'तौर तरीक़ो' में सुधार को तैयार नहीं सासंद

Image caption राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी ने नेताओं से आग्रह किया कि सदन की गरिमा को बनाए रखें

सोमवार से संसद के बजट सत्र का दूसरा हिस्सा शुरू हो रहा है. राज्यसभा के सभापति और उप-राष्ट्रपति हामिद अंसारी ने सत्र शुरू होने से पहले इसके कामकाज को लेकर कुछ प्रस्ताव रखे हैं. लेकिन राजनीतिक दल इन पर सहमत नहीं हो सके.

बजट सत्र का दूसरा हिस्सा शुरू होने के एक दिन पहले रविवार को एक सर्वदलीय बैठक बुलाई गई थी.

बैठक के दौरान हामिद अंसारी ने कहा कि वह सदन में कुछ सदस्यों के व्यवहार को लेकर बहुत दुखी और व्यथित हैं.

संसद की गरिमा

हामिद अंसारी का कहना था, "हाल के दिनों में सदन बार-बार स्थगित होता रहा है. अगर ये जारी रहता है तो प्रजातंत्र के सबसे अहम मंच माने जाने वाले संसद की गरिमा लोगों की निगाह में कम हो जाएगी."

हामिद अंसारी ने कहा कि अगर यही हाल रहा तो लोग संसद की ज़रूरत पर ही सवाल उठाने लगेंगे.

बैठक के दौरान सभापति ने राज्यसभा के नियमों में बदलाव का सुझाव भी दिया.

इनमें गड़बड़ी फैलाने वाले सांसदों की सदस्यता अपने आप निलंबित हो जाने, सभा की कार्यवाही को थोड़े विलंब से प्रसारित करने, और उपद्रवी सदस्यों के नामों को सदन के बुलेटिन में शामिल करने जैसी सिफ़ारिशें शामिल थीं.

हामिद अंसारी खा़सकर 23 मार्च को हुई उस घटना को लेकर बहुत चिंतित हैं जिसमें तमिलनाडू के राजनीतिक दल एआईएडीएमके के कुछ सदस्यों ने सदन में काग़ज़ के टुकड़े उछाले थे, और माईक तोड़ डाले थे.

ये लोग राज्यसभा में श्रीलंका में तमिलों के ख़िलाफ़ हो रहे कथित भेदभाव का मामला उठाना चाहते थे.

समर्थन नहीं मिला

हामिद अंसारी ने सदन को ठीक से चलाने के लिए जो सुझाव दिए थे उनपर राजनीतिक पार्टियां सहमत नहीं हो सकीं.

भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी के नेता डी राजा ने सांसदों को उपद्रवी कहने पर एतराज़ जताया, तो कुछ ने इसे सदस्यों की आवाज़ दबाने जैसा कहा.

लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष रामविलास पासवान हालांकि कुछ सुझावों का समर्थन किया.

लेकिन शिव सेना के प्रवक्ता का कहना था, ''सरकार मीडिया की आवाज़ दबा नहीं सकती. सीधा प्रसारण आप क्यों रोक देंगे. सरकार को ज़िम्मेदारी से सामने आना चाहिए. सरकार को समस्या को हल करना चाहिए. आप विपक्ष को इस प्रकार से ज़जीर से बांधकर नहीं रख सकते.''

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के पोलित ब्यूरो सदस्य सीताराम येचुरी भी प्रसारण के नियमों के ख़िलाफ़ थे.

राज्य सभा में विपक्ष के नेता अरूण जेटली का कहना था कि इससे ये ख़तरा पैदा हो सकता है कि सरकार इसका इस्तेमाल सदस्यों को ख़ामोश कर विधेयकों को पास करवाने या किसी दूसरे कामों के लिए कर सके.

जानकारों का ये भी कहना है कि विपक्ष के सदस्यों को कई बार वाकआउट, अध्यक्ष के आसन के सामने आकर विरोध करना जैसे कामों के लिए इसलिए मजबूर होना पड़ता है क्योंकि उनकी बात सुनने को, या अहम मामलों पर चर्चा के लिए सरकार तैयार नहीं होती है.

बजट सत्र के दूसरे हिस्से में भी राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा, भूमि अधिग्रहण, बीमा क़ानूनों में बदलाव जैसे विधेयकों पर चर्चा होनी है, जिसमें कई पर राजनीतिक दलों में गहरे मतभेद हैं.

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