हैं. वहां आई 22 वर्षीय उस युवती का सफलतापूर्वक गर्भपात करा दिया गया है. उसकी हालत में सुधार भी देखा जा रहा था.

वह डॉक्टर पाटिल के क्लिनिक में समय रहते पहुंच गई थी और वक्त पर मिले इलाज की वजह से वह बच गई. अब वह भविष्य में मां भी बन सकेगी.

लेकिन देश भर में ऐसी हजारों लड़कियां हैं जो उनकी तरह खुशनसीब नहीं हैं.

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