ऐसा न्यायाधीश, जिसने कभी 'समझौता' नहीं किया.....

जस्टिस जेएस वर्मा

जस्टिस जेएस वर्मा में हर वो खूबी थी जो एक जज में होना चाहिए. वो ईमानदार थे, सख्त थे और उन्होंने कभी समझौता नहीं किया.

रिटायरमेंट के बाद जब सुप्रीम कोर्ट के अन्य पूर्व न्यायाधीश आर्बिट्रेशन कर केवल पैसा कमाने में लगे रहते हैं जस्टिस वर्मा ने अपना काफ़ी समय आम जनता से जुड़े कामों में लगाया.

यूं तो भारत के हर मुख्य न्यायधीश के फ़ैसले भारत की तकदीर को प्रभावित करते हैं लेकिन जस्टिस जेएस वर्मा अपने फ़ैसलों के कारण सर्वश्रेष्ठ न्यायाधीशों की सूची में रखे जा सकते हैं.

( जस्टिस जेएस वर्मा नहीं रहे)

कई अहम फ़ैसले

साल 1991 में सामने आए जैन हवाला कांड से जुड़े मुकदमों में जस्टिस जेएस वर्मा ने सीबीआई और केंद्रीय सतर्कता आयोग पर कई कड़ी टिप्पणियाँ की, जो आगे चल कर पूरे देश में पुलिस सुधारों का कारण बनी.

उनका एक फ़ैसला था जिसने पहले न्यायपालिका की स्वतंत्रता को मज़बूत बनाया लेकिन बाद में वही उसमे खराबी का कारण बनी. जस्टिस जेएस वर्मा के मुख्य न्यायाधीश बनने के पहले भारत में सर्वोच्च अदालतों में नियुक्तियों में राजनीतिक हस्तक्षेप बहुत ज़्यादा रहता था.

उनके फ़ैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों की नियुक्तियों के अधिकार अपने हाथों में ले लिए.

जिस वक़्त उन्होंने वह फ़ैसला लिया था उस वक़्त के लिए यह सही था. लेकिन बाद में अदालतें और जज इस फ़ैसले की आड़ में निरंकुश हो गए और वही सब करने लगे जो राजनेता कर रहे थे.

जस्टिस वर्मा ने को इस बात का बेहद पछतावा था. वो यह मानते थे कि वो समझ ही नहीं पाए कि आने वाले पीढ़ियों के जज इस फ़ैसले का किस तरह दुरुपयोग करेंगे.

लेकिन यह उनकी महानता ही थी कि बाद में उन्होंने ही न्यायपालिका में व्यापक सुधारों के लिए चल रहे अभियान में जम कर शिरकत की और जजों के लिए एक ऐसी नियुक्ति प्रक्रिया की बात की जो अधिक पारदर्शी हो.

कुछ अलग फ़ैसले

लेकिन जस्टिस वर्मा के हर फ़ैसले से मैं सहमत हूँ ऐसा मैं नहीं कह सकता सकता.

मसलन उनका वो फ़ैसला जिसमे उन्होंने कहा था की 'हिंदुत्व' कोई धर्म नहीं है यह एक जीवन जीने का तरीका है.

यह बात उन्होंने बाल ठाकरे के एक विवादित भाषण के संदर्भ में कही थी अगर बाल ठाकरे के भाषण को भड़काऊ ना कहें तो किसको कहें.

लेकिन यही जस्टिस जेएस वर्मा थे जिन्होंने मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने जिस तरह से गुजरात सरकार पर टिपण्णी की वो काबिले तारीफ़ हैं.

(बीबीसी संवाददाता सुशीला सिंह के साथ बातचीत पर आधारित) (ये लेखक की निजी राय है)

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