सीबीआई निदेशक के हलफ़नामे से 'सरकार पर सवाल'

  • 26 अप्रैल 2013
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ अश्वनी कुमार
Image caption विपक्ष अब क़ानून मंत्री अश्वनी कुमार के इस्तीफ़े की माँग कर रहा है

केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) के निदेशक रंजीत सिन्हा ने उच्चतम न्यायालय में कहा है कि कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले के मामले में 'स्टेटस रिपोर्ट का मसौदा क़ानून मंत्री अश्वनी कुमार को दिखाया गया था क्योंकि कुमार ऐसा चाहते थे'.

सिन्हा ने न्यायालय को दो पन्नों के शपथ पत्र में कहा है कि स्टेटस रिपोर्ट प्रधानमंत्री कार्यालय और कोयला मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी देखी थी.

निदेशक का ये शपथ पत्र सीबीआई के वकील के उस दावे से बिल्कुल उलट है जिसमें उन्होंने कहा था कि ये रिपोर्ट सरकार के किसी अधिकारी ने नहीं देखी थी.

इस शपथ पत्र के सामने आने के बाद केंद्र सरकार हरकत में आई है और सत्तारूढ़ संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन के दलों के नेताओं से प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह चर्चा कर रहे हैं.

इधर विपक्ष ने सरकार पर तीखा आक्रमण किया है. भारतीय जनता पार्टी और वाम दलों ने क़ानून मंत्री अश्विनी कुमार को तुरंत हटाने की मांग की है.

भारतीय जनता पार्टी का कहना है कि क़ानून मंत्री ने प्रधानमंत्री को बचाने के लिए सीबीआई पर अपने प्रभाव का दुरुपयोग किया है. इसके साथ ही विपक्ष ने इस मामले में प्रधानमंत्री के इस्तीफ़े की माँग दोहराई है.

वहीं क़ानून मंत्री अश्वनी कुमार ने कहा है, "आख़िर में सच्चाई की जीत होगी."

शपथ पत्र

शपथ पत्र में रंजीत सिन्हा की ओर से कहा गया है, "मैं ये कहना चाहता हूँ कि स्टेटस रिपोर्ट का मसौदा सुप्रीम कोर्ट में दाख़िल करने से पहले क़ानून मंत्री को दिखाया गया था क्योंकि वह उसे देखना चाहते थे."

सिन्हा की ओर से कहा गया है, "ये रिपोर्ट प्रधानमंत्री कार्यालय और कोयला मंत्रालय के संयुक्त सचिव स्तर के एक-एक अधिकारी को भी दिखाई गई थी क्योंकि वे भी उसे देखना चाहते थे."

सीबीआई निदेशक की ओर से सर्वोच्च न्यायालय में दाख़िल इस शपथ पत्र में कहा गया है कि एजेंसी अब अगली कोई स्टेटस रिपोर्ट कार्यपालिका के किसी राजनीतिक सदस्य को नहीं दिखाएगा.

उन्होंने ये भी कहा कि आज (26 अप्रैल) को जो ताज़ा स्टेटस रिपोर्ट दाख़िल की जा रही है वो किसी भी तरह किसी भी राजनीतिक व्यक्ति को नहीं दिखाई गई है.

शपथ पत्र में कहा गया है, "मैं इस बात की पुष्टि करता हूँ कि कोर्ट में दाख़िल की जा रही मौजूदा स्टेटस रिपोर्ट किसी भी तरह से कार्यपालिका के किसी भी राजनीतिक व्यक्ति को नहीं दिखाई गई है."

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